शुरुआती लोगों की मुख्य गलतियाँ

विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए

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भारत से विदेश केवल इतनी रकम ले जाने की होती है इजाजत, ज्यादा कैश ले जाने से लौटा दिया जाता है घर

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कैसे नीरव मोदी ने नॉस्ट्रो अकाउंट में लूट लिया बैंक का पैसा

नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक का पैसा उसके नॉस्ट्रो अकाउंट में पहुंचाया और फिर बेहद सुरक्षित मानें जाने वाले नॉस्ट्रो अकाउंट को लूट लिया. नॉस्ट्रो अकाउंट किसी भारतीय बैंक का विदेशी मुद्रा वाला वह अकाउंट विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए है जिसे किसी अन्य बैंक की विदेश में स्थित शाखा में खुलावाया जाता है.

यूं रची गई पीएनबी को लूटने की साजिश

राहुल मिश्र

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2018,
  • (अपडेटेड 27 फरवरी 2018, 11:08 AM IST)

नीरव मोदी ने पंजाब नेशनल बैंक का पैसा उसके नॉस्ट्रो अकाउंट में पहुंचाया और फिर बेहद सुरक्षित मानें जाने वाले नॉस्ट्रो अकाउंट को लूट लिया. नॉस्ट्रो अकाउंट किसी भारतीय बैंक का विदेशी मुद्रा वाला वह अकाउंट है जिसे किसी अन्य बैंक की विदेश में स्थित शाखा में खुलावाया जाता है.

आमतौर पर विदेश में बैंकों के बीच विदेशी मुद्रा में लेनेदेन का काम इस अकाउंट के जरिए किया जाता है. लिहाजा एक बात साफ है कि यह बैंक का एक खास अकाउंट है क्योंकि इसके जरिए वह विदेशी मुद्रा में ट्रांजैक्शन करता है. वहीं बैंकिंग नियम के मुताबिक बैंक के इस अकाउंट की नियमित सूचना केन्द्रीय रिजर्व बैंक को देने का प्रावधान है जिससे यह अकाउंट कभी किसी बड़ा धांधली का शिकार न हो. वहीं इस अकाउंट को ऑनलाइन संचालित करने के लिए खास पासवर्ड का इस्तेमाल होता है जिसकी जानकारी बैंक में शीर्ष और सीमित लोगों तक रहती है.

इसके बावजूद नीरव मोदी और उसकी टीम ने पीएनबी के इस अकाउंट को लूटने में सफलता पाई है.

यूं बना बैंक लूटने का प्लान और खाली हो गया PNB का नॉस्ट्रो अकाउंट

1-नीरव मोदी, उनकी पत्नी एमी नीरव मोदी, भाई नीशल मोदी और मामा गीतांजलि जेम्स के मेहुल चौकसी की मिल्कियत वाली कंपनियां-डायमंड और विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए यूएस, सोलर एक्सपोट्रर्स और स्टेलर डायमंड्स –पीएनबी के अफसरों के पास गईं और उनके लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एलओयू) जारी करने के लिए कहा, इस साख पत्रों के जरिए वे सार्वजनिक क्षेत्र के दूसरे बैंकों की विदेशी शाखाओं से आयात के लिए पूंजी उगाह सकती थीं.

क्या हुई चूकः पीएनबी के अफसरों-गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज हनुमंत खरात ने अनिवार्य तौर पर ली जाने वाली जमानतों/बैंक गारंटियों के बगैर एलओयू जारी कर दिए.

2-पीएनबी 30 हिंदुस्तानी बैंकों की विदेशी शाखाओं को स्विफ्ट प्रणाली के जरिए संदेश भेजता है और उसके ग्राहक को जरूरत के मुताबिक कर्ज देने के लिए कहता है, स्विफ्ट संदेशों का काम संभालने के ले तीन शख्स मुकर्रर थे जिन्हें इस प्रणाली तक पासवर्ड से सुरक्षित पहुंच हासिल थी.

क्या हुई चूकः एक आरोपी अफस को तीन पासवर्ड मालूम थे. संदेश भी दो ही लोगों ने भेजे मालूम देते हैं.

3-स्विफ्ट के जरिए इत्तला मिलने पर ये बैंक रकम पीएनबी के नोस्ट्रो खाते में जमा कर देते हैं. यही वह खाता है जिसमें इन बैंकों को हांगकांग स्थित शाखाएं पीएनबी की जरूरत के मुताबिक रकम भेजती हैं.

क्या हुई चूकः साफ नहीं है कि प्राप्त करने वाले बैंक ने वापस पीएनबी की शाखा और क्षेत्रीय दफ्तर को तस्दीक के नोट भेजे या नहीं. कोई खरते की घंटी नहीं बजाई गई.

4-पीएनबी यह रकम मोदी और उनकी कंपनियों को अधा कर देती, पर वे इसका इस्तेमाल महज पिछला कर्ज चुकाने के लिए करते. मोदी की कंपनियों की गुजारिश पर पहले वाले एलओयू को बढ़ाते हुए एक नया एलओयू तैयार किया जाता है और इस बार इसमें चुकाए जाने वाले ब्याज को भई शामिल कर लिया जाता है.

क्या हुई चूकः स्विफ्ट के लेनदेन का पीएनबी की कोर बैंकिंग प्रणाली के साथ मिलान नहीं किया गया. कुल मिलाकर 11,000 करोड़ रु. से भी ज्यादा इन नोस्ट्रो लेनदेनों में से एक पर भी खतरे की झंडी नहीं लगाई गई.

5-कर्जों की एवरग्रीनिंग (यानी नए कर्ज लेकर ब्याज चुकाया जाता रहा और मूल जस का तस बना बढ़ता रहा). का यह खेल सालों-साल चलता रहता है, आखिरकार रकम बढ़ते-बढ़ते बहुत ही ज्यादा हो जाती है, जैसा कि मौजूदा मामले में हुआ. 15 फरवरी को दर्ज सीबीआई की एफआइआर कहती है कि अकेले 2017-18 में मोदी और उनकी कंपनियों ने पीएनबी से 143 एलओयू जारी करवा करके 4,886.72 करोड़ रु. लूट लिए.

क्या हुई चूकः बैंक की शाखाओं में तैनात ऑडिटरों से लेनदेन की तस्दीक करने की उम्मीद की जाती है. शाखा प्रबंधक विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए स्विफ्ट लेनदेन वाले रजिस्टर की समीक्षा करते हैं, बैंकों से जारी किए गए एलओयू हरेक तिमाही में आरबीआइ को भेजे जाते हैं. इन तमाम प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया.

नई ऊंचाई पर विदेशी मुद्रा भंडार, एक हफ्ते में 6.47 अरब डॉलर का इजाफा

देश का विदेशी मुद्रा भंडार तीन जुलाई को समाप्त सप्ताह के दौरान 6.47 अरब डॉलर की बड़ी वृद्धि के साथ 513.25 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया.

विदेशी मुद्रा भंडार 513.25 अरब डॉलर के स्तर पर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2020,
  • (अपडेटेड 11 जुलाई 2020, 12:06 PM IST)
  • विदेशी मुद्रा भंडार 513.25 अरब डॉलर के स्तर पर
  • गोल्ड रिजर्व भंडार में 49.5 करोड़ डॉलर का इजाफा

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा भंडार 6.47 अरब डॉलर की बड़ी वृद्धि के साथ 513.25 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है.

रिजर्व बैंक के अनुसार, इस दौरान गोल्ड रिजर्व भंडार 49.5 करोड़ डॉलर बढ़कर 34.02 अरब डॉलर हो गया. ये आंकड़े तीन जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह के हैं. इससे पूर्व 26 जून को समाप्त हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.27 अरब डॉलर बढ़कर 506.84 अरब डॉलर पर पहुंचा था.

5 जून को पहली बार 500 अरब डॉलर के पार

आपको यहां बता दें कि पांच जून को समाप्त सप्ताह में पहली बार देश का विदेशी मुद्रा भंडार 500 अरब डॉलर के स्तर से ऊपर गया था. उस समय यह 8.22 अरब डॉलर की जोरदार वृद्धि के साथ 501.70 अरब डॉलर पहुंचा था.

वित्त वर्ष 2019-20 में ये रहा हाल

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक देश के विदेशी मुद्रा भंडार में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान 64.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जबकि इसमें वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 11.7 अरब डॉलर की कमी हुई थी. आपको बता दें कि वर्तमान में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के कई बड़े देशों से ज्यादा विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए हो गया है.

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने का मतलब

विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी किसी भी देश की इकोनॉमी के लिए अच्छी बात है. इसमें करंसी के तौर पर अधिकतर डॉलर होता है. डॉलर के जरिए ही दुनियाभर में कारोबार किया जाता है. फिलहाल, डॉलर के मुकाबले भारतीय करंसी 75 रुपये से ज्यादा है. मतलब ये कि एक डॉलर की कीमत 75 रुपये से ज्यादा है.

भारत से विदेश केवल इतनी रकम ले जाने की होती है इजाजत, ज्यादा कैश ले जाने से लौटा दिया जाता है घर

अगर आप भारतीय हैं और विदेश यात्रा के बारे में सोच रहे हैं, तो यहां यात्री को एक सीमा के अंदर कैश ले जाने की अनुमति है। वरना सीमा से ज्यादा कैश ले जाने पर आपको घर वापस लौटा दिया जाता है। इसलिए यात्रा से पहले ऐसे नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।

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भारत से विदेश केवल इतनी रकम ले जाने की होती है इजाजत, ज्यादा कैश ले जाने से लौटा दिया जाता है घर

कितनी विदेशी मुद्रा साथ ले जा सकते हैं-

नेपाल और भूटान जैसे कुछ देशों को छोड़कर लगभग सभी देशों की यात्रा पर जा रहे यात्रियों को हर यात्रा पर विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए 3000 डॉलर तक की विदेशी मुद्रा साथ ले जाने की इजाजत है। अगर आप इससे ज्यादा राशि साथ ले जाना चाहते हैं, तो उस राशि को स्टोर वैल्यू कार्ड, ट्रेवल चैक और बैंकर्स ड्राफ्ट के रूप में ले जा सकते हैं।

विदेश यात्रा से लौटते वक्त भारतीय यात्री कितनी विदेशी मुद्रा साथ ला सकते हैं-

नेपाल और भूटान को छोड़कर यदि कोई भारतीय यात्री किसी देश में अस्थाई दौरे पर गया है, तो वह भारत लौटते वक्त भारतीय नोट वापस ला सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि यह राशि 25 हजार से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। बात अगर नेपाल और भूटान की करें , तो कोई भी व्यक्ति वहां से लौटते वक्त 100 रूपए से ज्यादा मूल्य वर्ग के भारत सरकार के करेंसी नोट व भारतीय रिजर्व बैंक के नोट नहीं ले जा सकता।

विदेशी व्यक्ति भारतीय यात्रा के लिए भारत में कितनी विदेशी मुद्रा साथ ला सकता है-

विदेश से भारत की यात्रा करने आने वाला व्यक्ति बिना किसी लिमिट के अपने साथ विदेशी मुद्रा ला सकता है। लेकिन अगर करेंसी नोट, बैंक नोट और ट्रेवलर चैक के रूप में साथ ले आए विदेशी मुद्रा का मूल्य 10,000 डॉलर है, तो एयरपोर्ट पर कुछ कार्यवाही की जा सकती है। उन्हें भारत आने पर करेंसी डिक्लेरेशन फॉर्म CDF में एयरपोर्ट पर कस्टम ऑफिसर्स के सामने घोषणा करने की जरूरत होगी।

क्या विदेश यात्रा के लिए खरीदी जाने वाली विदेशी मुद्रा का रूपए में भुगतान कर सकते हैं-

विदेश यात्रा करने के लिए 50,000 रूपए से कम राशि का रूपए में नगद भुगतान कर खरीद सकते हैँ। लेकिन अगर फॉरेन करेंसी की रकम 50, 000 रूपए से ज्यादा है, तो पूरा भुगतान क्रॉस्ड चैक, , बैंकर्स चैक, पे ऑर्डर, क्रेडिट कार्ड , डेबिड कार्ड या प्री पैड कार्ड के जरिए कर सकते हैं।

क्या भारत लौटने वाले यात्री के लिए विदेशी मुद्रा लौटाने की कोई लिमिट तय है-

जी हां, विदेश यात्रा से लौटने पर यात्रियों को करेंसी नोट और चैकों को लौटाने का नियम है। आमतौर से वापस आने की तारीख से 180 दिन के अंदर विदेशी मुद्रा लौटा देनी चाहिए। हालांकि, कभी आगे उपयोग करने के लिए यात्री विदेशी मुद्रा को चैक के रूप में 2000 अमेरिकी डॉलर रख सकते हैं।

विदेश यात्रा से कितने दिन पहले विदेशी मुद्रा ले लेनी चाहिए-

यात्रा से केवल 60 दिन यानी लगभग 2 महीने पहले आपको अपनी रकम को विदेशी मुद्रा में बदलवा लेना चाहिए। ये काम आप मनी एक्सेंजर, बैंक या फिर एयरापोर्ट से करा सकते हैं। विशेषज्ञ कहते हैँ कि इस काम को यदि आप मनी एक्सचेंजर या बैंक से कराएं तो अच्छा है, क्योंकि बाद में एयरपोर्ट से कराने पर यह बाजार से 3-4 फीसदी महंगा ही पड़ता है।

क्या विदेश में क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग कर सकते हैं-

अगर आप खुलकर पैसा खर्च करने वालों में से हैं, तो आपको इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड यूज करना चाहिए। इससे पेमेंट करने पर आपको कनवर्जन चार्ज के साथ 90-150 रूपए हर बार ट्रांजैक्शन फीस के रूप में देने पड़ेंगे। जबकि नगद पेमेंट करना काफी सस्ता पड़ता है।

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डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त, निचले स्तर का एक और रिकॉर्ड बनाया, 2014 में इतने का था एक डॉलर

Dollar Vs Rupee: अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 6 पैसे की गिरावट के साथ एक और निचले स्तर को छुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 83.06 पर खुला। बता दें 30 मई विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए 2014 को एक डॉलर का मूल्य 59.28 रुपये था।

डॉलर के मुकाबले रुपया पस्त, निचले स्तर का एक और रिकॉर्ड बनाया, 2014 में इतने का था एक डॉलर

विदेशी बाजारों में डॉलर के मजबूत होने और विदेशी पूंजी की सतत निकासी के बीच अंतरबैंक विदेशीमुद्रा विनिमय बाजार में गुरुवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 6 पैसे की गिरावट के साथ एक और निचले स्तर को छुआ। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 83.06 पर खुला। बता दें 30 मई 2014 को एक डॉलर का मूल्य 59.28 रुपये था।

बता दें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल कीमतों में तेजी तथा निवेशकों में जोखिम लेने की धारणा कमजोर होने से भी रुपये पर असर पड़ा। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (शोध विश्लेषक) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि डॉलर की बढ़ती कीमतों के बीच घबराहट में रुपये की बिकवाली के चलते रुपया नए निचले स्तर पर आ गया है।


क्यों हो रही गिरावट

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा है कि डॉलर के बाहर जाने, चीन की मुद्रा में कमजोरी और मासिक अनुबंधों की समाप्ति से पहले कारोबारियों द्वारा अपने सौदे पूरा करने से रुपये विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए का प्रदर्शन कमजोर रहा। अन्य एशियाई मुद्राओं में भी कमजारी रही। यूरोप और ब्रिटेन के निराशाजनक आर्थिक आंकड़ों ने डॉलर सूचकांक को मजबूती दी, विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए जिससे रुपये पर भी असर पड़ा।


भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार: फिच

रेटिंग एजेंसी फिच ने बुधवार को कहा कि अमेरिका में मौद्रिक नीति मामले में सख्ती बरतने और वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति बढ़ने से जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। इसके साथ ही फिच रेटिंग्स ने कहा कि बाह्य दबावों से भारत की साख को लेकर जोखिम सीमित ही है।


फिच ने कहा, ऐसा लगता है कि अमेरिका में तेजी से मौद्रिक सख्ती किए जाने और वैश्विक स्तर पर जिंसों के बढ़ते दामों से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है। एजेंसी ने कहा कि उसे विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बने रहने की उम्मीद है और भारत का चालू खाते के घाटे (सीएडी) को एक उपयुक्त स्तर पर थामा जा सकेगा और चालू वित्त वर्ष में यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.4 फीसदी तक पहुंच जाएगा जो कि पिछले वित्त वर्ष में 1.2 फीसदी था।

डॉलर के मुकाबले रुपये को संभालने के लिए आरबीआई कर रहा उपाय

फिच ने कहा कि सार्वजनिक वित्त की स्थिति रेटिंग के लिए प्रमुख घटक बना हुआ है और भारत बाह्य वित्तपोषण पर सीमित निर्भरता की वजह से वैश्विक उतार-चढ़ाव से सापेक्षिक तौर पर बचा हुआ है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस साल के नौ महीनों में करीब 100 अरब डॉलर तक घट चुका है। हालांकि अब भी इसका आकार करीब 533 अरब डॉलर है। विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बड़ी गिरावट बढ़ते सीएडी और डॉलर के मुकाबले रुपये को संभालने के लिए रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप को दर्शाती है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार अब भी 8.9 महीनों के आयात व्यय के लिए पर्याप्त है और किसी भी बाहरी संकट का का सामना करने की क्षमता देता है। फिच ने कहा, इस बड़े विदेशी मुद्रा भंडार से कर्ज पुनर्गठन क्षमता को आश्वासन मिलता है। इसके अलावा अल्पकालिक बाह्य बकाया ऋण भी कुल भंडार का सिर्फ 24 फीसदी ही है।

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