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बाजार संकेतक

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Power Breakfast: क्या है बाजार में आज का एक्शन?; Oct 05, 2021

ज़ी बिज़नेस का यह सेगमेंट आपको एक आउटलुक देता है कि ग्लोबल मार्केट में आज कैसा प्रदर्शन होने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रमुख ट्रिगर्स को जानिए जो आज बाजार के लिए मायने रखते हैं और ऐसे शेयर जिनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है.

दुनिया में इस वजह से है टॉप पर Nifty, Zerodha के फाउंडर ने समझाया पूरा गणित

Indian Stock Market: दुनिया के बड़े-बड़े बाजारों जैसे एसएंडपी 500 और निक्की की तुलना में भारतीय शेयर बाजार ज्यादा एक्सपेंसिव है. शेयर ब्रोकिंग सर्विस मुहैया कराने वाली कंपनी जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ ने दो इंडिकेटर्स के जरिए इसका पूरा गणित समझाया है.

दुनिया के सबसे महंगे बाजारों में भारतीय स्टॉक मार्केट

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 जून 2022,
  • (अपडेटेड 25 जून 2022, 7:17 PM IST)
  • Nifty-50 का इंडेक्स पीई रेशियो 19.9
  • शेयर मार्केट का बफेट इंडिकेटर 94%

भले ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty 50) इंडेक्स अपने अभी अपने रिकॉर्ड हाई से 16 फीसदी नीचे आ गया है, लेकिन इसके बाद भी भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) दुनिया के अन्य स्टॉक मार्केटों की तुलना में सबसे ज्यादा एक्सपेंसिव है. यह हम नहीं कह रहे, बल्कि जेरोधा (Zerodha) और ट्रू-बीकन (True Beacon) के को-फाउंडर निखिल कामथ (Nikhil Kamath) ने इसका पूरा गणित समझाया है. कामथ के मुताबिक अमेरिका और जापान के बाजार भी भारत से सस्ते हैं.

इंडेक्स पीई अनुपात आधिक

निखिल कामथ का दो इंडिकेटर्स के आधार पर कहना है कि भारतीय शेयर बाजार दुनिया के अन्य देशों के बाजारों से एक्सपेंसिव है. पहला उन्होंने बताया कि निफ्टी-50 का इंडेक्स पीई रेशियो (Index PE Ratio), एसएंडपी 500 (S&P) और निक्की 225 (Nikkei) से भी ज्यादा है, जो कि इसे सबसे महंगा बाजार बनाता है. रिपोर्ट के मुताबिक हाई पीई इंडेक्स रेशियो ज्यादा होने का मतलब होता है कि बाजार की जो टोटल वैल्यू है उसके अनुपात में उतना रिटर्न नहीं है. ऐसे में निफ्टी दुनिया के सबसे महंगे शेयर बाजारों में से एक है.

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पीई रेशियो (प्राइस अर्निंग रेशियो) की गणना इंडेक्स मार्केट कैप (Market Cap) को ग्रॉस इनकम से डिवाइड करके निकाली जाती है. आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब निफ्टी पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू और उनसे हासिल होने वाले रिटर्न का अनुपात है. निफ्टी का इंडेक्स पीई अनुपात अभी 19.9 है, जबकि एसएंडपी और निक्की का क्रमशः 18.95 और बाजार संकेतक 18.79 है. इसके अलावा ब्रिटेन, जापान, शंघाई, ब्राजील और जर्मनी जैसे अन्य बाजारों के प्रमुख इंडेक्स भारत की तुलना में और भी ज्यादा सस्ते हैं.

शेयर बाजार

बफे इंडिकेटर के हिसाब से यहां

दूसरा संकेतक बफे इंडिकेटर (Buffett Indicator) है. इसका जिक्र करते हुए कामथ ने कहा कि इसके आधार पर भी भारतीय शेयर बाजार सबसे महंगे बाजारों में से एक है. इस इंडिकेटर को दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे ने शुरू किया था, इस इंडिकेटर में देश की जीडीपी से इंडेक्स मार्केट कैप को डिवाइड करके गणना की जाती है. पीई रेशियो की तरह ही हाई बफे इंडिकेटर भी महंगे बाजार की ओर संकेत करता है.

शेयर बाजार

कामथ के शेयर किए आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेरिका का बफे इंडिकेटर 138.9 फीसदी, जबकि जापान का 113 फीसदी है. इसके बाद 94 फीसदी के साथ भारत को नंबर आता है, जो कि ब्रिटेन (89 फीसदी), ब्राजील (53 फीसदी), चीन (58.7 फीसदी) और जर्मनी (47.4 फीसदी) से बाजार संकेतक कहीं ज्यादा है. गौरतलब है कि जेरोधा भारत में म्युचुअल फंड और बॉन्ड समेत अन्य वित्तीय सेवाएं देती है.

रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा, विदेशी संकेतों से तय होगी अगले हफ्ते शेयर बाजारों की दिशा

आठ अक्टूबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा का ऐलान होगा वहीं टीसीएस के दूसरी तिमाही के नतीजे भी आएंगे। सप्ताह के दौरान सेवा पीएमआई के आंकड़े भी आने हैं।

Edited by: India TV Paisa Desk
Updated on: October 03, 2021 14:13 IST

रिजर्व बैंक की. - India TV Hindi News

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रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा पर बाजार की नजर

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के ब्याज दर पर निर्णय, वृहद आर्थिक आंकड़ों तथा विदेशी बाजारों के संकेतों से इस सप्ताह शेयर बाजारों की दिशा तय होगी। बाजार के जानकारों ने यह राय जताते हुए कहा कि जोरदार तेजी के बाद अब बाजार में ‘करेक्शन’ के संकेत दिख रहे हैं। इसके अलावा निवेशकों की निगाह रुपये के उतार-चढ़ाव तथा अमेरिका में बांड यील्ड पर भी रहेगी। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, ‘‘आगे की दिशा के लिए बाजार की निगाह विदेशों से मिलने वाले आंकड़ों पर रहेगी। घरेलू मोर्चे पर बहुत अधिक नकारात्मक संकेतक नहीं हैं, लेकिन आगामी मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक के गवर्नर की मुद्रास्फीति पर आठ अक्टूबर की टिप्पणी काफी महत्वपूर्ण रहेगी।’’ मीणा ने कहा कि आठ अक्टूबर को टीसीएस के दूसरी तिमाही के नतीजे भी आने हैं। उन्होंने कहा कि डॉलर इंडेक्स का बाजार संकेतक उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बांड पर प्रतिफल की वैश्विक बाजारों की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। वहीं कच्चे बाजार संकेतक तेल की कीमतों का भारतीय बाजारों पर व्यापक प्रभाव रहेगा।

जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि इस सप्ताह रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा आनी है। सप्ताह के दौरान सेवा पीएमआई के आंकड़े भी आने हैं। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स बीते सप्ताह 1,282.89 अंक या 2.13 प्रतिशत नीचे आया। शुक्रवार को बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट आई। इसके अलावा बाजार का रुख रुपये के उतार-चढ़ाव, ब्रेंट कच्चे तेल के दाम तथा एफपीआई के निवेश से भी तय होगा। जूलियस बेयर इंडिया के प्रबंध निदेशक वरिष्ठ सलाहकार उन्मेश कुलकर्णी ने कहा कि अमेरिकी बाजारों में सितंबर का करेक्शन कुछ जोखिमों को दर्शाता है। मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी, तेल और कमोडिटी कीमतों में वृद्धि तथा ब्याज दरें बढ़ने से बीच-बीच में निवेशकों के सेंटीमेंट्स प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व द्वारा अपने नरम रुख को वापस लेने की संभावना और चीन के हालिया घटनाक्रमों से भी निवेशक प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शेयर बाजारों में किसी अर्थपूर्ण करेक्शन से यह दीर्घावधि के निवेशकों को बाजार में प्रवेश का अवसर भी प्रदान करेगा।

सोनोली और बिरूल मार्ग के पास संकेतक नहीं होने से हो रहे हादसे

फ्लैग- डेंजर जोन पर हो चुकी है कई मौत, सर्विस मार्ग बदहाल, हाईमास्ट भी रहते हैं बंद फोरलेन बायपास पर फोटो----11 बीटीएल 7 मुलताई। संकेतक नहीं होने से हो रहे हादसे। नवदुनिया मुलताई। नवदुनिया फोरलेन बायपास मार्ग पर संकेतक सहित विभिन्ना लापरवाहियों के चलते लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं लेकिन संबंधित विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। बायपा

सोनोली और बिरूल मार्ग के पास संकेतक नहीं होने से हो रहे हादसे

फ्लैग- डेंजर जोन पर हो चुकी है कई मौत, सर्विस मार्ग बदहाल, हाईमास्ट भी रहते हैं बंद

मुलताई। संकेतक नहीं होने से हो रहे हादसे। नवदुनिया

फोरलेन बायपास मार्ग पर संकेतक सहित विभिन्ना लापरवाहियों के चलते लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं लेकिन संबंधित विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। बायपास मार्ग पर बिरूल बाजार एवं सोनोली चौराहे पर किसी भी प्रकार का संकेतक नहीं होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। मई महीने में सोनोली मार्ग पर तेजी से आ रहे ट्रक ने सोनोली की ओर से आ रही कार को टक्कर मार दी थी। इसमें नागपुर के पांच लोग घायल हो गए थे। इधर बिरूल बाजार मार्ग पर भी कोई संकेतक नहीं होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं कई मौतें होने से यह स्थल डेंजर जोन बन चुका है। सोनोली मार्ग पर खाटू श्याम मंदिर का निर्माण होने से आवागमन बढ़ गया है तथा बड़ी संख्या में लोग बाहर से भी मुलताई आ रहे हैं जहां फोरलेन क्रास करके उन्हे मंदिर की ओर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में फोरलेन पर संकेतक बोर्ड लगाना आवश्यक है। वहीं बिरूल बाजार मार्ग पर पहले से ही आवागमन होने तथा लगातार दुर्घटनाओं के बावजूद संकेतक लगाना उचित नहीं समझा जा रहा है जिसे लेकर नागरिकों में रोष व्याप्त है। फोरलेन बायपास पर बिरूल तथा सोनोली के पास संकेतक नहीं होने से फोरलेन पर बड़े वाहन फर्राटे से निकलते हैं इसी दौरान उक्त मार्ग से आने वाले वाहन बड़े वाहनों की चपेट में आ जाते हैं। फोरलेन बायपास बनने के बाद उक्त दोनों मार्ग पर दुर्घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिससे कई मौतें हो चुकी है जिसे लेकर कई बार शिकवा-शिकायत होने के बावजूद भी मेंटेनेंस करने वाली कंपनी द्वारा सुरक्षा के कोई कदम नही उठाए गए हैं।

आवागमन का बढ़ा दबाव, संकेतक जरूरी

सोनोली मार्ग पर खाटू श्याम मंदिर निर्माण होने के बाद आवागमन बढ़ गया है। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद से रोजाना सैकड़ों की संख्या में लोग मंदिर की ओर आवागमन करते हैं। इसलिए फोरलेन पर संकेतक लगाना आवश्यक हो गया है। हालांकि पूर्व से ही ग्रामीणों का आवागमन उक्त मार्ग पर चालू है लेकिन मंदिर निर्माण के बाद वाहनों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है इसलिए संकेतक लगाना आवश्यक हो गया है।

हाईमास्ट सहित सर्विस रोड बदहाल

बायपास मार्ग पर जहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। वहीं मेंटेनेंस के अभाव में रात में अधिकांश हाईमास्ट बंद रहते हैं। इससे मार्ग पर अंधेरा रहता है। विशेष रूप से फोरलेन से नगर की ओर जाने वाले मार्गों की ओर प्रकाश होना आवश्यक है लेकिन फोरलेन सहित उक्त मार्गों पर हाईमास्ट होने के बावजूद लाईट बंद रखे जाते हैं तथा कहीं-कहीं तो कुछ लाईट जलाए जाते हैं तथा बीच में कुछ लाईट बंद रहते है। ऐसी स्थिति में जहां दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। वहीं दुर्घटनाएं होने पर भी अंधेरे के कारण भारी परेशानी होती है। बताया जा रहा है कि संबन्धित कंपनी द्वारा मार्ग के रख रखाव में लापरवाही करने से अधिकांश सर्विस रोड भी रख-रखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

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पुराने संकेतक बोर्ड टूट कर गिर गए

मेंटेनेंस के नाम पर हाईवे पर संकेतकों की स्थिति बहुत खराब है, पुराने संकेतक टूृट कर गिर गए हैं। विभाग द्वारा इन्हें बदला नहीं जा रहा है और नए संकेतक भी नहीं लगाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या रात में हो रही है। संकेतक नहीं होने से कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं और कई बार लोग अपनी जान गवां चुके हैं लेकिन इसके बाद भी इस ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है। ऐसे में लोगों ने हाईवे पर टूटे हुए संकेतकों को बदलने की मांग की है।

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