निवेश के तरीके

निवेश से जुड़े कुछ टिप्स

निवेश से जुड़े कुछ टिप्स
क्या आपने इस बात को महसूस किया है कि बचत और निवेश से जुड़े जो सबसे काम के सुझाव होते हैं, वे बेहद आसान होते हैं. उदाहरण के लिए: सबसे पहले निवेश करें, अपनी बचत को काम निवेश से जुड़े कुछ टिप्स पर लगाएं, ऋण कम से कम लें और इमर्जेंसी फ़ंड ज़रूर बनाएं. यहां हम कुछ इसी तरह की निवेश और बचत से जुड़ी सलाह के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्हें अनदेखा कर के कहीं बाद में आपको पछताना न पड़े.

Share Bazar Tips in Hindi, शेयर बाजार टिप्स हिंदी में

Share Bazar Tips in Hindi, शेयर बाजार टिप्स – जब भी शेयर बाजार में निवेश करे, एक बाद जरूर ध्यान रखे – “शेयर बाजार से अमीर बनने के लिए, डरे जब सब लालची हो रहे हो, लालची बने जब सब डर रहे हो। ” अब तक हमने आपको शेयर बाजार से जुड़े कई जरुरी बातें बताये। लेकिन आज इस पोस्ट में, मै आपके लिए लेके आया हु शेयर बाजार में मुनाफा कमाने की किफायती और असरदार टिप्स। ये सच है शेयर बाजार में कोई नहीं जनता कब आप मुनाफा कमा ले और कब आपका नुकसान हो जाए। लेकिन अगर आप ये शेयर बाजार की टिप्स अपनाएंगे तो आप Share Bazar से मुनाफा बनाकर ही वापस जाएंगे।

1. भेड़ चाल में ना चले:

आमतौर पर खरीदारो का निर्णय उनके अपने परिचितों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों के कार्यों से काफी हद तक प्रभावित होता है। तो आपके आसपास के अगर सभी लोग किसी विशेष स्टॉक (Stock) में निवेश कर रहे हैं, आपके भी उसे स्टॉक में निवेश करने की संभावना ज्यादा होगी। लेकिन क्या ऐसा करना सही है? जी नहीं ऐसा करना सही नहीं है क्यूंकि यह रणनीति लंबी अवधि (long term investment) में आपको नुकसान पंहुचा सकती है।

यह कहने की ज़रूरत नहीं है की यदि आप शेयर मार्किट (share market) में अपना मेहनत का पैसा गवना नहीं चाहते है तो भेड़ चाल में चलना बंद करदे। खुद से कंपनी के बारे में अच्छे से रिसर्च करे, मार्किट को समझे और तभी अपना पैसा लगाए।

2. निवेश करने से पहले स्टॉक के बारे में उचित जानकारी रखे

स्टॉक में निवेश (investment) करने से पहले यह बहुत जरुरी है की आपके पास उस विशेष स्टॉक की उचित जानकारी हो जिसमे आप निवेश करना चाह रहे हो। पर अक्सर लोग ऐसा करते नहीं है। असलियत में एक निवेशक (investor) किसी स्टॉक में निवेश नहीं करता है, बल्कि वो कंपनी में या उस वर्ग (industry) में निवेश करता है जिसे कंपनी जुडी हुई है।

3. उसी व्यवसाय में निवेश करें जिसे आप समझते हैं

कभी भी किसी स्टॉक में निवेश न करें बल्कि आपको हमेशा एक व्यवसाय में निवेश करना चाहिए। लेकिन एक बात का ध्यान दे की उसी व्यवसाय में निवेश करे जिसे आप समझते हैं। तो अगर में आपको सीधे शब्दो में कहु तो किसी भी Share में निवेश करने से पहले यह देखे कि वह कंपनी क्या व्यवसाय करती हैं।

4. मार्किट को टाइम करने की कोशिश ना करे

सबसे जरुरी बात जो आपको धयान में रखनी है वो है कभी मार्किट को टाइम करने की कोशिश न करे। शेयर मार्किट के जानकर और उसे मुनाफा बनाने वाले निवेशक Warren Buffett और Rakesh Jhunjhunwala भी कभी मार्किट को टाइम करने की कोशिश नहीं करते। हालांकि उनके पास भी किसी भी शेयर के प्राइस ट्रेंड (price trend) के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। परन्तु अक्सर ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर निवेशक एक पर्टिकुलर स्टॉक के मूल्य के प्रवृत्ति की भविष्यवाणी करते है जो कि बहुत गलत हैं। क्यूंकि अगर आप ऐसा करते हैं तो आप अक्सर अपने मेहनत का पैसा गवां सकते हैं।

तो आपको एक सुझाव जो मैं देना चाहूंगी वह यह है की आप कभी भी मार्किट को टाइम करने की कोशिश ना करे।भविष्य मे शेयर का मूल्य किस तरफ जायेगा, ऊपर जायेगा या नीचे जायेगा यह कोई नहीं बता सकता है और अगर आप को लगता है आप बता सकते है तो यह सिर्फ और सिर्फ आपका भरम है। और मार्किट को टाइम करने के चक्कर में बहुत लोगो ने अपना पैसा गवाया है।

5. कभी भी निवेश के समय भावुक ना हो

अक्सर लोग निवेश के वक़्त भावुक हो जाते है और वह गलती कर बैठते हैं जो की गलत हैं। भावुक होने से मेरा मतलब है लालची हो जाना या जल्दी डर जाना यह सोच कर की हम पैसा गवां देंगे। लालची ना होने से मेरा मतलब है कि जब एक शेयर का कीमत ऊपर जाता है तो एक समय के बाद वह नीचे भी आता हैं। एक निवेशक यह समय का अंदाज़ा नहीं कर पाता है और पैसा गवां बैठते है। ज़्यादा पैसा कमाने की चाह में वह अपना कमाया हुआ निवेश से जुड़े कुछ टिप्स पैसा भी गवां बैठते हैं।

साथ ही अक्सर लोग दुसरो की शार्ट टर्म निवेश (short term investment) की सफलता कहानियाँ सुन कर खुद लालची हो जाते है और खुद भी ज्यादा पैसा कमाने की लालच में गलती कर बैठते हैं। जब Share Market नीचे को गिरती हैं तो निवेशक घबरा जाते हो और अपना पैसा शेयर बाजार से निकल लेते है।

6. एक डाइवर्सिफाइड (Diversified) पोर्टफोलियो बनाएं

अपना पोर्टफोलियो बनाने से पहले यह बहुत जरुरी है की आप अपने portfolio में डाइवर्सिफाइड एसेट्स (निवेश से जुड़े कुछ टिप्स diversified asset) डाले ताकि आपको कम रिस्क में ज्यादा रिटर्न्स (return) मिले। किस हद तक आप का पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड है यह निवेशक की जोखिम लेने वाली क्षमता पर निर्भर करता हैं।

7. हमेशा मार्किट से रीयलिस्टिक ही उम्मीद रखें

इसमें कुछ भी गलत नहीं है कि निवेशक अपने निवेश से ज्यादा रिटर्न्स की उम्मीद करते हैं। परन्तु अपने निवेश से कितनी उम्मीद रखे इस चीज़ का अंताजा लगाना बहुत ही जरुरी है।

Share Bazar Tips पर यह अध्याय ‘Share Bazar Tips in Hindi’ शेयरों से संबंधित किसी भी संदेह को साफ करता है, आपको शेयरों को समझने में मदद करता है और शेयरों में निवेश कैसे किया जाता है समझने में मदद करता है।

मुश्किल में हैं घोटाले से जुड़े कुछ शेयर

पिछले दो दशकों में विभिन्न घोटालों, धोखाधड़ी आदि में शामिल रही कंपनियां अपने सर्वोच्च स्तर के मुकाबले बाजार कीमतों का 90 फीसदी से ज्यादा गंवा चुकी हैं। यह जानकारी आंकड़ों से मिली। 1998 से 2001 तक भारतीय शेयर बाजार में घोटाले में शामिल रहे पूर्व ब्रोकर केतन पारिख को साल 2008 में सजा सुनाई गई थी। केतन पारिख के शेयरों में शामिल (के-10) मसलन हिमाचल फ्यूचरिस्टिक कम्युनिकेशन (एचएफसीएल), जीटीएल और पेंटामीडिया ग्राफिक्स और मुक्ता आट्र्स, टिप्स इंडस्ट्रीज व प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस में इनका भारी निवेश था और अभी इन शेयरों का कारोबार साल 2000 के सर्वोच्च स्तर के मुकाबले 99 फीसदी से कम पर हो रहा है।

1998-2001 के दौरान पारिख ने कृत्रिम तरीके से चुनिंदा शेयरों (अनौपचारिक तौर पर इसे के-10 शेयर कहा जाता है) की कीमतों को मनमाने तरीके से आगे बढ़ाया और इसके लिए गुजरात के माधवपुरा मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक समेत विभिन्न बैंकों से बड़ी उधारी का इस्तेमाल किया। इस सहकारी बैंक में वह निदेशक थे। इसी तरह यूनिटेक और डीबी रियल्टी (जिनके प्रवर्तकों का नाम 2009 के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में था) के शेयर अपने सर्वोच्च स्तर से अपना बाजार मूल्यांकन 85 फीसदी से ज्यादा गंवा चुके हैं। ऐसा तब भी देखने को मिल रहा है जब सीबीआई की विशेष अदालत ने 2जी घोटाले के सभी आरोपियों को दिसंबर 2017 में दोषमुक्त करार दे दिया।

सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद डीबी रियल्टी का शेयर 20 दिसंबर 2018 के 36.45 रुपये के मुकाबले 130 फीसदी चढ़कर 10 जनवरी 2018 को 83.80 रुपये पर पहुंच गया। अभी यह शेयर बीएसई पर 58.15 रुपये पर कारोबार कर रहा है। 31 मार्च 2010 को कारोबार के दौरान इसने 540 रुपये के सर्वोच्च स्तर को छू लिया था। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, कोई घोटाला होने पर उसमें शामिल कंपनियों को लेकर निवेशकों का भरोसा हिल जाता है। इसके परिणामस्वरूप शेयर में गिरावट आती है। के-10 शेयरों की बात करें तो अब कंपनियों में कुछ नहीं बचा है। इनमें से ज्यादातर का फंडामेंटल कमजोर है और ये एक्सचेंज पर अपनी खोई गरिमा वापस पाने में अक्षम रही हैं।

सोमवार को ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) फिसलकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर निवेश से जुड़े कुछ टिप्स 92.50 रुपये पर आ गया क्योंकि खबरों में कहा गया था कि सीबीआई ने सरकारी बैंक की शिकायत पर दिल्ली के एक जौहरी के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जो 3.9 अरब रुपये के कर्ज घोटाले से जुड़ा है। गीतांजलि जेम्स और डी एस कुलकर्णी डेवलपर्स के निवेशकों भी अपनी कुल बाजार परिसंपत्तियों का 96 फीसदी गंवा चुके हैं। ये शेयर क्रमश: 24 अप्रैल 2013 व 8 दिसंबर 2006 को अपने सर्वोच्च स्तर 650 रुपये पर पहुंच गए थे।

गीतांजलि जेम्स के मामले में इसके प्रबंध निदेशक मेहुल चोकसी का नाम पंजाब नैशनल बैंक के 114 अरब रुपये के घोटाले में शामिल है। इस घोटाले के केंद्र में देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक पीएनबी है जिसका शेयर 14 फरवरी को घोटाला सार्वजनिक होने के बाद से अब तक 30 फीसदी टूट चुका है। चोकालिंगम ने कहा, पीएनबी के मामले में मौजूदा बकाया शुद्ध एनपीए इसकी वित्तीय हैसियत के करीब है। अभी तक 114 अरब रुपये का घोटाला सामने आया है। यह शेयर भाव पर दबाव बनाए रख सकता है। हम लंबी अवधि के लिहाज से पीएनबी का शेयर 110-110 रुपये के भाव पर खरीद सकते हैं। पुणे की डी एस कुलकर्णी डेवलपर्स का शेयर 15.75 रुपये के निचले स्तर को छू गया, जो 17 अप्रैल 2017 के 52 हफ्ते के उच्चस्तर 69.75 रुपये के मुकाबले 77 फीसदी नीचे है। इसके संस्थापक व चेयरमैन डी एस कुलकर्णी को हाल में गिरफ्तार किया गया था जब बंबई उच्च न्यायालय ने धोखाधड़ी मामले में इनकी अग्रिम जमानत तो आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस बीच, जेफरीज के विश्लेषकों ने पीएनबी में निवेश बनाए रखने की सलाह दी है और इसका कीमत लक्ष्य 110 रुपये रखा है।

आर्थिक आजादी का असली रहस्य और उसे पाने के तरीके

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। क्या आपने कभी सोचा है कि आर्थिक आजादी का असली रहस्य क्या है? मोटे वेतन वाली नौकरी या बिजनेस में उठाया गया प्रमुख कदम या फिर यह आपके कमाने और ग्रोथ के दौरान बचत एवं निवेश को लेकर अपनाया जाने वाला एक स्थाकयी दृष्टिकोण है या यह इन सभी का मिश्रण है? जैसा कि विशेषज्ञ रॉबर्ट कियोसाकी कहते हैं,-

‘‘आर्थिक आजादी उनके लिये है, जो उसे समझते हैं और उसके लिये काम करते हैं’’

धन को बढ़ाने का सुनिश्चित तरीका :

हालांकि, आय से कम खर्च करना अपने कुल धन को बढ़ाने का सुनिश्चित तरीका है, कई लोग आय और धन के बीच का अंतर नहीं समझते हैं। आय ही धन का प्राथमिक स्रोत होती है और आपकी निजी बैलेंस शीट में आय और देयताएं (लाएबिलिटीज) होंगी, तो आपका असली धन वह है, जो लाएबिलिटीज के भुगतान के बाद बचता है। इसे अपने पक्ष में करने के लिये आपको अधिक कमाने के अलावा भी कुछ करना होगा, इसके लिये आपको चतुराई से निवेश करना होगा। कुछ ऐसा करना होगा कि आपका पैसा ही आपके लिये पैसा कमाए। ऐसा करने के लिये नीचे कुछ टिप्‍स दिये गये हैं:

जल्दी शुरूआत करें:

बचत की संस्कृति को अपनाना महत्वपूर्ण है, जीवन की शुरूआती अवस्था में निवेश की ओर धीमी और स्थायी शुरूआत जल्दी आर्थिक आजादी पाने में आपकी मदद करेगी। वित्तीय योजना बनाना लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर पहला कदम है। सेवानिवृत्ति की योजना बनाने का ख्याल निश्चित रूप से दिमाग में होना चाहिये। आपकी कुल आय और आर्थिक आजादी के लिये आपके द्वारा निवेश की योग्यता पर आपके दृष्टिकोण के लिये यह लक्ष्य निर्धारित करना महत्वपूर्ण है। कंपाउंडिंग की ताकत के साथ, 40 के बाद की आयु में पहुंचने से पहले आपके निवेश अच्छी वृद्धि करेंगे और आपको आर्थिक स्वतंत्रता का सच्चा बोध होगा।

यहाँ दिये जा रहे कुछ सुझाव उच्च जोखिम को लेकर अधिक संवेदनशील हैं- इक्विटी जैसे उच्च प्रतिफल वाले मार्ग पर्याप्त बीमा कवर के साथ आपके जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा करते हैं और जीवन के शुरूआती वर्षों में योजनाबद्ध तरीके से अनिवार्य संपत्तियों का अधिग्रहण करते हैं। इक्विटी में निवेश होने वाले आपके पोर्टफोलियो के लिये प्रतिशत का सामान्य नियम 100-आयु है, अर्थात् 27 वर्षीय व्यक्ति के लिये कुल पोर्टफोलियो का 63 प्रतिशत भाग इक्विटी में होना चाहिये। निवेश गुरू वारेन बफेट सलाह देते हैं कि निवेशकों को ऐसे वित्तीय प्रपत्रों में पैसा नहीं डालना चाहिये, जो उनकी समझ से बाहर हों- अतः हर विकल्प से जुड़े जोखिम और लाभ समझने के लिये शिक्षित होना महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, आपको ऐसे फंड आवंटित करने चाहिये, जिनकी आवश्यकता न हो और ऐसे विकल्पों में, जो आपकी जोखिम लेने की शक्ति के अनुसार हों।

आवश्यकता होने पर ही खर्च करें, अधिक नहीं:

चाहतें सभी के जीवन में होती हैं, खासकर पैसों के सम्बंध में। आर्थिक अनुशासन आय के प्रबंधन की कुंजी है। इसका सरल तरीका है अपने परिवार के अपेक्षित खर्चों, बैंक विवरण, आदि, हर उस चीज़ को एकत्र करना, जो पैसा आने या जाने का वर्णन देती है। अपने पैसे के प्रबंधन के लिये पूरे परिवार के साथ बैठकर एक मितव्ययी बजट बनाएं। परिवार का बजट अधिकांश व्यक्तिगत खर्चों पर नियंत्रण का सर्वश्रेष्ठ तरीका है, जब भी आवश्यक हो और अन्यथा नहीं।

उधार को इकट्ठा न होने दें:

लोन हो या क्रेडिट कार्ड का कर्ज, आयु बढ़ने के साथ उधारी कम होनी चाहिये। क्रेडिट कार्ड के लोन बड़े उधार का रूप ले लेते हैं, क्योंकि उनकी ब्याजदर अधिक होती है। यदि आपके क्रेडिट कार्ड पर कोई कर्ज हो, तो तुरंत उसका भुगतान करें। सही समय पर बकाया चुकता नहीं होने पर आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा प्रभाव होगा और जरूरत होने पर लोन लेने की आपकी योग्यता भी बुरी तरह प्रभावित होगी। निवेश के बारे में सोचने से पहले छोटी अवधि के सभी कर्ज चुकता कर देने चाहिये।

अच्छा क्रेडिट स्कोर और रिपोर्ट बनाये रखें:

क्रेडिट स्कोर तीन अंकों का होता है (आमतौर पर 300 से 900 के बीच), जो बताता है कि भविष्य में आप ऋण लेने के कितने योग्य हैं। यह भविष्य में आपकी ऋण सम्बंधी आवश्यकताओं के लिये महत्वपूर्ण है। क्रेडिट रिपोर्ट एक दस्तावेज है, जो आपका ऋण और धन सम्बंधी संपूर्ण इतिहास दर्शाता है- चालू खाता, उधारी, पुनर्भुगतान समेत। आपकी क्रेडिट रिपोर्ट और क्रेडिट स्‍कोर आपकी आर्थिक स्थिति, स्थिरता और जवाबदेही का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। आपको एक्सपिरियन जैसे चार में से किसी भी एक क्रेडिट ब्यूरो से एक वर्ष में एक बार निशुल्क क्रेडिट रिपोर्ट मिल सकती है। यह सलाह दी जाती है कि आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट देखते रहें और कोई भी विसंगति होने पर अपने बैंक से संपर्क करें।

सुसंगत रहें:

एक निश्चित अवधि में अच्छी योजना वाले और संतुलित विकल्पों की श्रृंखला में फंड का सतत् आवंटन आपके निवेश के लिये अच्छा होता है। रूपये के मूल्य की औसत गणना की सहायता से छोटे फंड सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ते समय आपके काम आ सकते हैं। सिस्टेमैटिक इनवेन्टमेन्ट प्लांस (SIP) की सफलता उस सुसंगतता का आदर्श उदाहरण है, जो बीतते वर्षों के साथ बाजार की उथल-पुथल और आर्थिक चक्रों में आपकी मदद करती है।

अपने निवेश पर ध्यान दें:

कई निवेश बाजार की निवेश से जुड़े कुछ टिप्स स्थितियों और आर्थिक परिदृश्यों से प्रभावित होते हैं; इसलिये आपको उनकी प्रगति पर नजर रखनी चाहिये, यदि जरूरत हो, तो आपको अपने निवेश प्रबंधक से बेहतर प्रदर्शन वाली संपत्तियों या फंड्स के लिये कहना पड़ सकता है। यह आपकी आयु और प्राथमिकताओं के बदलने पर भी लागू होता है; हो सकता है कि आप इक्विटी कम करना या अधिक संतुलित फंड लेना चाहें। खराब प्रदर्शन वाली कुछ संपत्तियाँ बड़े ऋण चुकाने के काम आ सकती हैं। अतः आर्थिक आजादी के लिये अपनी बैलेंस शीट का आवधिक मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।

सभी फलों को एक टोकरी में रखना उचित नहीं है, कई संपत्तियों में से चुनकर निवेश करना चाहिये- जैसे रियल एस्टेट, सोना, ऋण प्रपत्र, स्टॉक और उभरते विकल्प- इससे आपका पोर्टफोलियो संतुलित रहेगा और सेवानिवृत्त होने के बाद आपको आराम से जीवन बिताने की आजादी मिलेगी या आप जीवन के अन्य लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में भी बढ़ सकते हैं।

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निवेश और बचत से जुड़े ये सुझाव आपने न माने तो पछताएंगे

निवेश और बचत से जुड़े ये सुझाव आपने न माने तो पछताएंगे

क्या आपने इस बात को महसूस किया है कि बचत और निवेश से जुड़े जो सबसे काम के सुझाव होते हैं, वे बेहद आसान होते हैं. उदाहरण के लिए: सबसे पहले निवेश करें, अपनी बचत को काम पर लगाएं, ऋण कम से कम लें और इमर्जेंसी फ़ंड ज़रूर बनाएं. यहां हम कुछ इसी तरह की निवेश और बचत से जुड़ी सलाह के बारे में बात कर रहे हैं, जिन्हें अनदेखा कर के कहीं बाद में आपको पछताना न पड़े.

यूं तो आपको कई जगह से, कई सारी फ़ायनांशियल सलाहें मिल सकती हैं, जिनके आधार पर आप बचत और निवेश की योजना बना सकते/सकती हैं, लेकिन इन भारी-भरकम से सुझावों के बीच अक्सर हम वे बुनियादी बातें भूल जाते हैं, जिन पर

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झीनी और झिलमिल साड़ियों के मोह से आप बच नहीं पाएंगी

हमें निवेश और बचत के लिए हमेशा भरोसा करना चाहिए. यहां हम आपको कुछ ऐसे सुझाव देने जा रहे हैं, जो बेसिक हैं और जिन पर आपको हमेशा डटे रहना चाहिए.

अपने भविष्य का ख़्याल पहले रखें
अमूमन तन्ख़्वाह मिलते ही हमें ख़र्च दिखाई देने लगते हैं और उसके बाद अपनी वो इच्छाएं, जिन्हें हम हमेशा से पूरा करना चाहते रहे हैं. ख़र्चे, जो ज़रूरी हैं, उन्हें तो किया ही जाना है, लेकिन इच्छाओं को आप धीरे-धीरे करके भी पूरा कर सकते/सकती हैं. लेकिन इन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है भविष्य के लिए निवेश करना. अत: अपनी सैलरी का एक हिस्सा निवेश के लिए पहले ही अलग कर दें. अपने वेतन को घंटे के आधार पर बांटें और कम से कम रोज़ाना के एक घंटे का वेतन यानी एक महीने में कुल 30 घंटों का वेतन निवेश करने के लिए अलग रख दें. इस तरह आप लंबे समय में अच्छी बचत कर सकेंगे.

इंश्योरेंस को दें वरीयता
जैसे ही आपकी नियमित आय आने लगे, आपको अपना हेल्थ और लाइफ़ इन्श्योरेंस ज़रूर करा लेना चाहिए. अपने वेतन में से एक हिस्सा इसके लिए अलग निकाल के रखें, ताकि आप इन्श्योरेंस का प्रीमियम भर सकें. दुर्घटना या बीमारी हमारे जीवन में अकस्मात ही आ जाते हैं, इनसे निपटने में आपका यह निवेश हमेशा ही आपके काम आएगा. अत: इंश्योरेंस कराने में कभी कोताही न करें.

इमरजेंसी फ़ंड हमेशा तैयार रखें
महीने में आपकी जितनी भी तन्ख़्वाह/आय है, उसमें से धीरे-धीरे कर के इस तरह पैसों की बचत करें कि कम से कम छह माह तक की तन्ख़्वाह/आय आपके पास बैंक अकाउंट में इस तरह रखी हो कि आप किसी भी इमरजेंसी के दौरान उसका इस्तेमाल कर सकें. एक बार यह राशि जमा हो जाए तो हर साल इसमें उतने पैसे और जोड़ दें, जितनी कि आपकी आय बढ़ गई हो. यह राशि किसी भी आपत स्थिति का सामना करने के लिए आपको तैयार रखेगी.

क्रेडिट कार्ड बैलेंस का भुगतान कभी पेंडिंग न रखें
यूं तो हम आपको ज़्यादा लोन लेने की सलाह कभी नहीं देंगे और ये भी कहेंगे कि हमेशा ज़्यादा ब्याज़ वाले लोन समय पर या फिर जल्दी चुकाने का प्रयास करें. साथ ही, अपने क्रेडिट कार्ड के बैलेंस का भुगतान कभी-भी पेंडिंग न रखें. यदि आपने होम लोन लिया है तो उसे भी प्री-पे करने के बारे में पूछताछ करें और संभव हो तो हर वर्ष प्री-पे करने की पैनल्टी-फ्री राशि का भुगतान करते रहें. जब आप पर ऋण कम होगा तो आप जीवन को चिंतामुक्त होकर जी सकेंगे/सकेंगी.

समय पर भरें टैक्स
अपना टैक्स हमेशा समय पर भरें और ज़रूरी हो तो इसके लिए किसी सलाहकार की मदद लें. यदि आप टैक्स ब्रैकेट में नहीं आते हैं, तब भी रिटर्न ज़रूर फ़ाइल करें. इससे आपको आगे कभी लोन लेने में मदद मिलेगी, आपका टीडीएस वापस मिलेगा और दिमाग़ शांत रहेगा.

शेयर मार्केट में निवेश करें, लेकिन
अपनी बचत को केवल बैंक या पोस्ट ऑफ़िस में ही निवेश न करें, बल्कि इसे बढ़ाना चाहते/चाहती हैं तो इसे शेयर मार्केट में भी लगाएं. आप अपनी बचत को दो भागों में बांट सकते/सकती हैं, जिसका एक हिस्सा सुरक्षित निवेश जैसे-बैंक, पोस्ट ऑफ़िस में निवेश करें और दूसरा हिस्सा शेयर मार्केट में. शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले यह बात जान लें कि इसमें उतार-चढ़ाव लगा रहता है अत: इसमें निवेश एक लंबे समय के लिए किया जाना चाहिए, तभी वह आपको बहुत अच्छा रिटर्न देता है. और आख़िरी बात ये कि यदि आपको मार्केट की समझ नहीं है तो मार्केट में निवेश के लिए एक्स्पर्ट्स की सलाह लेकर ही आगे बढ़ें, ताकि आपकी मेहनत की कमाई ज़ाया न होने पाए.

कोरोना काल में महिलाओं की दिलचस्पी शेयर बाज़ार में क्यों बढ़ने लगी?

सकीना गांधी

उनकी स्टॉक मार्केट में दिलचस्पी तब पैदा हुई जब कोरोना महामारी की शुरुआत में शेयर बाज़ार बुरी तरह गिर रहा था.

उन्हें ये बहुत फ़ायदेमंद विकल्प लगा और उन्होंने तुरंत अपना डीमैट खाता बना लिया. वे इसके ज़रिए अतिरिक्त कमाई करना चाहती थीं.

सकीना कहती हैं, ''ये मेरा पैसा है, इसमें मेरे पति या किसी और का कोई दख़ल नहीं है, इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना थोड़ा जोखिम उठाया जाये. फिर देखते हैं कि क्या होता है.''

सकीना बताती हैं कि वे रोज़ अख़बार देखती हैं और उन्होंने कंपनियों और शेयर बाज़ार से जुड़ी ख़बरों के लिए गूगल अलर्ट भी लगाया हुआ है.

पहली बार निवेश

देश और दुनिया की बड़ी ख़बरें और उनका विश्लेषण करता समसामयिक विषयों का कार्यक्रम.

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर

शेयर बाज़ार में पहली बार निवेश करने वालीं सकीना गांधी अकेली नहीं हैं.

कोरोना वायरस ने कई कारोबारों को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब उन्हें इस झटके से संभलने में वक़्त लगेगा.

लेकिन, स्टॉक मार्केट को इसे लेकर कोई शिकायत नहीं है. बल्कि इस साल की शुरुआत में शेयर की क़ीमतें गिरने से खुदरा निवेशकों में बड़े स्तर पर वृद्धि हुई है.

कई भारतीय जो अब तक शेयर बाज़ार से दूर थे, उन्होंने भी इसमें निवेश करना शुरू कर दिया है.

जैसे 36 साल की रितिका शाह जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान ही शेयर बाज़ार में क़दम रखा. रितिका शाह भी पब्लिक रिलेशन के क्षेत्र में काम करती हैं.

रितिका ने बीबीसी को बताया, ''मेरा परिवार शेयर बाज़ार में निवेश करता रहा है और मैं भी ये करना चाहती थी, लेकिन सही समय का इंतज़ार कर रही थी. महामारी में मुझे इतना वक़्त मिल गया कि मैं अपने फ़ाइनेंस को लेकर योजना बना सकूं. मुझे इसके बारे में रिसर्च करने और जानकारी हासिल करने का समय मिला.''

उन्होंने मार्च में निवेश करना शुरू किया था, जब उन्हें लगा कि बाज़ार में क़ीमत सही है.

रितिका कहती हैं, ''इससे आपको टैक्स बचाने में भी मदद मिलती है. मैं हर महीने 50 हज़ार रुपये निवेश करती हूँ और मैं इसे 10 हज़ार रुपये और बढ़ाने की योजना बना रही हूँ.''

रितिका शाह ने भी शेयर बाज़ार में पहली बार निवेश करना शुरू किया

खुदरा निवेशकों में बढ़ोतरी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़, पिछले साल के मुक़ाबले इस साल खुदरा निवेशकों में 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

सेबी के अध्यक्ष अजय त्यागी ने मीडिया को दिये एक बयान में कहा, ''अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान 63 लाख नए डीमैट खाते बने हैं, जबकि पिछले साल इस अवधि में 27.4 लाख खाते बने थे. इसका मतलब है कि डीमैट खातों में 130 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ.''

भारत की सबसे बड़ी ट्रेडिंग अकाउंट डिपॉज़िटरी, सेंट्रल डिपॉज़िटरी सर्विसेज़ लिमिटेड (सीडीएसएल) के मुताबिक़, साल 2020 के पहले नौ महीनों में निवेशकों ने 50 लाख नए डीमैट खाते खोले हैं. यह संख्या पिछले पाँच सालों में खोले गये डीमैट खातों के आधे के बराबर है.

जेरोधा जैसी ब्रोकिंग कंपनियों ने निवेशकों में बढ़े स्तर पर वृद्धि देखी है. इन निवेशकों ने डीमैट खातों के ज़रिए शेयर बाज़ार में निवेश करने के लिए कंपनी की वेबसाइट का इस्तेमाल करना शुरू किया है.

जेरोधा के सह-संस्थापक और सीआईओ निखिल कामथ कहते हैं, ''इस मार्च से हर महीने खुलने वाले औसत डीमैट खातों में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ये उछाल महामारी के कारण आया है.''

जेरोधा के पास 30 लाख सक्रिय निवेशक हैं और इनमें से 10 लाख निवेशक लॉकडाउन शुरू होने के बाद से (यानी मार्च से) जुड़े हैं.

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