निवेश के तरीके

छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है

छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है

Taking Stock |यूक्रेन संकट पर अनिश्चितता से बाजार में उतार-चढ़ाव, लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए कल कैसी रह सकती है इनकी चाल

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा का कहना है कि फिलहाल बाजार विदेशी धुन पर नाट रहा है। इसमें जल्द ही कोई बदलाव आने की उम्मीद नहीं है.

Kotak Securities के श्रीकांत चौहान का कहना है कि तकनीकी रुप से देखें तो निफ्टी अपने 50Day SMA के ऊपर बंद होने में कामयाब नहीं रहा जो एक नेगेटिव संकेत है

कारोबारी दिन के आखिरी दिन में बिकवाली के दबाव के चलते 16 फरवरी यानी आज के कारोबार में बाजार लाल निशान में बंद हुआ। आज बाजार में दिनभर हरे और लाल निशान में बीच ऊपर-नीचे होता रहा। निवेशकों की नजर यूक्रेन क्राइसिस पर लगी हुई थी। जिसका असर बाजार पर दिखा।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 145.37 अंक यानी 0.25 फीसदी टूटकर 57,996.68 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 30.25 अंक यानी 0.17 फीसदी टूटकर 17400 के नीचे बंद हुआ।

आज के कारोबार में Power Grid Corporation, UltraTech Cement, NTPC, ICICI Bank और SBI निफ्टी के टॉप लूजर रहें। वहीं Divi’s Labs, Adani Ports, ONGC, IOC and HDFC Life टॉप गेनर रहें।

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अलग-अलग सेक्टर पर नजर डालें तो निफ्टी फार्मा को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी बैंक, मेटल, पीएसयू बैंक में 0.5-1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। वहीं छोटे-मझोले शेयरों की चाल मिलीजुली रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स सपाट बंद हुआ। वहीं स्म़ॉलकैप इंडेक्स 0.42 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।

जानिए कल कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Kotak Securities के श्रीकांत चौहान का कहना है कि तकनीकी रुप से देखें तो निफ्टी अपने 50Day SMA के ऊपर बंद होने में कामयाब नहीं रहा जो एक नेगेटिव संकेत है। निफ्टी के लिए 17250- 17200 पर सपोर्ट नजर आ रहा है। वहीं 17,500-17,550 पर इसके लिए रजिस्टेंस नजर आ रहा है।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजित मिश्रा का कहना है कि फिलहाल बाजार विदेशी धुन पर नाट रहा है। इसमें जल्द ही कोई बदलाव आने की उम्मीद नहीं है। यूएस फेड के मीटिंग मिनट और रूसिया- यूक्रेन के बीच के तनाव पर बाजार की नजर बनी रहेगी। इसके अलावा कल होने वाली वीकली एक्सपायरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव की वजह बनेगी। हमारी सलाह है कि बाजार पर सर्तक नजरिया बनाए रखें और इसकी दशा और दिशा साफ होने का इंतजार करें।

इस फेस्टिवल सीजन में कितनी चमक बिखेरेगा गोल्ड?

सोने में निवेश तभी बढ़ता है, जब ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता या अस्थिरता का खतरा बढ़ने लगता है

इस फेस्टिवल सीजन में कितनी चमक बिखेरेगा गोल्ड?

पिछले कुछ महीनों में दुनिया भर में सोने की कीमतें लगातार नीचे आई हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें इस वक्त 1200 डॉलर प्रति औंस के करीब चल रही हैं. पिछले साल इसी समय ये कीमतें 1312 डॉलर प्रति औंस के करीब थीं, यानी पिछले साल भर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना साढ़े आठ परसेंट सस्ता हो चुका है. लेकिन ये कमी आपको भारतीय बाजारों में देखने को नहीं मिलेगी. उल्टा पिछले साल इस वक्त के मुकाबले सोने की कीमत में इजाफा ही हुआ है. इस वक्त भारतीय बाजारों में 10 ग्राम सोने की कीमत 28,000 के करीब है, जो पिछले साल 18 सितंबर को 2700 रुपए के करीब छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है थी. ऐसा डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में तेज गिरावट की वजह से हुआ है, जो हमें पिछले साल भर के दौरान देखने को मिली है.

गोल्ड डिमांड में पिछले कुछ महीनों में दिखी है गिरावट

दरअसल, सोने में निवेश तभी बढ़ता है, जब ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता या अस्थिरता का खतरा बढ़ने लगता है. ऐसे समय में इन्वेस्टर सोने को ‘सेफ हैवन’ मानकर अपनी पूंजी वहां डालते हैं, लेकिन ना तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ना ही घरेलू स्तर पर सोने में इन्वेस्टमेंट डिमांड बढ़ी है. भारत में तो गोल्ड डिमांड में कमी ही आई है.

सोने में निवेश तभी बढ़ता है, जब ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता या अस्थिरता का खतरा बढ़ने लगता है फोटो:iStock

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में जहां ज्वेलरी डिमांड 8 फीसदी घटी, वहीं इन्वेस्टमेंट डिमांड में 5 फीसदी की कमी आई. इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार कमजोर होता रुपया रहा, जिसकी वजह से भारत में सोने की कीमतें ऊंची बनी रहीं.

कब खरीद सकते हैं निवेश के लिए सोना

अगर आप अपने शौक के लिए, शादी-विवाह जैसी जरूरतों के लिए या फिर शगुन के लिए सोना खरीदना चाहते हैं तो आप कभी भी खरीद सकते हैं. लेकिन निवेश के लिए गोल्ड में पैसे लगाने के पहले इन तीन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

जब शेयर बाजार में गिरावट तेज हो- आमतौर पर जब शेयर बाजार मंदी की गिरफ्त में होता है तो वो समय गोल्ड में इन्वेस्टमेंट का सही समय होता है. क्योंकि ज्यादातर लोग शेयर बाजार से पैसे निकालकर गोल्ड जैसे दूसरे एसेट में लगाने लगते हैं.

जब गोल्ड और सिल्वर का रेश्यो कम हो- गोल्ड और सिल्वर के रेश्यो का मतलब है कि दस ग्राम गोल्ड खरीदने के लिए कितने ग्राम सिल्वर की जरूरत होती है. अगर ये रेश्यो कम है तो इसका मतलब है कि चांदी के मुकाबले गोल्ड सस्ता है और आप इसमें खरीद कर सकते हैं. लेकिन अगर गोल्ड-सिल्वर रेश्यो ऊंचा है तो इसका मतलब है कि गोल्ड ओवरवैल्यूड है और अब इसमें अपनी पोजिशन हल्की करने का वक्त आ गया है.

जब वास्तविक ब्याज दरें कम हों- वास्तविक ब्याज दरों का मतलब है मौजूदा ब्याज दरों और महंगाई दर का अंतर. उदाहरण के लिए अगर बाजार में ब्याज दर है 9 फीसदी और महंगाई दर है 5 फीसदी तो वास्तविक ब्याज दर या रियल इंटरेस्ट रेट हुई 9-5 यानी 4 फीसदी. जब रियल इंटरेस्ट रेट कम होने लगता है तो गोल्ड की डिमांड बढ़ने लगती है.

अभी गोल्ड में इन्वेस्ट करें या नहीं?

क्या इस वक्त सोने में निवेश करना चाहिए, इस सवाल का जवाब कमोडिटी बाजार के जानकार सावधानी के साथ ही दे रहे हैं. जहां तक मौजूदा हालातों की बात है तो अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, डॉलर-रुपए एक्सचेंज रेट और ब्याज दरों पर यूएस फेड के फैसले, इन तीनों पर आपको नजर रखनी होगी. अगर यूएस फेड फिर से ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करता है तो गोल्ड की इंटरनेशनल कीमतों में उछाल की संभावना घट जाएगी.

अक्टूबर के बाद से देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो जाएगी और सोने की फेस्टिवल डिमांड में तेजी आएगी फोटो:iStock

हालांकि अक्टूबर के बाद से देश में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो जाएगी और सोने की फेस्टिवल डिमांड में तेजी आएगी. इसका नतीजा सोने की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है. और, अगर डॉलर के मुकाबले रुपए में मजबूती आती है तो इसका फायदा भी भारत में गोल्ड इन्वेस्टर्स को होगा. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भी अगस्त में अपनी रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि कंज्यूमर डिमांड में बढ़ोतरी के बाद गोल्ड की कीमतों में आने वाले महीनों में सुधार होगा.

(धीरज कुमार जाने-माने जर्नलिस्‍ट हैं. इस आर्टिकल में छपे विचार उनके अपने हैं. इसमें क्‍व‍िंट की सहमति होना जरूरी नहीं है)

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इक्विटी Vs गोल्डः सोने की और बढ़ेगी चमक! कोरोना संकट में क्यों शेयर बाजार से बेहतर विकल्प?

कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी लगातार बढ़ रहे हैं. ये कब तक रुकेंगे, इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है.

इक्विटी Vs गोल्डः सोने की और बढ़ेगी चमक! कोरोना संकट में क्यों शेयर बाजार से बेहतर विकल्प?

कोरोना वायरस महामारी के मामले अभी लगातार बढ़ रहे हैं. ये कब तक रुकेंगे, इसे लेकर अभी कुछ साफ नहीं कहा जा सकता है. कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इक्विटी निवेशकों के मन में भी अनिश्चितता बनी हुई है. फिलहाल इक्विटी मार्केट में निवेश के विकल्प सीमित हो गए हैं. दूसरी ओर इसी अनिश्चितता की वजह से सोने की मांग जमकर बढ़ी है और इस साल अच्छा खासा रिटर्न मिला है. इससे सोने का भाव भी आसमान पर पहुंच गया है. ऐसे में निवेशकों के मन में दुविधा है कि वे सुरक्षित विकल्प के रूप में कहां पैसा लगाएं. पिछले 10 साल में दोनों बाजारों की ग्रोथ ट्रैजेक्टरी हमें यह बता सकती है कि अनिश्चितता के वर्तमान समय में बेहतर विकल्प क्या है.

इक्विटी और गोल्ड मार्केट के ट्रेंड

पिछले 10 साल में, भारतीय शेयर बाजार इंडेक्स जैसे सेंसेक्स (बीएसई 30) और बीएसई-500 ने 9.05 फीसदी और 8.5 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न दर्ज किया है. 2010 और 2015 के बीच की अवधि में 2012 की आर्थिक मंदी के बावजूद एक क्रमिक ग्रोथ देखी गई. बाद में फरवरी 2016 से जनवरी 2020 तक ग्रोथ देखने को मिली. वहीं, इस दौरान की बात करें तो दिसंबर, 2019 तक सेंसेक्स की ग्रोथ लगभग 17,500 अंकों से बढ़कर 40,000 अंक तक पहुंच गई. जो पूरे सेक्टर में इक्विटी से आए कैपिटल को दर्शाता है. हालांकि इस बीच वैश्विक रुझानों के कारण उतार-चढ़ाव भी हुआ.

लेकिन कोविड-19 महामारी बढ़ने के साथ वैश्विक बाजारों में बड़ी गिरावट आई. ज्यादातर देशों में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियां मंद पड़ गईं, इसके परिणामस्वरूप अप्रैल-2020 की शुरुआत तक भारतीय बाजार बुरी तरह से ढह गए. हालांकि, अप्रैल के बाद से रिकवरी काफी महत्वपूर्ण रही.

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दूसरी ओर, इस दौरान सोने में शानदार तेजी देखने को मिली. भारत में आर्थिक विकास की गति धीमी होने के परिणामस्वरूप पिछले 1 साल के अंदर ही सोने की कीमतों में 35,000 से लेकर 50,900 तक की ग्रोथ दिखी. सिर्फ अप्रैल में सोने में निवेश ने 11 फीसदी रिटर्न दिया. मौजूदा स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में भी इसमें अच्छी खासी तेजी का अनुमान है. असल में उथल-पुथल के समय में सोना और संबंधित एसेट क्लास लंबे समय से सुरक्षित विकल्प रहे हैं.

इन वजहों से सोना बेहतर विकल्प

a) 2008 की मंदी में प्रमुख बैंकों और दुनियाभर के बाजारों के टूटने के बाद यूएस फेड और अन्य सेंट्रल बैंकों ने बड़े प्रोत्साहन पैकेजों से वैश्विक वित्तीय प्रणाली में रिकवरी लाई थी. बाद के वर्षों में कई बाजारों पर उसका प्रभाव जारी रहा. ग्रीस जैसे छोटे यूरोपीय देश कर्ज में डूब गए और यूरोपीय यूनियन के एकल बाजार को मजबूत करने के लिए यूरोपीय सेंट्रल बैंक को प्रोत्साहन देना पड़ा. आज की बात करें तो महामारी के बाद के उपायों के संबंध में वैश्विक बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को कम किया है. आगे इसमें और कमी आ सकती है. यह सोने के लिए पॉजिटिव है.

b) कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 2020 के लिए 4.9 फीसदी रेंज में रखा. यह जो अप्रैल के फोरकास्ट से 1.9 फीसदी कम है. इसके अलावा आईएमएफ की अप्रैल-2020 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में 3 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया गया था, जो कि 2008 के वित्तीय संकट के छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है दौरान बनी स्थिति से भी बदतर है. कंसल्टिंग फर्म डेलोइट के आउटलुक के अनुसार इस मंदी के चलते बाजारों और बैंकों पर बुरा असर हो सकता है. इसमें बॉन्ड यील्ड, क्रूड की कीमतें और ब्याज दरों में और कमी का अनुमान जताया गया है. ऐसा होने पर सेफ हैवन के रूप में सोने में खरीददारी और बढ़ेगी.

c) कोविड-19 के लांग टर्म रिस्क हैं, हालांकि इसका आंकलन ठीक ठीक नहीं किया जा सकता है. लेकिन यह साफ है कि संकट अब भी खत्म होता नहीं दिख रहा है. लिक्विडिटी और सीमित गतिविधि के अधिक स्तर के साथ, अनिश्चित भविष्य के लिए सोने में निवेश का ट्रेंड कायम रहने की संभावना है. हालांकि, सोने की कई निवेश संभावनाओं पर ध्यान देना आवश्यक है, जो मुद्रास्फीति के ट्रेंड से मुकाबला कर सकती हैं.

d) वैश्विक स्तर पर, केंद्रीय बैंकों ने आर्थिक अनिश्चितता को ध्यान में रखकर सोने में खरीददारी बढ़ाई है. यह संकेत है कि आगे गोल्ड मार्केट में और तेजी आ सकती है. ऐसे में फिलहाल तो इक्विटी की बजाए सोना एक बेहतर निवेश विकल्प लग रहा है.

लेखक: अनुज गुप्ता, डिप्टी वाइस प्रेसिडेंड (कमोडिटी एंड करंसी), एंजेल ब्रोकिंग

Tag: economy

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इसमें निश्चित बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों का फंड मैनेजर के प्रति कोई दायित्व नहीं होता है। यह फंड मैनेजर को एक विविध पोर्टफोलियो बनाने में मदद करता है। कर्नल संजीव गोविला (सेवानिवृत्त) के अनुसार, फ्लेक्सी कैप फंड बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करते हैं। फंड मैनेजर के लिए मार्केट कैप एक्सपोजर को बदलना आसान होता है। निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को संतुलित करना आसान है। छोटे निवेशकों के लिए यह एक आकर्षक योजना है। आप अच्छे शेयरों में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल एएमसी के चीफ बिजनेस ऑफिसर अखिल चतुर्वेदी के मुताबिक, एसआईपी में छोटे निवेशकों में अनि​श्चितता बनी हुई है लगातार निवेश के चलते इक्विटी फंड्स में नेट इनफ्लो हो रहा है। वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद, इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेशकों की दिलचस्पी अधिक बनी हुई है। निवेशक सभी कैटेगरी के इक्विटी फंड (लार्ज कैप/मिड कैप/फ्लेक्सी कैप आदि) में निवेश करते हैं। डायनेमिक/बीएएफ श्रेणी में भी सकारात्मक रुझान है। जोखिम और अस्थिरता में खुदरा निवेशकों के लिए यह एक बहुत अच्छा विकल्प है।

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