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प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है

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बाजार के बदलते मिजाज पर रखिए नजर

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बाजार में किसी भी उत्पाद की लॉन्चिंग से पहले कंपनियों के जेहन में एक बात जरूर होती है कि लोगों को उनका उत्पाद पसंद आएगा या नहीं। लोग क्या पसंद करते हैं? उत्पाद की बिक्री प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है कैसी रहेगी. इन सवालों के जवाब पाने के लिए कंपनियां बाकायदा मार्केट रिसर्च कराती हैं। फिर मार्केटिंग की रणनीति बनाती हैं। ऐसा कमोबेश सभी कंपनियां करती हैं। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में मार्केट रिसर्च की अहमियत बढ़ी है क्योंकि बाजार का मिजाज रोज बदल रहा है। किसी भी उत्पाद की लॉन्चिंग में कंपनियों के करोड़ों रुपए दांव पर लगे होते हैं। प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है इसलिए कंपनियां कोई रिस्क नहीं लेना चाहतीं। किसी प्रोडक्ट या सर्विस की लॉन्चिंग/ रीलॉन्चिंग से पहले वे मार्केट सर्वे का सहारा जरूरी लेती हैं। मार्केट प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है रिसर्च सोसायटी ऑफ इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में रिसर्च इंडस्ट्री की वर्तमान विकास दर करीब 10 प्रतिशत है। इसमें आगे और विस्तार की उम्मीद बनी हुई है क्योंकि देश में कंज्यूमर कॉन्फिडेंस लगातार बढ़ रहा है।

संचालन रणनीति भाग २ (Operational Strategy-2)

संचालन रणनीति

जैसे की हमने हमारे पहले आर्टिकल मे जाना की संचालन रणनीति आखिर होता क्या है? संचालन रणनीति (Operational Strategy) संगठन (Organizations) के सभी घटकों या फिर कहे विभागों के (Functions) कार्यों को पूरा करने के लिए रचना (Framework) प्रदान करता है | आसान प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है भाषा मे समझे तो संचालन रणनीति (Operational Strategy) उत्पादों, सेवाओं और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने की क्षमता प्रदान करती है| मजबूत संचालन रणनीति का इस्तेमाल नहीं करने से बहुत सी छोटी बड़ी कंपनियां आज मार्केट में रहने के लिए संघर्ष कर रहे है| इस आर्टिकल में हम जानेंगे की संचालन रणनीति कैसे बनाते हैं और रणनीति तैयार करते समय किन बातों पर विचार करने की जरूरत है|

ऋषि सुनक ने भारत और चीन के लिए कह दी यह बात, एक होगा खुश, दूसरा नाराज

ऋषि सुनक

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2022,
  • (अपडेटेड 29 नवंबर 2022, 11:26 AM IST)

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने पद संभालने के बाद विदेश नीति पर अपने पहले प्रमुख संबोधन में चीन सरकार को आईना दिखाया. सुनक ने चीन की बढ़ती निरंकुशता को ब्रिटेन के मूल्यों और उसके हितों के लिए बड़ी चुनौती बताया है. ऐसे में उन्होंने कहा कि चीन के साथ ब्रिटेन के संबंधों का सुनहरा युग खत्म हो गया है.

सुनक ने लंदन में लॉर्ड मेयर के सालाना बैंक्वेट के दौरान कहा कि ब्रिटेन, चीन जैसे वैश्विक प्रतिस्पर्धी देशों के खिलाफ खड़ा होगा. यह सिर्फ बयानबाजी के स्तर पर नहीं होगा बल्कि व्यावहारिक भी होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए ब्रिटेन समान विचारधारा वाले अपने सहयोगी देशों अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ संबंधों को और बढ़ावा देगा.

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ऋषि सुनक का कहना है कि हम चीन को हमारे मूल्यों और हितों के लिए बड़ी चुनौती मानते हैं. एक ऐसी चुनौती, जो चीन की लगातार बढ़ रही निरंकुशता के साथ ही और बढ़ती जा रही है.

चीन की बेहद सख्त जीरो कोविड रणनीति के विरोध में लोगों के प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनक ने कहा कि चीन सरकार प्रदर्शन कर रहे लोगों को सुनने के बजाए उनकी आवाज दबाने में लगी है. बीबीसी के एक पत्रकार के साथ भी मारपीट की गई.

उन्होंने कहा कि मीडिया और हमारे सांसदों को इस तरह के मामलों को बिना किसी रोक-टोक के सामने रखना चाहिए.

भारत के साथ FTA जल्द होगा

इस दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सुनक ने भारत के साथ नए फ्री ट्रेड डील (एफटीए) को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन जल्द ही यह नई डील करेगा. ठीक इसी तरह की एक डील इंडोनेशिया के साथ भी होगी.

'द कश्मीर फाइल्स' पर विवाद क्यों, क्या कश्मीरी पंडितों को न्याय मिला?

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'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म अपनी रिलीज के समय से ही विवादों में है। कश्मीरी पंडितों के पलायन पर बनी फिल्म द कश्मीर फाइल्स मार्च में जब रिलीज हुई तो बीजेपी शासित तमाम राज्य उसे अपने-अपने ढंग से प्रमोट करने में जुट गए थे। लेकिन अधिकतर फ़िल्म समीक्षकों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे प्रोपेगेंडा फ़िल्म बताया। इन आरोपों-प्रत्यारोपों पर एक समय ख़ूब हंगामा हुआ था। फिर यह विवाद प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है धीरे-धीरे गायब हो गया। लेकिन सोमवार को एक बार फिर से यह विवाद तब खड़ा हो गया जब 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव यानी आईएफएफआई के समापन समारोह में महोत्सव के जूरी प्रमुख नादव लापिड ने कह दिया कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म फेस्टिवल की स्पर्धा में शामिल भी किए जाने लायक नहीं थी। उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 15 फ़िल्में देखीं। उनमें से 14 में सिनेमाई गुण थे, चूक थी और इन पर चर्चाएँ हुईं। 15वीं फिल्म द कश्मीर फाइल्स से हम सभी परेशान और हैरान थे। यह एक प्रोपेगेंडा, भद्दी फिल्म की तरह लगी, जो इस तरह के प्रतिष्ठित फिल्म समारोह के कलात्मक प्रतिस्पर्धी वर्ग के लिए अनुपयुक्त है।' तो सवाल है कि आख़िर इस फ़िल्म में ऐसा क्या है कि जूरी प्रमुख को यह कहना पड़ा?

प्रोपेगेंडा फैलाया गया: पवार

एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने कहा था कि बीजेपी द कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर जहरीला माहौल बना रही है। पवार ने कहा था कि बीजेपी कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन को लेकर फर्जी प्रोपेगेंडा फैला रही है। पवार ने कहा था कि इस तरह की फिल्म को स्क्रीनिंग के लिए मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए थी लेकिन इसे टैक्स में छूट भी दी जा रही है।

आलोचकों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था, 'वे गुस्से में हैं क्योंकि हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म उस सच्चाई को सामने ला रही है प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है जिसे जानबूझकर छिपाया गया था। पूरी जमात जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा फहराया था, 5-6 दिनों से उग्र है। तथ्यों और कला के आधार पर फिल्म की समीक्षा करने के बजाय, इसे बदनाम करने की साज़िश की जा रही है।'

इस फ़िल्म पर विवाद होने के बाद सवाल पूछा जा रहा है कि क्या कश्मीरी पंडितों के हालात में बदलाव आया? कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यक हिंदू कश्मीरी पंडित समुदाय के पलायन के 32 साल हो गए हैं। जनवरी और मार्च 1990 के बीच घटी यह घटना ठीक उसी प्रतिस्पर्धी रणनीति क्या है समय हुई थी जब बीजेपी पूरे उत्तर भारत में अपनी रफ़्तार बढ़ा रही थी। वर्षों से कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा और उनका पलायन एक प्रबल हिंदुत्व मुद्दा बन गया है। इस मुद्दे को गाहे-बगाहे क़रीब-क़रीब हर चुनाव में उठाया जाता रहा है। लेकिन क्या उनकी स्थिति बदली? क्या वे कश्मीर घाटी में वापस लौट पाए?

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