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कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए?

कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए?

Robot: फूड डिलीवरी करने जा रहा रोबोट हुआ हादसे का शिकार, ट्रेन के सामने आने से हुई घटना

Robot: सोशल मीडिया पर आए दिन कई तरह के वीडियो वायरल होते रहते है। जिसमें कई को देख तो हम हैरान रह जाते है। दरअसल, आज का दौर साइंस एंड टेक्नॉलोजी का है। जहां सभी काम रोबोट से करवाए जाने को लेकर होड़ मची हुई है। इसी से जुड़ी एक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक रोबोट फूड डिलीवरी करने जा रहा होता है तभी वो हादसे का शिकार हो जाता है।

रेलवे ट्रैक पर आया रोबोट

टबता दें कि वीडियो में दिख रहे रोबोट की घटना अमेरिका की बताई जा रही है। हुआ यूं कि एक रोबोट फूड डिलीवरी करने के लिए जा रहा होता है तभी उसके रास्ते में रेलवे ट्रैक आ जाता है। रोबोट ट्रैक को पार कर रहा होता है लेकिन इसी बीच ट्रेन आ जाती है और वह ट्रेन के नीचे आ जाता है। इसी के साथ रोबोट के साथ-साथ कस्टमर का फूड भी बर्बाद चल गया। देखें वीडियो…

वहीं वीडियो वायरल होने के बाद लोगों का कहना है कि ये कैसे हो सकता है कि रोबोट का सेंसर ट्रेन को नहीं पकड़ पाया, वरना हादसा टल सकता था। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि इस रोबोट में सेंसर नहीं लगाया गया था।

जानें इंटरव्यू में उम्मीदवारों का कैसे चयन कर रहे हैं रोबोट, पढ़ें पूरी खबर

खाने के ऑर्डर ले जाने से लेकर पेंटिंग बनाने तक में रोबोट कई तरह के काम करने में सक्षम साबित हो रहे हैं। वहीं, अब ये रोबोट भर्ती करने के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू भी ले रहे हैं। जी हां, इन वीडियो.

जानें इंटरव्यू में उम्मीदवारों का कैसे चयन कर रहे हैं रोबोट, पढ़ें पूरी खबर

खाने के ऑर्डर ले जाने से लेकर पेंटिंग बनाने तक में रोबोट कई तरह के काम करने में सक्षम साबित हो रहे हैं। वहीं, अब ये रोबोट भर्ती करने के लिए उम्मीदवारों का इंटरव्यू भी ले रहे हैं। जी हां, इन वीडियो इंटरव्यू में एल्गोरिद्म की मदद से लोगों के चेहरे के हाव-भाव पढ़े जा रहे हैं। आवाज की टोन से पता लगाया जा रहा है कि उम्मीदवार में कितना आत्मविश्वास है और क्या वे नौकरी पाकर खुश हैं? बता दें कि रोबोटिक वीडियो असेसमेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कंपनियों में हर स्तर की भर्ती के लिए किया जा रहा है।

भावों और आवाज की टोन समझने में सक्षम : एक निजी बैंक के एचआर हेड राजकमल ने बताया कि बैंक ने इस साल 40 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों में से दो हजार कस्टमर सर्विस ऑफिसर्स की भर्ती के लिए एप्टिट्यूड टेस्ट के साथ एल्गोरिद्म वाले वीडियो इंटरव्यू की मदद ली थी। पीपलस्ट्रॉन्ग की डिविजन वीबॉक्स ने एक्सिस के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया को संभव बनाया था। वीबॉक्स के सीईओ निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के फेस-इंडेक्सिंग सॉफ्टवेयर को इस बैंक में 2017 में आवेदन करने वाले करीब 50 हजार उम्मीदवारों पर आजमाया था। सॉफ्टवेयर ने घबराहट और खुशी जैसे भावों को लोगों की आंखों के इशारों, हाव-भाव और आवाज की टोन से समझा था। फिर उसी कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए? हिसाब कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए? से उम्मीदवार को नंबर दिए थे।

इससे भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात कम : एक इंश्योरेंस कंपनी के चीफ एचआर ऑफिसर विक्रमजीत सिंह ने बताया कि कंपनी ने रोबोटिक इंटरव्यू से 1,600 से अधिक भर्तियां की हैं। इनमें अंडरराइटर से लेकर असिस्टेंट वाइस प्रेजिडेंट तक के पदों पर काम कर रहे लोग शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया में कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए? पक्षपात को कम करने में मदद मिलती है।

निर्णय लेने की क्षमता का करता है आकलन : बेंगलुरु की टैलव्यू कंपनी इस सॉफ्टवेयर का असेसमेंट करती है। सिंगापुर और अमेरिका में ऑपरेट करने वाली इस कंपनी के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर राजीव मेनन ने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम से सोर्स किया गया यह सॉफ्टवेयर हाव-भाव से गुस्सा और खुशी जैसे भाव, आवाज से आत्मविश्वास और टेक्स्ट से टीम के साथ काम करने और निर्णय लेने की क्षमता का आकलन कर सकता है। मेनन ने बताया कि उम्मीदवार आम इंटरव्यू में सवालों का मनचाहा जवाब दे सकते हैं, लेकिन वीडियो असेसमेंट में भाव और शब्दावली पर ध्यान दिया जाता है।

अमेजन ने एआई आधारित भर्ती प्रकिया को कर दिया था बंद
हालांकि सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुनील अब्राहम ने बताया, अगर आप एक इंसान को मूर्ख बना सकते हैं तो कंप्यूटर को भी मूर्ख बना सकते हैं। अब्राहम ने कहा कि ऐसे सॉफ्टवेयर लोगों को खास तरह से व्यवहार करने पर मजबूर करके इमोशनल इकोनॉमी को एक जैसा बना सकते हैं। अक्टूबर 2018 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि अमेजन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बेस्ड हायरिंग सिस्टम को बंद कर दिया था। उन्होंने पाया था कि यह सिस्टम महिलाओं के प्रति पूर्वग्रह दिखाता था। उसकी वजह यह थी कि सिस्टम पुराने डाटा के आधार पर काम कर रहा था, जब कंपनी में महिलाओं से ज्यादा पुरुष कर्मचारी थे।

युद्ध क्षेत्र में रोबोट का प्रयोग हुआ तो मानव जाति के लिए होगा व‍िनाशकारी, जानें क्‍यों काफी संख्‍या में देश कर रहे हैं व‍िरोध

विश्व में युद्ध तकनीक अत्याधुनिक करने की होड़ चल रही है।

विश्व में युद्ध तकनीक अत्याधुनिक करने की होड़ चल रही है। अमेरिका रूस और किसी हद तक चीन भी इसमें आगे है। एआइ और रोबोटिक्स के प्रयोग से ऐसी मशीनें तैयार की जा रही हैं जो मानव की तरह युद्ध में शत्रु को निशाना बनाएंगी।

जेनेवा, एजेंसियां। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'रोबोट' तो याद ही होगी आपको। कैसे मानव जैसा दिखने वाला रोबोट 'चिट्टी' गलत शक्तियों के हाथों में पड़कर विध्वंसक हो जाता है और रोबोट्स की एक सेना बनाकर मनुष्यों पर हमला करता है। हालीवुड में भी टर्मिनेटर सीरीज और रोबोकाप फिल्मों में मानव से दिखने और काम करने वाले खतरनाक रोबोट दिखाए गए हैं, लेकिन अब असली जिंदगी में भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) आधारित इसी कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए? प्रकार के रोबोट और हथियारों को लेकर चिंता का माहौल है। हाल ही में स्विटजरलैंड के जेनेवा में 125 देशों की एक कांफ्रेंस युद्ध में रोबोट और स्वचालित मशीनों के प्रयोग को रोकने के लिए हुई। आइए समझें कि यदि युद्ध में रोबो सैनिक प्रयोग किए गए तो क्या खतरा होगा, कौन ऐसे रोबोट और मशीनें बना रहा है और इस कांफ्रेंस में इसे रोकने के लिए क्या किया गया:

जानें कांफ्रेंस का उद्देश्य

युद्ध में रोबोट और स्वचालित मशीनों के प्रयोग को रोकने के लिए विश्व के 125 देशों ने एक समझौता किया है जिसे परंपरागत हथियारों पर सम्मेलन (कन्वेंशन आन सर्टेन कन्वेंशनल वेपंस) कहा गया है। इसका उद्देश्य उन हथियारों पर रोक लगाना है जो अनावश्यक और बिना सोचे समझे भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अधिकांश सदस्यों ने हाल की बैठक में यह मांग रखी कि युद्ध में प्रयोग के लिए बन रहे 'किलर रोबोट्स' पर रोक लगाई जाए। ऐसे रोबोट और मशीनें बनाने वाले देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।

किलर रोबोट यानी बड़ा खतरा

विश्व में युद्ध तकनीक अत्याधुनिक करने की होड़ चल रही है। अमेरिका, रूस और किसी हद तक चीन भी इसमें आगे है। एआइ और रोबोटिक्स के प्रयोग से ऐसी मशीनें तैयार की जा रही हैं जो मानव की तरह युद्ध में शत्रु को निशाना बनाएंगी। यह मशीनें या रोबोट मानव की तरह दिखेंगे, लेकिन उनमें मस्तिष्क नहीं होगा। वह सिग्नल के आधार पर लक्ष्य को निशाना बनाएंगे। ऐसे रोबोट और मशीनों के आविष्कार को युद्ध के क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। ठीक उसी तरह जैसे बारूद और परमाणु बम की खोज ने युद्ध का परिदृश्य बदल दिया था। एआइ, रोबोटिक्स और इमेज रिकग्निशन के प्रयोग से ऐसे अत्याधुनिक हथियार बनाना संभव हो गया है।

रणनीतिकारों को क्यों पसंद हैं यह रोबोट

युद्ध के क्षेत्र से जुड़े रणनीतिकार मानते हैं कि ऐसे रोबोट से सैनिकों को युद्धक्षेत्र के खतरे से दूर रखा जा सकेगा। मानव के मुकाबले निर्णय भी अधिक तेजी से किए जा सकेंगे। मानवरहित ड्रोन और टैंक से युद्ध क्षेत्र का नक्शा ही बदल जाएगा। हालांकि आलोचकों का कहना है कि मशीनों को घातक फैसले लेने का अधिकार देना नैतिक रूप से गलत है। ऐसे रोबोट वयस्क और बच्चों के बीच अंतर नहीं कर सकेंगे, न ही किसी सैनिक और नागरिक में भेद कर सकेंगे। ऐसे में वह बस सामने दिख रहे लक्ष्य को निशाना बनाएंगे। यही मानव जाति के लिए बड़ा खतरा है। कांफ्रेंस में रेड क्रास अंतरराष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष पीटर मारर ने कहा कि मानव के स्थान पर युद्ध में स्वचालित हथियारों को आगे करने की बात नैतिक आधार पर एक सवाल है।

अमेरिका ने किया भारी निवेश

विश्व में अमेरिका हथियारों की होड़ और व्यापार में सबसे आगे रहता है। लाकहीड मार्टिन, बोइंग, रेथान और ना‌र्थ्राप जैसी हथियार निर्माता कंपनियों के साथ इस क्षेत्र में वह भारी निवेश कर रहा है। इसमें रेडियो फ्रिक्वेंसी के आधार पर गतिमान लक्ष्यों का पता लगाने वाली लंबी दूरी की मिसाइल, हमला करने वाला ड्रोन का झुंड और स्वचालित मिसाइल रक्षा प्रणाली शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन केंद्र के शोधार्थी फ्रैंज स्टीफेन गाडी का कहना है कि स्वचालित हथियार प्रणाली के विकास की होड़ आने वाले समय में थमने वाली नहीं है।

यहां हुआ स्वचालित हथियार तकनीक का प्रयोग

इस बारे में प्रामाणिक सूचना अधिक नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं के अनुसार लीबिया में मिलिशिया लड़ाकों के खिलाफ घातक स्वचालित हथियार प्रणाली का प्रयोग किया गया था। टुर्की के एक रक्षा ठेकेदार द्वारा बनाए गए कार्गू-2 ड्रोन ने एक राकेट हमले के बाद भागते हुए लड़ाकों का पता लगाकर हमला किया था। हालांकि यह साफ नहीं हो सका कि इस ड्रोन को कोई मानव संचालित कर था या नहीं। 2020 में अजरबैजान ने आर्मेनिया के खिलाफ युद्ध में ऐसी मिसाइल और ड्रोन का प्रयोग किया जो हवा में उड़ते रहते हैं और लक्ष्य दिखने पर हमला करते हैं।

इसलिए महत्वपूर्ण थी कांफ्रेंस

इस कांफ्रेंस को किलर रोबोट पर रोक लगाने या उनका प्रयोग सीमित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हो सका। रोबोट और हथियारों के संभावित खतरों के अध्ययन के बाद बड़े निर्णय की उम्मीद इस कांफ्रेंस में पूरी नहीं हो सकी। इस प्रकार के अत्याधुनिक हथियार व तकनीक बनाने वाले देशों (रूस आदि) का कहना है कि ऐसे हथियारों पर रोक या सीमित उपयोग का निर्णय सर्वसम्मति से होना चाहिए। अमेरिका का कहना है कि स्वचालित हथियार तकनीक पर प्रतिबंध जल्दबाजी में लिया गया निर्णय होगा। पहले से मौजूद अंतरराष्ट्रीय कानून इस बारे में सक्षम हैं। कांफ्रेंस में अमेरिकी प्रतिनिधि जोशुआ डोरोसिन ने कहा कि किलर रोबोट के प्रयोग पर एक गैर बाध्यकारी आचार संहिता होनी चाहिए।

सिलिकान वैली तक भी पहुंचा मामला

तकनीक के हथियार और युद्ध के क्षेत्र में प्रयोग का मामला अमेरिका की सिलिकान वैली तक भी पहुंच चुका है। 2018 में गूगल ने अमेरिका रक्षा विभाग पेंटागन के साथ करार का नवीनीकरण करने से मना कर दिया था। इस करार के तहत तस्वीरें पहचान कर हमला करने वाले ड्रोन के लिए एआइ का प्रयोग किया जाना था। गूगल के हजारों कर्मचारियों ने इसका विरोध किया था। कंपनी ने हथियारों व युद्ध में तकनीक के प्रयोग को लेकर अपनी नीति में सुधार भी किया था।

वैज्ञानिकों ने रोबोट को मैदान पर उतारा, दुनिया में नया रिकॉर्ड सेट किया

यह तो तय था कि रोबोट इंसान के लिए चीजों को आसान कर देंगे लेकिन बहुत कम लोगों को अंदाजा रहा होगा कि अब रोबोट खेल के मैदानों पर भी उतरकर करतब दिखाएंगे. जी हां, अमेरिका से ऐसी ही घटना सामने आई है जहां एक रोबोट को दौड़ के मैदान में उतार दिया गया. इसके बाद तो फिर कमाल हो गया. रोबोट ने दौड़ में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया और गिनीज बुक में यह रिकॉर्ड शामिल हो गया.

इसका नाम कैसे रोबोटो (Cassie) रखा गया है

दरअसल, यह घटना अमेरिका की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और स्पिनऑफ कंपनी एजिलिटी रोबोटिक्स ने इस रोबोट को कैसे एक रोबोट के साथ व्यापार करने के लिए? बनाया है. इसका नाम कैसे रोबोटो (Cassie) रखा गया है. इस रोबोट को 100 मीटर की रेस के लिए मैदान पर उतारा गया. दो पैरो वाले इस रोबोट ने कॉलेज के ट्रैक पर 24.7 सेकंड में 100 मीटर तक दौड़कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम शामिल करवा लिया.

रोबोटिक्स दुनिया में नया रिकॉर्ड सेट किया

इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है. इसे ओरेगन स्टेट रोबोटिक्स प्रोफेसर और एजिलिटी रोबोटिक्स के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी जोनाथन हर्स्ट के निर्देशन में बनाया गया है. इससे पहले इस रोबोट ने कॉलेज के कैंपस में 53 मिनट के समय के साथ पूरे 5 हजार मीटर का रेस पूरा किया था. इसके बाद इसने यह नया रिकॉर्ड सेट किया है जो रोबोटिक्स दुनिया में एक रिकॉर्ड है.

इस पूरी घटना का वीडियो शेयर करते हुए अमेरिकी पत्रकार डैन टिलकिन ने लिखा कि यह रोबोट का वर्ल्ड रिकॉर्ड है. समझ नहीं आ रहा कि इससे प्रेरित हों या भयभीत हों. फिलहाल इस पर दुनियाभर के लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

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