निवेश के तरीके

बिटकॉइन किस देश की करेंसी है

बिटकॉइन किस देश की करेंसी है
क्या है क्रिप्टोकरंसी
क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती, जिससे इसके भावों में हेर—फेर नहीं किया जा सकता है। इसे वर्चुअल करंसी के तौर पर भी जाना जाता है। दुनिया भर में 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी हैं। हाल में फेसबुक ने भी खुद बिटकॉइन किस देश की करेंसी है बिटकॉइन किस देश की करेंसी है की करंसी लिब्रा का ऐलान किया था।

Bitcoin Kya Hai Puri Jankari Hindi Me 2023 | बिटकॉइन क्या होता है?

Bitcoin Kya Hai Puri Jankari Hindi Me 2023 | बिटकॉइन क्या होता है? | भारत में क्या है क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य? | बिटकॉइन अकाउंट | बिटकॉइन किस देश की करेंसी है | बिटकॉइन के नुकसान | बिटकॉइन का भविष्य | बिटकॉइन कैसे खरीदें | बिटकॉइन का भविष्य 2022

दुनियाभर के बाजारों में इस साल के शुरुआत से मंदी के कारण क्रिप्टो बाजार में भी इसका असर देखने को मिला है। साल 2022 में भारत में Bitcoin से जुड़े कुछ नए नियम भी प्रभाव में आए हैं। Bitcoin से होने वाली आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स और क्रिप्टो की लेनदेन में 1 प्रतिशत TDS का प्रावधान इनमें शामिल है।

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साल 2021 में Bitcoin के बाजार में पिछले वर्ष की तुलना में साढ़े 15 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली थी। जहां 2020 में भारतीय निवेशकों ने Bitcoin में महज 28.10 मिलियन यूएस डॉलर का निवेश किया था वहीं साल 2022 में यह बढ़कर लगभग 438.18 मिलियन यूएस डॉलर हो गया था। साल 2022 के बीते छह महीनों में क्रिप्टोकरेंसी में लगभग 139.9 मिलियन डॉलर का निवेश देखने को मिला है।

Bitcoin Kya Hai Puri Jankari Hindi Me

Bitcoin Kya Hai Puri Jankari 2023

दुनियाभर के बाजारों में इस साल के शुरुआत से मंदी के कारण Bitcoin बाजार में भी इसका असर देखने को मिला है। बीते कुछ समय से बाजार में क्रिप्टोकरेंसी के कमजोर होने से बड़े पैमाने पर भारतीय निवेशक भी इससे पैसा बाहर निकालते दिख रहे हैं। इससे बाजार में इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी के दिन ढल गए हैं या एक बार फिर एनएफटी या क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में रंगत लाैटेगी?

साल 2022 में भारत में Bitcoin से जुड़े कुछ नए नियम भी प्रभाव में आए हैं। क्रिप्टो से होने वाली आमदनी पर 30 प्रतिशत टैक्स और क्रिप्टो की लेनदेन में 1 प्रतिशत TDS का प्रावधान इनमें शामिल है। जानकार मानते हैं कि इसका असर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के आकड़ों पर देखने को मिल रहा है। ZebPay के सीईओ अविनाश शेखर के अनुसार नए नियमों के प्रभाव में आने से दिनोंदिन क्रिप्टों में निवेश और इससे जुड़े स्टार्टअप्स के शुरुआत होने के आंकड़ों में कमी देखने को मिली है।

बिटकॉइन क्या होता है?

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum) के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर में टोटल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 187.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली थी। पूरे क्रिप्टोबाजार में सिर्फ बिटकॉइन ने ही लगभग 60 प्रतिशत (59.8%) रिटर्न दिया था।

साल 2021 में एनएफटी (Non-Fungible Token) और मेटावर्स बाजार में निवेश क्रमशः 65 मिलियन अमेरिकी डॉलर और 0.84 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया गया है। इन निवेशों को देखते हुए इस बात का अनुमान लगाया जा सकता है कि इस सेक्टर में निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।

एनएफटी कंपनी nonfungible.com की एक स्टडी के अनुसार एनएफटी में निवेश के ओवरऑल परिदृश्य में साल 2022 में 21000 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।
एनएफटी और मेटावर्स ने ब्लॉकचैन पर उपयोगकर्ताओं को स्वामित्व के प्रमाण की अनुमति भी दे दी है। gurdianlink के सीईओ और कोफाउंडर रामकुमार सुब्रमण्यम के अनुसार साल 2022 में भारतीय डिजिटल बाजार में एनएफटी के कई प्रारूप देखने को मिले। इस दौरान भारतीय सेलिब्रिटीज और ब्राण्ड्स ने भी खुलकर एनएफटी और मेटावर्स कल्चर की वकालत की है।

Bitcoin बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2022 में एनएफटी और मेटावर्स मार्केट में अधिक उपयोगिता-उन्मुख और उपयोगकर्ता आधारित परियोजना देखने को मिल सकते हैं। प्ले टू अर्न की अवधारणा का भी असर देखने को मिलेगा। कई सरकारी इनिशियेटिव्स में भी एनएफटी और मेटावर्स का असर देखने को मिल सकता है।

वहीं अगर बात वैश्विक बाजारों की करें तो साल 2022 में Bitcoin, एनएफटी ओर मेटावर्स बाजार में क्रमशः 14270.38 मिलियन डॉलर, 5005.67 मिलियन डॉलर और 661.33 मिलियन डॉलर का निवेश देखने को मिला है। क्रिप्टो बाजार से जुड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी एक्सक्यूब लैब्स के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग निलेश जहारगिरदार का मानना है कि वैश्विक बाजार में भारत को लीडर के रूप में स्थापित करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक के तहत और अधिक निवेश की जरुरत है। उनका मानना है कि साल 2022 में भारत सरकार के बजट में डिजिटल करेंसी को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं उससे भारत में आने वाले दिनों में डिजिटल करेंसी का बाजार बढ़ने की उम्मीदें जगी हैं।

भारत में क्या है क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य?

ऐसे में हम यह कह सकते हैं कि भले ही Bitcoin वर्तमान में ग्लोबल बाजारों की अस्थिरता के कारण निवेशक डरकर Bitcoin बाजार से पैसे निकाल रहे हैं पर बाजार जैसे ही संभला इसमें दोबारा रंगत लौटने की उम्मीद बनी हुई है। बात अगर मेटावर्स की करें तो भारतीय बाजार अब तक इसके शॉपिंग और लेन-देन के लिए वर्जुअल हब नहीं बन पाया है।

हालांकि इस पूरी चर्चा का एक पक्ष यह भी है कि सरकार और केन्द्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से अब तक एनएफटी को लेकर कोई स्पष्ट नीति सार्वजनिक नहीं की गई है। अभी हाल ही में रिजर्व बैंक के गवर्नर शशिकांत दास ने कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी खतरनाक है।

Bitcoin Related FAQs

1 बिटकॉइन की कीमत कितनी होती है?

बिटकॉइन का मूल्य कई चीजों में निर्भर होता है। उनमें से दो सबसे महत्वपूर्ण चीजें आपूर्ति और माँग है। बिटकॉइन सीमित संख्या में पाया जाता है। 2,10,00,000 बिटकॉइन ही माइन किया जा सकता है। ऐसे में अगर आपूर्ति से कम माँग हो तो बिटकॉइन का मूल्य घटता है और उल्टा होने पर इसका मूल्य बढ़ता है। भारत में बिटकॉइन का मूल्य सबसे अधिक 44,54,673 भारतीय रुपए था।

बिटकॉइन क्या है और कैसे काम करता है?

बिटकॉइन एक वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है, आभासी मतलब कि अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई भौतिक स्वरुप नहीं है यह एक डिजिटल करेंसी है। यह एक ऐसी मुद्रा है जिसको आप ना तो देख सकते हैं और न ही छू सकते हैं। यह केवल इलेक्ट्रॉनिकली स्टोर होती है। अगर किसी के पास बिटकॉइन है तो वह आम मुद्रा की तरह ही सामान खरीद सकता है।

बिटकॉइन से क्या फायदा है?

क्रिप्टो माइनिंग या बिटकॉइन माइनिंग का मतलब पजल्स को सॉल्व करके नई बिटकॉइन बनाना है। चलिए थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं। जिस तरह हम किसी को पैसे भेजने को लिए कोई ट्रांजेक्शन करते हैं तो वह पहले बैंक के पास जाती है और फिर बैंक उसे वैलिडेट कर के आगे भेजता है।

बिटकॉइन का भविष्य क्या है?

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा को बिटकॉइन जैसी वर्चुअल मुद्राओं के सम्बन्ध में एक प्रेस प्रकाशनी जारी की गयी थी। इसमें कहा गया बिटकॉइन किस देश की करेंसी है था की इन मुद्राओं के लेन-देन को कोई अधिकारिक अनुमति नहीं दी गयी है और इसका लेन-देन करने में कईं स्तर पर जोखिम है। हाल ही में बिटकॉइन पर आर बी आई द्वारा लगाई गई रोक सुप्रीम कोर्ट की तरफ से हटाई गई है। फिर बाद में RBI ने पुन: इसके बारे में सावधानी जारी की थी।

केंद्र के फैसले से बिटकॉइन बोल्ड: दुनिया में क्रिप्टो का मार्केट गिरा; बिटकॉइन में 8.74% की गिरावट; इस करेंसी से जुड़ी हर बात जानिए

केंद्र सरकार की क्रिप्टोकरेंसी पर शिकंजा कसने की खबर के बाद ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसियों में गिरावट देखने को मिल रही है। हालाकि आज सुबह 10 बजे बिटकॉइन 17% से ज्यादा गिरावट देखी जा रही था लेकिन शाम तक इसमें रिकवरी देखने को मिली। शाम साढ़े 5 बजे इसमें 8.72% रह गई थी। यानी निवेशकों का भरोसा क्रिप्टोकरेंसियों पर बना हुआ है।

क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के लिए विंटर सेशन में बिल लाने की खबर सामने आने के बाद ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट देखी जा रही है। कीमत 24/11 को शाम साढ़े 5 बजे की है।

क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के लिए विंटर सेशन में बिल लाने की खबर सामने आने के बाद ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट देखी जा रही है। कीमत 24/11 को शाम साढ़े 5 बजे की है।

क्रिप्टोकरेंसी के लिए सरकार 29 नवंबर से शुरू होने जा रहे शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी को रेगुलेट करने वाला विधेयक संसद में पेश करेगी। बिल में सभी तरह की प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर पाबंदी लगाने की बात कही गई है। इसके बाद इसकी कीमत में 17% से ज्यादा की गिरावट आ गई थी।

क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के लिए विंटर सेशन में बिल लाने की खबर सामने आने के बाद ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट देखी जा रही है। कीमत 24/11 को सुबह 10 बजे की है।

क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने के लिए विंटर सेशन में बिल लाने की खबर सामने आने के बाद ज्यादातर क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट देखी जा रही है। कीमत 24/11 को सुबह 10 बजे की है।

हालांकि क्रिप्टो करेंसी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ ढील भी दे सकती है। ढील वाली कौन सी क्रिप्टोकरेंसी होंगी ये अभी साफ नहीं है। वहीं बिल की मदद से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अपनी आधिकारिक डिजिटल करेंसी जारी करने के लिए सुविधाजनक फ्रेमवर्क मिलेगा।

शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिशियल डिजिटल करेंसी बिल, 2021 समेत कुल 26 विधेयक पेश किए जाएंगे। लिस्ट में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा बिल 10वें नंबर पर है। भारत में क्रिप्टोकरेंसी के 1.5 से 2 करोड़ यूजर हैं। इस बिल के कानून बनने से ये सभी यूजर प्रभावित हो सकते हैं।

लोकसभा बुलेटिन में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े बिल की शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। लिस्ट में ये बिल 10वें नंबर पर है।

लोकसभा बुलेटिन में क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े बिल की शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। लिस्ट में ये बिल 10वें नंबर पर है।

अभी क्रिप्टो को लेकर कोई रेगुलेशन नहीं
वर्तमान में, देश में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई भी रेगुलेशन नहीं है। इस वजह से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्रिप्टोकरेंसी पर एक बैठक की थी और मजबूत रेगुलेटरी स्टेप्स उठाने के संकेत दिए थे। सरकार का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर रेगुलेशन नहीं होने से इसका उपयोग टैरर फंडिंग और काला धन की आवाजाही में हो रहा है।

क्रिप्टो को रोका नहीं जा सकता, लेकिन रेगुलेट किया जाना चाहिए
PM की बैठक के बाद क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भाजपा नेता जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाले पार्लियामेंट्री पैनल की पहली बैठक हुई थी। इस बैठक में आम सहमति बनी थी कि क्रिप्टोकरेंसी को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन इसे रेगुलेट किया जाना चाहिए।

क्रिप्टोकरेंसी से फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की चिंता
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास का भी बयान सामने आया था। दास ने SBI कॉन्क्लेव में कहा था, 'जब RBI ये कहता है कि क्रिप्टोकरेंसी से मैक्रोइकोनॉमिक और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की चिंताएं हैं, तो इस मुद्दे पर गहरी चर्चा की जरूरत है।'

दुनियाभर में क्रिप्टो करेंसी को किस तरह लिया जा रहा है?

  • इसे लेकर देशों का रिस्पॉन्स एक-सा नहीं है। मसलन, भारत और चीन जैसे देश इसका विरोध करते हैं। भारत में तो रिजर्व बैंक ने इस पर बैन लगा रखा था, पर अमेरिका समेत कई देश इसके अनुकूल स्कीम बना रहे हैं। सेंट्रल अमेरिका के अल सल्वाडोर की कांग्रेस ने 8 जून 2021 को बिटकॉइन कानून पास किया और यह छोटा देश बिटकॉइन को लीगल टेंडर बनाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।
  • अल सल्वाडोर में पहले अमेरिकी डॉलर से ही लेन-देन होते थे। अब वहां डिजिटल करेंसी में भी लेन-देन होते हैं। उसकी देखा-देखी, कई दक्षिण अमेरिकी और अफ्रीकी देश भी बिटकॉइन को लीगल स्टेटस देने पर विचार कर रहे हैं।
  • दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देश भी क्रिप्टो करेंसी और एक्सचेंज को रेगुलेट करने के लिए कानूनी स्ट्रक्चर बनाने पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर क्रिप्टो फ्रेंडली मियामी, US ने हाल ही में क्रिप्टो एनक्लेव का आयोजन किया। पूरी दुनिया में बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसी को अपनाने के प्रयास हो रहे हैं। कुछ देशों ने बिटकॉइन या अन्य क्रिप्टो करेंसी पर आधारित म्यूचुअल फंड भी लॉन्च किए हैं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है, यह कैसे काम करती है?
क्रिप्टोकरेंसी पर किसी का कंट्रोल नहीं है, यह पूरी तरह से डिसेंट्रलाइज्ड व्यवस्था है। कोई भी सरकार या कंपनी इस पर नियंत्रण नहीं कर सकती। इसी वजह से इसमें अस्थिरता भी है। यह ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी और डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम पर काम करती है, जिसे न तो कोई हैक कर सकता है और न ही किसी तरह की छेड़छाड़।

क्या है डिजिटल करेंसी जिसे RBI लाना चाहती है? सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC देश की फिएट करेंसी (जैसे रुपया, डॉलर या यूरो) का एक डिजिटल संस्करण है। इसे केंद्रीय बैंक जारी करता है। साथ ही इसकी गारंटी भी देता है। यह फिएट करेंसी के साथ ही वन टु वन एक्चेंजेबल है। इससे ट्रांजैक्शन बिना किसी मध्यस्थ या बैंक के हो जाता है।

रिजर्व बैंक से डिजिटल करेंसी आपको मिलेगी और आप जिसे पेमेंट या ट्रांसफर करेंगे, उसके पास पहुंच जाएगी। न तो किसी वॉलेट में जाएगी और न ही बैंक अकाउंट में। बिल्कुल कैश की तरह काम करेगी, पर होगी डिजिटल।

क्या यह क्रिप्टोकरेंसी का ही रूप होगा?
नहीं। क्रिप्टोकरेंसी के प्रति कोई लाएबल नहीं होता है, जबकि इसके ठीक विपरीत डिजिटल करेंसी केंद्रीय बैंक की देनदारी होगी। क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में बहुत उतार-चढ़ाव होता है। क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग होती है। इसके लिए ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। इसको कोई सरकार या कोई विनियामक अथॉरिटी जारी नहीं करती है। इसके उलट डिजिटल करेंसी को केंद्रीय बैंक जारी करता है।

क्या है Private Cryptocurrency जो बैन होगी, क्या बिटकॉइन इसमें शामिल है?

जीकैश, मोनेरो, डैश प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के कुछ उदाहरण है.

क्या है Private Cryptocurrency जो बैन होगी, क्या बिटकॉइन इसमें शामिल है?

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर सरकार द्वारा बिल लाने की घोषणा के बाद हाय तौबा मच गई है. अब जब भारतीयों के हजार-करोड़ों रुपए क्रिप्टो के बाजार में लगे हो तो हाय तौबा मची रहेगी. इसका असर ये हुआ कि एक तो मार्केट धड़ाम से गिर गया दूसरी तरफ पैनिक सेलिंग को बढ़ावा मिला. लेकिन सरकार द्वारा बिल की घोषणा पर नजर डालें तो वहां प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी को बैन करने की बात हो रही है.

अब ये प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या है और ये बिटकॉइन, ईथीरियम या डॉजकॉइन भी प्राइवेट क्रिप्टो हैं.

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

क्रिप्टोकरेंसी एक वर्चुअल करेंसी है, इसके साथ कुछ वैल्यू भी जुड़ी होती है. ये एक ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करती है. ये किसी बैंक ना मिलने की बजाय कंप्यूटर्स द्वारा माइन होती है. हालांकि इनके ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया जा सकता है, लेकिन सीमित जानकारियों के साथ.

अब भारत समेत दुनिया के कई देश में ना तो इसको लेकर कोई कानून है ना ही इसे सरकार मान्यता देती है. इसलिए भारत सरकार अब इस पर एक बिल लेकर आएगी ताकि कुछ कानून बनाएं जा सके.

क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांजेक्शन को ट्रैक करना काफी जटिल है और सरकार का मानना है कि इसका बड़े स्तर पर दुरुपयोग हो सकता है. या तो इसको हवाला फंडिंग या टेरर फंडिंग के उपयोग में लाया जा सकता है. इसलिए इसको या तो बैन करने की जरूरत है या फिर रेग्युलेट करने की.

प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी क्या होती है?

प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी प्राइवेट ब्लॉकचेन के सहारे ट्रांजेक्ट होती है. इसको ट्रेस करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. आमतौर पर इसकी परिभाषा भी यही है. जीकैश, मोनेरो, डैश प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी के कुछ उदाहरण है. वहीं बिटकॉइन, डॉजकॉइन, ईथीरियम ये सब पब्लिक क्रिप्टोकरेंसी हैं जिनके ट्रांजेक्शन को ट्रेस किया जा सकता है.

पेंच ये है कि प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी की कोई फिक्स परिभाषा तय नहीं हो पाई है. भारत सरकार प्राइवेट क्रिप्टो को किस तरह से परिभाषित करेगी ये बिल पेश पेश होने के बाद ही साफ हो पाएगा.

अब ऐसा हो सकता है कि सरकार उन सभी क्रिप्टोकरेंसी को प्राइवेट माने जो सरकार द्वारा जारी नहीं की गई है. या ऐसा भी हो सकता है कि जिन क्रिप्टोकरेंसी के ट्राजेक्शन की पहचान ना की जा सकती हो उनको सरकार प्राइवेट माने.

अब चूंकी सरकार अपनी एक डीजिटल करेंसी ला रही है इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि हर तरह की क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगा दिया जाएगा लेकिन कुछ अपवाद के साथ.

Cryptocurrency Bill की खबर के बाद पैनिक सेलिंग,क्या कह रहे एक्सपर्ट?

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टाटा नाम की ये पेनी क्रिप्टो क्वाइॅन भर रही उड़ान, 24 घंटे में 10 हजार बन गए ₹7 लाख, निवेशकों को 3,430% का तगड़ा रिटर्न

Cryptocurrency prices: आज 6 मार्च को बिटकॉइन समेत क्रिप्टोकरेंसी में रिकवरी देखने को मिल रही है। रविवार सुबह 11.30 बजे काॅइनमार्केट के मुताबिक, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी.

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Cryptocurrency prices: आज 6 मार्च को बिटकॉइन समेत क्रिप्टोकरेंसी में रिकवरी देखने को मिल रही है। रविवार सुबह 11.30 बजे काॅइनमार्केट के मुताबिक, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) की कीमत में 1.63 फीसदी की तेजी देखी गई और यह 39,503.36 डाॅलर पर पहुंच गई। वहीं, इथेरियम (ether) की कीमत में 1.16 फीसदी की तेजी देखी गई। इन सबके बीच टाटा क्वाइॅन (TATA Coin) नाम की क्रिप्टो क्वाइॅन (Crypto coin) ने सबको हैरान कर दिया। दरअसल, टाटा क्वाॅइन की कीमत में महज 24 घंटे में 3430.09 फीसदी की तेजी देखने को मिली। यानी निवेशकों को सिर्फ एक दिन में 3400 फीसदी से ज्यादा का फायदा हुआ। आइए जानते हैं इस पेनी टोकन के बारे में-

एक दिन में 7.31 लाख रुपये का फायदा
Coinmarket.com के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक पेनी क्रिप्टो टोकन Tata coin की कीमत 3,430 फीसदी उछल कर 0.1914 डॉलर (यानी भारतीय रुपया के हिसाब से 14.63 रुपये) के पार पहुंच गई जो कि एक दिन पहले टाटा क्वाइॅन की कीमत 0.00266 डॉलर (20 पैसा) पर थी। यानी एक दिन पहले अगर किसी निवेशक ने 10,000 रुपये लगाए होते तो अगले ही दिन यह रकम 7.31 लाख रुपये हो जाती।

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जानिए इस टोकन ने बारे में?
Coinmarket.com पर दी गई जानकारी के अनुसार, यह पेनी टोकन टाटा कॉइन बिनांस स्मार्ट चेन पर आधारित कम्युनिटी-संचालित क्रिप्टोकरेंसी है। टाटा कॉइन का उद्देश्य डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस को पूरी तरह से सुरक्षित बनाना है। इसका मकसद दुनिया भर में निवेशकों समेत मल्टीनेशनल कंपनियों और संगठनों को सुरक्षित पेमेंट सिस्टम प्रदान करना है, जिससे वे ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके आसानी से और बेहतर सुरक्षित रूप से डिजिटल लेनदेन कर सकें। बता दें कि टाटा कॉइन को 100% कम्युनिटी-संचालित बनाया गया है। Tata Coin को 'You' के स्वामित्व वाली दुनिया की पहली डिजिटल मुद्रा के रूप में लॉन्च किया गया है। यह डिजिटल करेंसी किसी व्यक्ति, संगठन, संस्था या समूह के स्वामित्व या नियंत्रण में नहीं रहेगी।

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ट्रेडिंग वाॅल्यूम में 18773.41 फीसदी की तेजी
इस पेनी डिजिटल करेंसी की कुल ट्रेडिंग वाल्यूम में 24 घंटे में 18773.41 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। टाटा क्वाॅइन की ट्रेडिंग वाॅल्यूम 3,503,413.69 डॉलर है। ग्लोबल क्रिप्टो मार्केट रैंक में यह #2926 पर है और मार्केट कैप 1,700,769 डॉलर है।

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इसका मैक्सिमम सप्लाई 9,000,000 टोकन है
टाटा कॉइन के पास कॉइन की सीमित सप्लाई है। यह "डिजिटल गोल्ड" के रूप में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसका मैक्सिमम सप्लाई 9,000,000 टोकन है। टाटा कॉइन की कोई टीम टोकन नहीं है और इसे 100% पब्लिक लिक्विडिडी के साथ सूचीबद्ध किया गया था।

दुनिया की सबसे महंगी करंसी, एक बिटकॉइन की कीमत 17 लाख रुपए

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सिक्के जैसी दिखने वाली क्रिप्टोकरंसी बिटकॉइन ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। एक बिटकॉइन किस देश की करेंसी है साल के भीतर करंसी ने अपनी कीमत में 349 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है, जो अब की किसी भी करंसी की तेजी का इतिहास है। इसके साथ ही एक बिटकॉइन की कीमत 23243 अमरीकी डॉलर पर पहुंच गई है, यानि भारतीय मुद्रा में करीब 17 लाख 10 हजार रुपए। इसके साथ ही बिटकॉइन का मार्केट कैप 31 लाख करोड़ को पार कर गया है। लॉकडाउन खुलने के बाद करंसी ने दो सौ गुना की तेजी हासिल की है।

1— बिटकॉइन में सोने जैसा भरोसा
बिटकॉइन ठीक सोने जैसा निवेश है, जिसे सुरक्षित माना जाता है। कोविड के बाद लोग आर्थिक जोखिमों से घबराए हुए हैं, ऐसे में सुरक्षित निवेश चाहते हैं। यही वजह है कि लोगों ने शुरुआती दौर में सोने में निवेश किया और उसके भाव तेजी से बढ़े। बड़े निवेशकों ने बिटकॉइन को निवेश का विकल्प बनाया। यह बैंकों के झंझट से मुक्त है, लेन-देन ओपन है और इसमें कोई हैकिंग या छीना—झपटी नहीं कर सकता है।

2— बड़ी कंपनियों का बड़ा निवेश
बिटकॉइन में भरोसे की बड़ी वजह निवेशकों में बड़े नामों का शामिल होना है। बिट गेट्स से लेकर टि्वटर के सीईओ जैक दोरसे निवेश कर चुके हैं। विश्व प्रसिद्ध कंपनी गुगेनहीम पार्टनर्स अपनी 5.3 बिलियन डॉलर की प्रॉपर्टी का 10 फीसद हिस्सा बिटकॉइन में लगाएगी। अमेरिकी कंपनी पे-पल ने बिटकॉइन से लेन-देन को मंजूर दी है। वॉल स्ट्रीट की कई कंपनियों निवेश के लिए कतार में हैं। इन कंपनियों को लगता है कि ब्याज दर जैसी मुसीबतों से छुटकारा पाते हुए बिटकॉइन को नया ठिकाना बनाया जा सकता है।

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क्या है क्रिप्टोकरंसी
क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती, जिससे इसके भावों में हेर—फेर नहीं किया जा सकता है। इसे वर्चुअल करंसी के तौर पर भी जाना जाता है। दुनिया भर में 1500 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी हैं। हाल में फेसबुक ने भी खुद की करंसी लिब्रा का ऐलान किया था।

देश में क्रिप्टोकरंसी में नई उम्र का निवेशक
देश में दो टॉप करंसी एक्सचेंज कंपनी कॉइनडीसीएक्स और वजीर एक्स के मुताबिक, वह देश में रोजाना 290 लाख से लेकर 360 लाख तक के सौदे कर रहे हैं, जिसमें से 80 फीसदी निवेशक भारतीय युवा है। जिसकी उम्र 25 से 40 साल के बीच में है। देश में क्रिप्टोकरंसी को लीगल मंजूरी मिलने के बाद निवेशकों में तेजी आ रही है।

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एक साल में 349 फीसदी की ग्रोथ

माह कीमत यूएस डॉलर में
17 दिसंबर—19 — 6,641 भारतीय कीमत करीब 4.88 लाख
जनवरी—20 — 9,349
फरवरी 20 — 8,543
मार्च 20 — 6,412
अप्रेल 20 — 8,629
मई 20 — 9,454
जून 20 — 9,135
जुलाई 20 — 11,333
अगस्त 20 — 11,644
सितंबर 20 — 10,776
अक्टूबर 20 — 13,797
नवंबर 20 — 19,698
17 दिसंबर 20 — 23,243 भारतीय कीमत करीब 17.10 लाख रुपए

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