शुरुआती लोगों की मुख्य गलतियाँ

IPO क्या होता है

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IPO

IPO क्या है | आईपीओ कैसे खरीदें | A to Z जानकारी

नमस्कार प्रिय पाठक स्वागत है आपका आज के इस लेख में, क्या आपको नहीं पता कि आईपीओ क्या होता है, इसका मतलब है कि आप शेयर मार्केट में नए है तो चलिए आज के इस लेख में हम आपको आईपीओ क्या है, आईपीओ कैसे खरीदे और बेचे, आईपीओ के फायदे और नुकसान और आईपीओ IPO क्या होता है से संबंधित सारी जानकारी आपको आज इस लेख में हम देने वाले हैं तो कृपया आप इस लेख को अंत तक जरूर करें

IPO क्या है

जब भी किसी कंपनी को अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए पैसों की आवश्यकता पड़ती है तो वह सबसे पहले बड़े बड़े निवेशकों के पास जाती है लेकिन फिर भी कंपनी को और पैसों की आवश्यकता पड़ती है तो वह शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लेकर आती है आईपीओ का मतलब होता है ( Initial public offering )

आईपीओ के माध्यम से कंपनी शेयर मार्केट में अपनी हिस्सेदारी को बेचती है और इसके बदले जो भी पैसा आता है उस पैसे से अपने बिजनेस को आगे बढ़ाती है

जब कोई कंपनी शेयर मार्केट में आईपीओ के माध्यम से जो हिस्सेदारी बेचती है है है उसे बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट, म्यूचल फंड और रिटेल इन्वेस्टर खरीदते हैं

Ipo कैसे खरीदें और बेचे जाते हैं

जब कोई भी कंपनी अपना आईपीओ लेकर आती है तो लोगों का इसको खरीदने का समय 3 दिन का होता है इस आईपीओ को आप अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमेट अकाउंट का इस्तेमाल करके खरीद सकते हैं आपको किसी भी कंपनी के आईपीओ में एक बोली लगानी पड़ती है

जो कि इतनी मुश्किल नहीं है जितना आप सोच रहे हैं अब आपको अगले 7 दिन के भीतर एक उस कंपनी के माध्यम से अलॉटमेंट का नोटिफिकेशन मिल जाएगा कि क्या कंपनी ने आपको शेयर अलॉट किए हैं या नहीं अगर किए हैं

तो यह शेयर कंपनी की लिस्टिंग के दिन आपके डीमेट अकाउंट में आ जाएंगे और अगर नहीं मिले हैं तो आपके अकाउंट से जो भी पैसा ब्लॉक हुआ था वह वापस आपके अकाउंट में अनब्लॉक हो जाएगा

आईपीओ कैसे काम करता है

जब कोई कंपनी शेयर मार्केट में आने के लिए अपना आईपीओ लेकर आती है तो इस पूरे प्रोसेस को पूरा होने में 10 दिन का समय लगता है

पहले 3 दिनों तक सभी बड़े और छोटे निवेशकों को इस कंपनी में पैसा लगाने का मौका मिलता है 3 दिन बाद आप इस कंपनी के अंदर पैसा नहीं लगा सकते हैं फिर अगले 7 दिनों के भीतर कंपनी यह डिसाइड करती है कि किस व्यक्ति को शेयर देने हैं और किसको नहीं देने हैं

क्योंकि प्रिय पाठक ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आपने जिस कंपनी के आईपीओ को खरीदा है वह आपको मिलेगा ही मिलेगा ऐसा नहीं होता है अब 7 दिन के अंदर आपको पता चल जाता है कि कंपनी ने आप को शेयर दिए हैं या नहीं दिए हैं अगर आपको शेयर मिल गया है

तो अगले 3 दिनों के अंदर मतलब दसवे दिन कंपनी शेयर मार्केट के एक्सचेंज पर लिस्ट हो जाएगी अब आप यहां से अपने शहर को दे सकते हैं इस तरीके से आईटीओ काम करता है

आईपीओ के फायदे और नुकसान

आईपीओ के फायदे

यदि आपने किसी अच्छी कंपनी के आईपीओ में निवेश किया है तो कई बार यह है आशा बनी रहती है कि वह कंपनी जिस दिन शेयर मार्केट में लिस्ट होगी तब अच्छे दामों पर लिस्ट होती है

जिसके कारण आपको बहुत कम समय में बहुत ज्यादा मुनाफा देखने को मिल सकता है

आप आईपीओ के माध्यम से कम समय में अपने पैसे को डबल कर सकते हैं

आईपीओ के नुकसान

प्रिय पाठक पाठक कई बार ऐसा होता है कि आप जिस कंपनी के आईपीओ को खरीदते हैं अरे कंपनी जिस दिन शेयर मार्केट में लिस्ट होती है

उस दिन वह जिस प्राइस पर आप ने खरीदा उससे नीचे लिस्ट होती है जिसके कारण आपको नुकसान उठाना पड़ता कता है

आईपीओ के अंदर कम समय में पैसे बनाने के चक्कर में कई बार लोगों को बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है

निष्कर्ष – Conclusion

आज के इस लेख में आपने सीखा कि आईपीओ क्या है आईपीओ को कैसे खरीदा और बेचा जाता है आईपीओ खरीदते समय आपको क्या फायदे व नुकसान हो सकते हैं इसके साथ ही हमने आईपीओ से संबंधित आपको संपूर्ण जानकारी देने की कोशिश की है

यदि आपका इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल यह सुझाव है तो आप में हमारे साथ कमेंट बॉक्स में साझा कर सकते हैं इस लेख को अंतत पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

कई गुना सब्सक्राइब हो जाए IPO तो कैसे होता है अलॉटमेंट, जानिए कहां करें चेक कि शेयर मिला या नहीं

कई गुना सब्सक्राइब हो जाए IPO तो कैसे होता है अलॉटमेंट, जानिए कहां करें चेक कि शेयर मिला या नहीं

जब कभी शेयरों की संख्या से अधिक आवेदन आ जाते हैं तो शेयरों का अलॉटमेंट किया जाता है. रिटेल निवेशकों और बड़े निवेशकों को अलग-अलग तरीके से अलॉटमेंट किया जाता है.

आए दिन किसी न किसी IPO क्या होता है कंपनी का आईपीओ आने की खबरें आप सुनते ही होंगे. आईपीओ के साथ-साथ आपको आईपीओ ओपनिंग, आईपीओ क्लोजिंग, आईपीओ अलॉटमेंट और आईपीओ लिस्टिंग जैसे टर्म भी सुनने को मिलते होंगे. ऐसे में बहुत सारे लोग आईपीओ अलॉटमेंट को लेकर काफी कनफ्यूजन में रहते हैं. सवाल है कि आईपीओ अलॉटमेंट क्या होता है, क्यों होता है, कैसे होता है, अलॉटमेंट चेक कैसे करें आदि. आइए आज जानते हैं इन सबके बारे में.

क्यों होता है शेयरों का अलॉटमेंट?

शेयरों के अलॉटमेंट की वजह बहुत ही साधारण सी है. जब कभी शेयरों की संख्या से अधिक आवेदन आ जाते हैं तो शेयरों का अलॉटमेंट किया जाता है. यानी अगर एक ही शेयर के लिए 50 दावेदार आ जाते हैं यानी इश्यू 50 गुना सब्सक्राइब हो जाता है तो शेयर अलॉटमेंट के जरिए ही यह तय होता है कि किसे कितने शेयर दिए जाएंगे और किसे शेयर नहीं मिलेंगे.

अलॉटमेंट के लिए क्या होता है कोटा?

अगर कोई आईपीओ 90 फीसदी से कम सब्सक्राइब होता है तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है. ऐसे में आईपीओ दोबारा से लाना पड़ता है. अलॉटमेंट के लिए रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 35 फीसदी, नेशनल इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के लिए न्यूनतम 15 फीसदी और क्वीलिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर के लिए अधिकतम 50 फीसदी कोटा निर्धारित हो सकता है.

कैसे होता है शेयरों का अलॉटमेंट?

जो लोग आईपीओ के प्राइस बैंड में न्यूनतम प्राइस पर बोली लगाते हैं, ओवर सब्सक्राइब होने की हालत में शेयर मिलने के चांस कम हो जाते हैं. अगर इश्यू मामूली ओवर सब्सक्राइब होता है तो रिटेल निवेशकों को पहले तो सभी को एक-एक लॉट शेयर दे दिया जाता है, उसके बाद उनके कोटे के जितने शेयर बचते हैं, उन्हें उसी अनुपात में अलॉट किया जाता है, जिस अनुपात में लोगों ने उसे सब्सक्राइब किया होता है. अगर इश्यू बहुत ज्यादा सब्सक्राइब हो जाता है, मान लीजिए 50 गुना सब्सक्राइब हो गया तो रिटेल निवेशकों को कंप्यूटर के जरिए लकी ड्रॉ निकाल कर शेयर अलॉट किए जाते हैं. वहीं दूसरी ओर नेशनल इंस्टीट्यूशनल निवेशकों और क्वीलिफाइड इंस्टीट्यूशनल निवेशकों को हर स्थिति में आनुपातिक तरीके से शेयर अलॉट किए जाते हैं.

कैसे चेक करें आईपीओ का अलॉटमेंट?

वैसे तो आपने जिस ब्रोकर के जरिए आईपीओ लिया होगा, वह आपको अलॉटमेंट की जानकारी देगा, लेकिन अगर किसी वजह से जानकारी नहीं मिली तो आप IPO क्या होता है खुद भी चेक कर सकते हैं. किसी आईपीओ के शेयरों के अलॉटमेंट का पता करने के लिए आपको सबसे पहले बीएसई की वेबसाइट पर जाना होगा. वहां पर आपको इश्यू की लिस्ट में से उस आईपीओ को चुनना होगा, जिसके शेयर का अलॉटमेंट आपको चेक करना है. आपसे पैन कार्ड नंबर पूछा जाएगा, जिसे डालने के बाद आपके सामने अलॉटमेंट की डिटेल्स आ जाएंगी. अलॉटमेंट चेक करने का एक दूसरा तरीका भी होता है. आपने जिस भी कंपनी का आईपीओ लिया है, उसका कोई रजिस्ट्रार होगा. आप उस रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाकर अलॉटमेंट की जानकारी ले सकते हैं.

आईपीओ ग्रे मार्केट क्या है ? IPO में GMP – IPO Grey Market in Hindi

IPO Grey Market और IPO में GMP यानी ग्रे मार्केट प्रीमियम यह शब्द निवेशकों के बीच काफी चर्चाओं में रहते है । आज के समय हमें शेयर बाजार में कई कंपनियों के आईपीओ देखने को मिल रहे है । IPO या Initial Public Offer एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए कोई कंपनी Share Market में कदम रखती है ।

इस समय IPO Market में बहुत से Investors रुचि दिखा रहे है, जिसके चलते कई कंपनियों के IPO काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रहे है ।

जब भी कोई नया IPO आता है, तो इसके साथ IPO Grey Market Premium या आईपीओ में जीएमपी के बारे में भी काफी सुनने को मिलता है । कई IPO ऐसे होते है जिनकी आईपीओ ग्रे मार्केट में काफी ज्यादा Demand देखने को मिलती है ।

लेकिन बहुत से लोगों को यह जानकारी नही होती है की IPO में GMP क्या है, ग्रे मार्केट प्रीमियम किसे कहते है या IPO Grey Market क्या होता है । तो आज हम इसी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है, तो आइए शुरुआत से IPO GMP के बारे में जानते है ।

Ipo grey market meaning in hindi

आईपीओ ग्रे मार्केट क्या है ? – IPO Grey Market Meaning in Hindi

आईपीओ ग्रे मार्केट या एक ऐसा बाजार होता है, जिसमे Unofficial रूप से किसी कंपनी के IPO या नए शेयर Trade किए जाते है । IPO Grey Market एक Over the counter ( OTC ) Market होता है , जहाँ कंपनी के शेयर या IPO स्टॉक एक्सचेंज पर आने से पहले खरीदे और बेचे जाते है ।

यह Stocks की Trading का एक Unofficial बाजार होता है, जिसमे आमतौर पर किसी कंपनी के नए Shares यानी IPO जारी होने के कुछ समय पहले से Trading शुरू हो जाती है । यानी इस बाजार में Stock Trading की शुरुआत किसी कंपनी के Shares की आधिकारिक रूप से Trading शुरू होने से पहले हो जाती है ।

Grey Market कैसे काम करता है ?

आईपीओ ग्रे मार्केट में IPO या Stock Trading जैसी गतिविधियां किसी कंपनी द्वारा जारी IPO Allotment के आधिकारिक माध्यम और प्रक्रिया से काफी अलग होती है । Grey Market में Traders द्वारा किसी कंपनी के Shares को Unofficially रूप से Bid और Offer किया जाता है ।

Grey Market में होने वाली Stock Trading का Settlement तब पूरा होता है, जब आधिकारिक रूप से उस Stock की Trading शुरू होती है ।

Grey Market में कोई Rules या Regulation नही होता है । क्योंकि यह एक Unofficial Market होता है । यह बाजार Marker Regulators द्वारा नियंत्रण में नही होता है, ना ही वे किसी तरह से इस बाजार में होने वाले Transactions में शामिल होते है ।

LIC IPO Allotment Status Check Online, NSE, BSE, KFintech Process

Qib in share ipo hindi

QIP in share market QIP kya hai

Retail investors meaning in hindi

इस बाजार में IPO Applications को Buy या Sell करने के लिए कोई आधिकारिक व्यक्ति या आधिकारिक संस्था नही होती है । IPO Grey Market कुछ लोगों के छोटे समूहों द्वारा संचालित होता है और इस बाजार में होने वाली Trading एक दूसरे के परस्पर विश्वास पर की जाती है । अगर आप Grey Market में Trade करते है, तो आप यह अपने जोखिम पर करते है ।

आमतौर पर IPO Grey Market किसी कंपनी के IPO के आने से पहले और IPO शुरू होने से लेकर IPO Allotment तक चलता है ।

ग्रे मार्केट प्रीमियम क्या होता है ? IPO में GMP क्या है ? – IPO GMP Meaning in Hindi

IPO में GMP या ग्रे मार्केट प्रीमियम आईपीओ वह कीमत होती है, जिस अतिरिक्त कीमत पर Unofficial बाजार में किसी कंपनी के Shares trade किए जाते है । Grey Market में IPO की कीमत को Grey Market Price कहा जाता है ।

उदाहरण के लिए अगर किसी कंपनी के IPO की कीमत 100 रुपए है और इसका Grey Market Premium 50 रुपए चल रहा है, तो IPO List होने पर इसकी कीमत 100 + 50 यानी 150 रुपए के आसपास हो सकती है ।

आमतौर पर किसी कंपनी के शेयर के Grey Market में प्रदर्शन से यह अंदाजा लगाया जाता है की Stock Stock Exchange पर List होने पर वह IPO कैसे Perform कर सकता है और उस आईपीओ पर कितना Listing Gain मिल सकता है ।

IPO के Stock Exchange पर List होने पर Investors को जो फायदा मिलता है, उसे Listing Gain कहा जाता है ।

यह भी जानिए –

हालांकि केवल Grey Market Premium को देखकर ही किसी कंपनी के IPO को Subscribe करना हमेशा सही फैसला नही होता है, क्योकि IPO के Listing से पहले ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी समय बदल सकता है ।

कई बार यह IPO GMP निवेशकों के काम आता है और कई बार काम नही आता है । किसी भी IPO का Grey Market Premium केवल निवेशकों के Sentiment की ओर इशारा करता है ।

IPO क्या होता है?

किसी भी कंपनी के द्वारा शेयर बाजार में जब पूंजी जुटाने के लिए सूचीबद्ध किया जाता है अपने कंपनी को उस समय कंपनी आईटीओ जुट आती हैं जिससे कि उसे अच्छा खासा पूंजी उपलब्ध हो जाता है अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए

IPO

Share Market IPO क्या है आईपीओ में इन्वेस्ट करे या न करें

दोस्तों आज की जानकारी में हम जाने वाले हैं आईपीओ क्या होता है IPO का Full form क्या होता है। क्या सच में आईपीओ में इन्वेस्ट करने से पैसा कुछ ही दिनों में दुगना हो जाता है हम IPO में इन्वेस्ट कैसे कर सकते हैं आईपीओ में इन्वेस्ट करने के नुकसान भी होते हैं क्या आज की जानकारी में हम पूरा जानेगै।

शेयर-बाजार-में-आईपीओ-क्या-होता-है

आईपीओ क्या है (What is IPO) ?

IPO का फुल फॉर्म इन Initial Public offering होता है। कोई भी कंपनी जब पहली बार स्टॉक मार्केट में अपने शेयर को लिस्ट करती है तो उस शेयर को आईपीओ कहते हैं। जब कोई कंपनी अपने कारोबार को बड़ा करना चाहती है तो उसे ज्यादा पैसे की आवश्यकता होती है लेकिन उसके पास इतना पैसा नहीं होता है तो वह स्टॉक मार्केट जाने की स्टॉक एक्सचेंज कंपनी में अपने शेयर को बेचेगी और स्टॉक एक्सचेंज कंपनी से लोग यानी कि ट्रेडर्स उस कंपनी के शेयर को खरीद लेंगे और उस शेयर के बदले उस कंपनी को पैसे मिल जाएंगे।

और जब कंपनी लोगों यानी कि ट्रेडर से अपने शेयर को बेच कर पैसे पा जाती है। तो वह अपने कंपनी के कारोबार को बढ़ाती है और जब वह कंपनी अपने कारोबार को बढ़ाएगी तो उससे ज्यादा लाभ मिलेगा जब कंपनी को लाभ मिलेगा तो उसके साथ जो इन्वेस्टर रहेंगे यानी की ट्रेडर्स उस कंपनी के शेयर खरीदे होंगे उनको भी लाभ मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी कंपनी आगे ग्रोथ करेगी कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो आगे चलकर डूब भी जाते हैं।

किसी कंपनी को आईपीओ जाने की क्या जरूरत पड़ती है

जब किसी कंपनी को अपने कारोबार बढ़ाने की आवश्यकता होती है तो वह कंपनी IPO जारी करती है इसके अलावा यदि कोई कंपनी कर्ज में है तो भी आईपीओ जारी करके पब्लिक से पैसा ले सकती है।

जब कंपनी को लगता है कि उसका बिजनेस अच्छा बढ़ रहा है और उसे आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे की आवश्यकता है तो उस कंपनी के पास तीन ऑप्शन होते हैं।

  1. कंपनी बैंक से लोन ले सकती है
  2. कंपनी रिश्तेदारों से पैसे ले सकती है
  3. कंपनी शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लाकर पैसा ले सकती है

बैंक से कर्जा लेंगे तो वहां पर इंटरेस्ट देना होगा और यदि संबंधित रिश्तेदारों से लेंगे तो इतना ज्यादा पैसा नहीं मिल पाता है यदि किसी कंपनी की जरूरत करो रुपए है तो वह रिश्तेदारों और संबंधों से नहीं मिल पाएगा इसीलिए कंपनी को शेयर मार्केट में आईपीओ लाने का सबसे अच्छा ऑप्शन होता है जब कंपनी अपना आईपीओ लाती है तो वह पब्लिक में ऐलान करती है कि कोई भी हमारी कंपनी की हिस्सेदारी ले सकता है तो चलिए एक उदाहरण द्वारा इसे समझते हैं।

उदाहरण-7 दोस्त हैं और उन्होंने मिलकर एक खुद की कंपनी खोलने का फैसला किया जब भी किसी कंपनी को खड़ा करना है तो उसके लिए पैसा चाहिए तो हर एक दोस्त ने एक ₹100000 निकाले जो कुल मिलकर ₹700000 हो गए हैं उन्होंने ₹700000 लेकर एक कंपनी खड़ी कर दी शुरुआत में कंपनी को 100 कस्टमर मिलते हैं धीरे-धीरे कंपनी बढ़ने लगती है तो अलग-अलग शहरों में से भी कंपनी के कस्टमर आने लगते हैं अब कंपनी को देश के अलग-अलग शहरों में मुंबई चेन्नई कोलकाता मैं भी अपने ब्रांच खोलने की जरूरत पड़ती है।

क्योंकि कंपनी का कस्टमर बेस बढ़ने लगता है कंपनी का कारोबार इतना बढ़ने लगता है कि हर एक शहर में कंपनी की 1010 ब्रांच खोलने की जरूरत पड़ती है लेकिन कंपनी को इतने ब्रांच ओपन करने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होती है समझ लीजिए ब्रांच खोलने के लिए कंपनी को 2000000 रुपए चाहिए और कंपनी को 50 ब्रांच खोलना है तो कुल मिलाकर ₹100000000 की जरूरत होगी जो कंपनी के पास अभी नहीं है लेकिन कंपनी तो ग्रो कर रही है आगे बढ़ रही है लेकिन कंपनी के पास पैसे नहीं है नई ब्रांच खोलने के लिए।

तो अब कंपनी शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लेकर आएगी जहां से वह पब्लिक को अपने कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर पैसा जमा करेगी और वह अपने बिजनेस में लगाएगी यानी की ब्रांच बनाएगी और जैसे-जैसे कंपनी बढ़ेगी वह अपने हिस्से यारों को बोनस के माध्यम से उसका प्रोफिट देगी। आज के समय में कोई भी प्राइवेट कंपनी पब्लिक से पैसा नहीं ले IPO क्या होता है सकती यह इलीगल है कोई भी कंपनी प्राइवेट है तो है पब्लिक से पैसा नहीं ले सकती। लेकिन यहां पर अगर कंपनी सेबी के गाइडलाइन को फॉलो करके प्राइवेट लिमिटेड से पब्लिक लिमिटेड में रजिस्ट्रेशन करेगी।

और अगर कंपनी को शेयर मार्केट में अपना आईपीओ लाना है तो उसे से भी के कुछ नियम लागू होते हैं और जो कंपनी से भी के नियम को लागू करती है फॉलो करती है वह मार्केट में अपना उपयोग ला सकती है जब भी कंपनी का आईपीओ लाना होता है तो उसे सभी को अपनी कंपनी की सभी डिटेल देनी पड़ती है डिटेल में उसे बताना पड़ता है जो भी आईपीओ से पैसा आएगा वह कंपनी बिजनेस में कैसे और कहां लगाने वाली है।

आईपीओ में पैसे कौन कोन से लोग लगा सकते हैं ?

यदि कोई IPO Launch होता है। तो उस आईपीओ को खरीदने के लिए कौन-कौन से Inverter IPO को खरीद सकते हैं चले इसके बारे में जान लेते हैं तो इसके अंदर तीन तरह के लोग पैसा लगा सकते हैं

  1. Qualify institutional Buyer (IPO क्या होता है QIB)– ऐसे लोग होते हैं जिनके पास बहुत ज्यादा पैसा होता है आपने म्यूच्यूअल फंड के बारे में सुना ही होगा तो नेचुरल फंड अपने पैसे को आईपीओ में लगा सकता है। और इसके अलावा बहुत सारी बड़ी-बड़ी कंपनियों के आईपीओ में इन्वेस्ट कर सकते हैं। जिसमें इंश्योरेंस कंपनियां भी आती है। तो सबसे पहले आईपीओ म्यूच्यूअल फंड और बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए 50% रिजर्व रहता है।
  2. Non institutional investor (NII) – अब दूसरे नंबर पर आईपीओ में इन्वेस्ट करने वाले होते हैं NNI आपने हाई नेटवर्क इंडिविजुअल (HNI) के बारे में सुना ही होगा फैशन आई इनके पास ज्यादा पैसा है वह भी इसमें यूनिवर्स कर सकते हैं इनके लिए 15% आईपीओ रिजर्वेशन होता है।
  3. Retail investors– रिटेल इन्वेस्टर्स वह होते हैं जो दो लाख से कम पैसा लगाते हैं तो आप कितना पैसा लगाना चाहते हो यदि आप दो लाख से कम लगाते हैं तो आप रिटेल की कैटेगरी में आएंगे। आईपीओ में रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए 35% रिजर्वेशन होता है।

आईपीओ से ज्यादा प्रॉफिट कैसे होता है ?

जब कोई कंपनी आईपीओ लेकर आती है तो वह मान लीजिए अपना स्टार्टिंग प्राइस ₹100 मैं आईपीओ लाती है। और जब वह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज यानी कि एनएससी और बीएससी में लिस्ट होगा तो हो सकता है। वह ₹200 में लिस्ट हो जाए ऐसा होता है क्योंकि जब कंपनी को प्रॉफिट होता है।तो वह शेयर प्राइस को स्टॉक एक्सचेंज में बढ़ाकर लिस्ट करती है। तो यदि आपने ₹50000 का आईपीओ में इन्वेस्ट किया था तो वह दुगना हो जाएगा यानी कि उसका प्राइस ₹100000 जाएंगे इसी तरह इसमें ज्यादा प्रॉफिट हो जाता है। जब कोई कंपनी अपना आईपीओ लाती है तो उसके 10 दिनों के अंदर वह एनएससी और बीएससी में लिस्ट हो जाती है। तो आप कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा पा सकते हैं।

आईपीओ में इन्वेस्ट करें या ना करें ?

दोस्तों यदि आप कंपनी के बारे में अच्छे से रिसर्च करते हैं और यदि आपको लगता है कंपनी आगे जाकर अच्छा गुरु करेगी तो आपको उस कंपनी के आईपीओ में पैसा भी नष्ट करने चाहिए पहले आईपीओ IPO क्या होता है शेयर खरीदने से पहले उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह से एनालिसिस जरूर कर लेना चाहिए।

जब DMART का आईपीओ मार्केट में लांच हुआ था तो उसका प्राइस ₹295 था और जब वह सेकेंडरी मार्केट में रिलीज हुआ तो उसकी कीमत 2 दिन में ₹600 हो गई और नवंबर 2017 तक डीमार्ट का शेयर प्राइस 1120 ऊपर हो गया। मतलब यदि आप सही आईपीओ में इन्वेस्ट करते हैं तो अच्छा खासा पैसा रिटर्न पा सकता है।

तो आज की जानकारी में हमने आईपीओ को के बारे में पूरी जानकारी जाननी है यदि इस जानकारी संबंधित आपको कुछ सवाल पूछने है तो कमेंट करके उनसे पूछ सकते हैं।

हमने ये ब्लॉग हिंदी भाषा में जानकारी शेयर करने के लिए बनाए है। मेरा मकसद है लोगो की Help करना। नयी पोस्ट अपडेट पाने के लिए Email subscribe & Social Media Join करे !

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