शुरुआती लोगों की मुख्य गलतियाँ

इक्विटी निवेश

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इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश जुलाई में 43 प्रतिशत घटकर 8,898 करोड़ रुपये

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच इक्विटी म्यूचुअल फंड में जुलाई में 8,898 करोड़ रुपये का निवेश आया है। यह आंकड़ा इससे पिछले महीने की तुलना में 43 प्रतिशत की तेज गिरावट को दर्शाता है।

हालांकि, इन योजनाओं में सकारात्मक प्रवाह का यह लगातार 17वां महीना था।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में शुद्ध निवेश जून के मुकाबले कम रहा। जून में 15,495 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था। यह आंकड़ा मई में 18,529 करोड़ रुपये और अप्रैल में 15,890 करोड़ रुपये था।

मार्च, 2021 से इक्विटी योजनाओं में शुद्ध निवेश का प्रवाह देखा जा रहा है, जो निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना को दर्शाता है।

इससे पहले जुलाई, 2020 से फरवरी, 2021 तक इस तरह की योजनाओं में लगातार आठ महीनों के लिए निकासी देखने को मिली थी। इस दौरान इन योजनाओं से कुल 46,791 करोड़ रुपये निकाले गए थे।

जुलाई में सभी इक्विटी आधारित श्रेणियों को शुद्ध प्रवाह देखने को मिला, जिसमें सबसे अधिक लाभ स्मॉल कैप श्रेणी को मिला। इसमें 1,780 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। इसके बाद फ्लेक्सी कैप फंड में 1,381 करोड़ रुपये आए। लार्ज कैप फंड, लार्ज एंड मिड कैप फंड और मिड कैप में प्रत्येक में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश देखने को मिला ।

एम. दामोदरन उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी निवेश पर पैनल का नेतृत्व करेंगे

एम. दामोदरन उद्यम पूंजी और निजी इक्विटी निवेश पर पैनल का नेतृत्व करेंगे |_40.1

सरकार ने 13 सितंबर को इक्विटी निवेश वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार वीसी/पीई निवेश को बढ़ाने के तरीके सुझाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। छह सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता सेबी के पूर्व अध्यक्ष एम दामोदरन करेंगे। मंत्रालय ने कहा कि विशेषज्ञ समिति जांच करेगी और नियामक और अन्य मुद्दों के समाधान के लिए उचित उपाय सुझाएगी ताकि वेंचर कैपिटल और प्राइवेट इक्विटी इनवेस्टमेंट द्वारा निवेश बढ़ाया जा सके।

एक विशेषज्ञ समिति क्यों:

समिति, जिसका गठन मूल रूप से इस साल के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित किया गया था, को नियामक नीति और कराधान से ‘एंड-टू-एंड घर्षण’ और ‘संभावित त्वरक’ का व्यापक व्यवस्थित अध्ययन करने का कार्य सौंपा गया है। भारत में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ‘निवेश में आसानी’ की सुविधा के लिए। पैनल को अपने विचार-विमर्श और हितधारकों के साथ बातचीत के दौरान किसी भी अन्य क्षेत्रों के अलावा स्टार्ट-अप और सूर्योदय क्षेत्रों में निवेश को तेज करने के उपायों का सुझाव देने के लिए भी कहा गया है। इक्विटी निवेश वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने का भी आग्रह किया गया है ताकि सिफारिश की जा सके कि उन्हें ‘भविष्य के उपायों और भविष्य के लिए तैयार नियामक प्रथाओं’ के साथ कैसे अनुकरण किया जाए।

सिप में भरोसा बढ़ने से इक्विटी निवेश 10 साल में सबसे ज्यादा

Equity investment is at peak in 10 years due to SIP

सिस्टमेटिक इन्वेस्ट प्लान (सिप) में खुदरा निवेशकों का भरोसा बढ़ने से भारतीयों की कुल संपत्ति में इक्विटी निवेश का आंकड़ा एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक शोध फर्म सीएलएसए ने आरबीआई, एम्फी, इरडा और मॉस्पी के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला है। इसके अनुसार, वर्ष 2008 के बाद पहली बार कुल संपत्ति में इक्विटी निवेश का आंकड़ा 4.6 फीसदी तक पहुंचा है। इस बीच वर्ष 2014 में इसमें भारी गिरावट दिखी और यह 2.2 फीसदी के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद से लगातार इक्विटी निवेश बढ़ा जिसमें सबसे अहम भूमिका सिप के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश की रही।

इक्विटी में सीधे निवेश से मोहभंग

आंकड़े बताते हैं कि खुदरा निवेशकों का इक्विटी में सीधे पैसे लगाने से मोहभंग हो रहा है। वित्त वर्ष इक्विटी निवेश 2008 में जहां इक्विटी में सीधा निवेश पहली पसंद था, वहीं 2018 में निवेशकों ने इसके लिए म्यूचुअल फंड के सिप को चुनना बेहतर समझा। इससे मार्च, 2018 में बीएसई-500 इंडेक्स स्टॉक में सीधे खुदरा निवेश गिरकर 11.7 फीसदी पर आ गया जो चार इक्विटी निवेश साल पहले तक 13.1 फीसदी था। इसी तरह, म्यूचुअल फंड का इक्विटी एयूएम भी एक दशक में चार गुना बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जिसमें चार वर्षों के भीतर ही 3.5 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

सीएलएसए का कहना है कि खुदरा निवेशकों का भरोसा और रुझान बढ़ने से सिप में प्रतिमाह निवेश का आंकड़ा भी पिछले तीन वर्षों में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ गया है। मार्च, 2016 में जहां प्रतिमाह सिप में निवेश 3,122 करोड़ रुपये था, वहीं दिसंबर, 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा एक दशक पहले की अपेक्षा पिछले चार वर्षों में म्यूचुअल फंड में निवेश चार गुना बढ़ गया है।

जीडीपी से तीन गुना है कुल संपत्ति

मौजूदा समय में भारतीयों की कुल संपत्ति 595 लाख करोड़ रुपये है, जो जीडीपी की करीब तीन गुना है। इसमें इक्विटी का हिस्सा 27 लाख करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2018 में भारत की जीडीपी करीब 199.36 लाख करोड़ रुपये थी। सीएलएसए के अनुसार, भारतीयों की संपत्ति सालाना 9.3 फीसदी की दर से बढ़ रही है।

संपत्तियों में निवेश की हिस्सेदारी

प्रॉपर्टी 53.8 फीसद
बैंक जमा 15.9 फीसद
सोना 11.3 फीसद
बीमा 6.1 फीसद
पीएफ-पेंशन 5.1 फीसद
इक्विटी 4.6 फीसद
नकद 3.1 फीसद

सिस्टमेटिक इन्वेस्ट प्लान (सिप) में खुदरा निवेशकों का भरोसा बढ़ने से भारतीयों की कुल संपत्ति में इक्विटी निवेश का आंकड़ा एक दशक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक शोध फर्म सीएलएसए ने आरबीआई, एम्फी, इरडा और मॉस्पी के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला है। इसके अनुसार, वर्ष 2008 के बाद पहली बार कुल संपत्ति में इक्विटी निवेश का आंकड़ा 4.6 फीसदी तक पहुंचा है। इस बीच वर्ष 2014 में इसमें भारी गिरावट दिखी और यह 2.2 फीसदी के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, इसके बाद से लगातार इक्विटी निवेश बढ़ा जिसमें सबसे अहम भूमिका सिप के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश की रही।

इक्विटी में सीधे निवेश से मोहभंग

आंकड़े बताते हैं कि खुदरा निवेशकों का इक्विटी में सीधे पैसे लगाने से मोहभंग हो रहा है। वित्त वर्ष 2008 में जहां इक्विटी में सीधा निवेश पहली पसंद था, वहीं 2018 में निवेशकों ने इसके लिए म्यूचुअल फंड के सिप को चुनना बेहतर समझा। इससे मार्च, 2018 में बीएसई-500 इंडेक्स स्टॉक में सीधे खुदरा निवेश गिरकर 11.7 फीसदी पर आ गया जो चार साल पहले तक 13.1 फीसदी था। इसी तरह, म्यूचुअल फंड का इक्विटी एयूएम भी एक दशक में चार गुना बढ़कर 7.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया जिसमें चार वर्षों के भीतर ही 3.5 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

सिप में प्रतिमाह निवेश ढाई गुना बढ़ा

सीएलएसए का कहना है कि खुदरा निवेशकों का भरोसा और रुझान बढ़ने से सिप में प्रतिमाह निवेश का आंकड़ा भी पिछले तीन वर्षों में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ गया है। मार्च, 2016 में जहां प्रतिमाह सिप में निवेश 3,122 करोड़ रुपये था, वहीं दिसंबर, 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये हो गया। इसके अलावा एक दशक पहले की अपेक्षा पिछले चार वर्षों में म्यूचुअल फंड में निवेश चार गुना बढ़ गया है।

जीडीपी से तीन गुना है कुल संपत्ति

मौजूदा समय में भारतीयों की कुल संपत्ति 595 लाख करोड़ रुपये है, जो जीडीपी की करीब तीन गुना है। इसमें इक्विटी का हिस्सा 27 लाख करोड़ रुपये है। वित्त वर्ष 2018 में भारत की जीडीपी करीब 199.36 लाख करोड़ रुपये थी। सीएलएसए के अनुसार, भारतीयों की संपत्ति सालाना 9.3 फीसदी की दर से बढ़ रही है।

संपत्तियों में निवेश की हिस्सेदारी

प्रॉपर्टी 53.8 फीसद
बैंक जमा 15.9 फीसद
सोना 11.3 फीसद
बीमा 6.1 फीसद
पीएफ-पेंशन 5.1 फीसद
इक्विटी 4.6 फीसद
नकद 3.1 फीसद

भारती एयरटेल में निवेश करेगी गूगल, 70 करोड़ डॉलर का इक्विटी निवेश करेगी कंपनी

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। इंटरनेट के क्षेत्र की प्रमुख कंपनी गूगल (Google) दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल (Bharti Airtel) में एक अरब डॉलर का निवेश करेगी. इसमें इक्विटी निवेश के साथ-साथ संभावित वाणिज्यिक समझौतों के लिए एक कोष शामिल है, जिसके तहत समझौतों को अगले पांच वर्षों के दौरान पारस्परिक रूप से सहमत शर्तों पर मंजूरी दी जाएगी.

गूगल यह निवेश गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन इक्विटी निवेश फंड के हिस्से के तौर पर कर रही है. एयरटेल ने एक बयान में कहा कि 'इसमें, 70 करोड़ डॉलर का इक्विटी निवेश भारती एयरटेल में 734 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर किया जाएगा.' इसमें बताया गया कि कुल निवेश में से 30 करोड़ डॉलर की राशि वाणिज्यिक समझौतों के क्रियान्वयन के लिए होगी.

आज इसी खबर के मद्देनजर भारती एयरटेल के शेयरों में शानदार उछाल दर्ज किया गया और ये 2 फीसदी से ज्यादा ऊपर चढ़ा. गूगल यह निवेश गूगल फॉर इंडिया डिजिटाइजेशन फंड के हिस्से के तौर पर कर रही है.

भारती एयरटेल के द्वारा गूगल को कंपनी के 7.12 करोड़ शेयरों को 734 रुपये के भाव पर प्रिफरेंशियल बेसिस पर जारी किए जाएंगे जो 27 जनवरी को बंद भाव से 4 फीसदी का प्रीमियम रेट बना है. एयरटेल ने बीएसई को जो जानकारी दी है उसके मुताबिक इक्विटी शेयरों के प्रिफरेंशियल एलॉटमेंट से Google के पास देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर में 1.28 प्रतिशत हिस्सेदारी हो जायेगी.

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