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वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग

वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग
भारतीय कमोडिटी बाजार बढ़ रहा है और आगे भी बढ़ता रहेगा। अन्य बाजारों की तुलना में कम लोकप्रिय होने के बावजूद, कमोडिटी बाजार जोखिम को कम करने, कीमतों को प्रभावित करने और कृषि क्षेत्र और भारतीय अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गेहूँ की खेती

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भारत में, आप पैसे का निवेश कर सकते हैं और अपने पोर्टफोलियो को कई तरह से स्वस्थ और लाभदायक बनाए रखने के लिए उसमें विविधता ला सकते हैं। सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक कमोडिटी ट्रेडिंग है।

जबकि कमोडिटी बाजार वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग भारत में सौ से अधिक वर्षों से अस्तित्व में है, हालांकि कमोडिटी बाजार शेयर बाजारों की तुलना में वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग कम लोकप्रिय हैं, वे भारतीय अर्थव्यवस्था के कामकाज और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस पोस्ट में, आइए वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग हम भारत में कमोडिटी बाजारों की भूमिका और महत्व को समझने की कोशिश करें।

कमोडिटी बाजार क्या हैं?

जिस तरह शेयर बाजार व्यापारिक शेयरों की सुविधा देता है, वैसे ही धातु, सोना, चांदी, कृषि उत्पाद, और अन्य जैसी वस्तुओं का कारोबार कमोडिटी बाजार नामक समर्पित बाजारों में किया जाता है। व्यापारी, निर्माता, उत्पादक और अन्य लोग विभिन्न वस्तुओं की कीमत की खोज के लिए इन बाजारों का व्यापक रूप से उपयोग करते हैं।

शेयर बाजार की तरह, खरीदने और बेचने के लिए स्टैंडअलोन कमोडिटी एक्सचेंज हैं। वर्तमान में, देश में तीन मुख्य कमोडिटी एक्सचेंज संचालित होते हैं - एमसीएक्स (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज), आईसीईएक्स (इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज), और एनसीडीईएक्स (नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज)।

हालांकि, एमसीएक्स भारत में अग्रणी कमोडिटी एक्सचेंज है, जहां स्पॉट ट्रेडिंग और डेरिवेटिव दोनों में सबसे अधिक दैनिक कारोबार होता है।

भारत में कमोडिटी बाजार कितने महत्वपूर्ण हैं?

भारत में कमोडिटी बाजार देश की अर्थव्यवस्था, निवेशकों और अपने जीवन यापन के लिए वस्तुओं पर निर्भर लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। कमोडिटी बाजारों की कुछ सबसे महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं:

ये बाजार लोगों को भारत में कृषि उत्पादों सहित विभिन्न वस्तुओं की वास्तविक कीमतों का पता लगाने की अनुमति देते हैं। ये बाजार सुनिश्चित करते हैं कि वस्तुओं को कम कीमत पर नहीं बेचा जाता है, जिससे कोई नुकसान नहीं होता है।

गुणवत्ता रखरखाव

कमोडिटी बाजारों में खरीद और बिक्री के लिए उपलब्ध वस्तुओं की गुणवत्ता के संबंध में सख्त आवश्यकताएं हैं। इस तरह की नीतियां सुनिश्चित करती हैं कि पूरे देश में माल की गुणवत्ता बेहतर हो, जिससे आपूर्तिकर्ताओं और उपभोक्ताओं को भी लाभ हो।

कमोडिटी फ्यूचर्स में ट्रेडिंग ब्रोकर के साथ बनाए गए मार्जिन के माध्यम से लीवरेज पर आधारित होती है। हाथ में बहुत कम मात्रा में नकदी के साथ एक बड़ा लेनदेन किया जा सकता है।

USDⓈ-मार्जिन फ्यूचर्स और COIN-मार्जिन फ्यूचर्स क्या हैं

बायनेन्स USDⓈ-मार्जिन फ्यूचर्स और COIN-मार्जिन फ्यूचर्स दोनों प्रोडक्ट की पेशकश करता है। यहां उनकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

COIN-मार्जिन USDⓈ-मार्जिन
संपार्श्‍विक (कोलैटरल)क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी)(यानी BTC, ETH)USDT, BUSD
मार्जिन प्रकारपृथक/क्रॉसपृथक/क्रॉस
क्रॉस संपार्श्‍विक (कोलैटरल)नहीं हां
  • क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) में सेट्लमेंट: अनुबंधों को अंतर्निहित क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) में मूल्यवर्गित और व्यवस्थित किया जाता है, इससे स्थिर कॉइन को संपार्श्‍विक (कोलैटरल) के रूप में रखने की आवश्यकता नहीं रह जाती है।
  • अनुबंध गुणक: अनुबंध गुणक एक अनुबंध के मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक BTC फ्यूचर्स अनुबंध 100 USD का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि प्रत्येक ETH फ्यूचर्स अनुबंध 10 USD का प्रतिनिधित्व करता है। उदाहरण के लिए, 1,000 USD का BTCUSD त्रैमासिक 1225 100 USD x 10 अनुबंधों के बराबर होता है, और 1,000 USD का ETHUSD त्रैमासिक 1225 10 USD x 100 अनुबंधों के बराबर है।
  • समयावधि की समाप्ति: सतत, त्रैमासिक, या द्वि-त्रैमासिक

COIN-मार्जिन अनुबंधों के लाभ

बायनेन्स के COIN-मार्जिन अनुबंधों को क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) में मूल्यवर्गित और सेटल किया जाता है। उदाहरण के लिए, BTCUSD त्रैमासिक 1225 में एक पोजीशन खोलने के लिए, आप बस बिटकॉइन में प्रारंभिक मार्जिन को निधि दे सकते/सकती हैं।

यदि आप एक माइनर (खनिक) या HODLer हैं, तो यह आपके वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग लिए आदर्श है। चूंकि अनुबंध अंतर्निहित क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) में व्यवस्थित होते हैं, कोई भी लाभ आपके दीर्घकालिक स्टैक में योगदान कर सकता है। इसके अलावा, जैसे-जैसे कीमतों में वृद्धि जारी रहेगी, आपके संपार्श्‍विक (कोलैटरल) के मूल्य में तदनुसार वृद्धि होगी। यह लंबे समय में अपनी क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) होल्डिंग्स को बढ़ाने का एक बेहतरीन तरीका है।

आप किसी भी होल्डिंग को USDT में परिवर्तित किए बिना फ्यूचर्स मार्केट में अपने पोजीशन को हेज भी कर सकते/सकती हैं। जैसे, आपको किसी भी क्रिप्टो मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) को समझौता मूल्य पर बेचने की आवश्यकता नहीं है।

USDⓈ-मार्जिन अनुबंधों के लाभ

USDⓈ-मार्जिन अनुबंध USDT या BUSD में उद्धृत और व्यवस्थित रैखिक फ्यूचर्स होते हैं। USDT या BUSD परिनिर्धारण के प्रमुख लाभों में से एक यह है कि आप फिएट में आसानी से वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग अपने रिटर्न की गणना कर सकते/सकती हैं। यह USDⓈ-मार्जिन अनुबंधों को अधिक सहज बनाता है। उदाहरण के लिए, जब आप 500 BUSD का लाभ कमाते हैं, तो आप आसानी से अनुमान लगा सकते हैं कि लाभ लगभग $500 है - क्योंकि 1 BUSD का मूल्य 1 USD के करीब आंकी गई है।

इसके अतिरिक्त, एक सार्वभौमिक परिनिर्धारण मुद्रा, जैसे कि BUSD या USDT, अधिक लचीलापन प्रदान करती है। आप विभिन्न फ्यूचर्स अनुबंध (यानी, BTC, ETH, XRP, आदि) में एक ही परिनिर्धारण मुद्रा का उपयोग कर सकते/सकती हैं। यह वायदा पोजीशन को निधि देने के लिए अंतर्निहित कॉइन को खरीदने की आवश्यकता को समाप्त करते हैं। इस प्रकार, आपको अत्यधिक शुल्क नहीं देना होगा क्योंकि USDT के साथ व्यापार करते समय किसी अतिरिक्त रूपांतरण की आवश्यकता नहीं होती है।

पीएम मोदी के जापान दौरे से भारत को क्या मिला, दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली करार से कितना फायदा, 15 बड़ी बातें

पीएम मोदी के जापान दौरे से भारत को क्या मिला, दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली करार से कितना फायदा, 15 बड़ी बातें

पीएम मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने संयुक्त प्रेस कांन्फ्रेंस की

नई दिल्ली: भारत और जापान ने आपस में 75 अरब डालर के बराबर विदेशी मुद्रा की अदला-बदली की व्यवस्था का करार किया है. यह सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था समझौतों में से एक है. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि जापान के साथ इस तरह की सुविधा से रुपये की विनिमय दर तथा पूंजी बाजारों में बड़ी स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और प्रगाढ़ होगा तथा इसमें विविधता बढ़ेगी. जापान की यात्रा पर गये प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच शिखर स्तर की बातचीत के बाद भारत-जापान की साझा सोच पर जारी वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘वित्तीय तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के दृष्टिकोण से जापान और भारत की सरकारें 75 अरब डालर के द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली समझौते (बीएसए) पर सहमति का स्वागत करती हैं.’’

15 बड़ी बातें

वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, ‘‘अदला-बदली समझौते से भारत विदेशी विनिमय और पूंजी बाजारों में बड़ी स्थिरता आएगी. इस सुविधा के तहत भारत के लिये जापान से उक्त राशि के बराबर विदेशी पूंजी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी.''

दोनों देशों के बीच संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की संभावना को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने पिछले चार साल में हासिल उल्लेखनीय उपलब्धियों की समीक्षा की.

भारत और जापान ने सोमवार को आपस में 75 अरब डालर के बराबर विदेशी मुद्रा की अदला-बदली की व्यवस्था का करार किया.

विदेशी मुद्रा अदला-बदली समझौते के बारे में आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘जापान के 75 अरब डालर की विदेशी मुद्रा की द्विपक्षीय अदला-बदली की यह व्यवस्था दुनिया में इस तरह के सबसे बड़े समझौतों में एक है.''

उन्होंने कहा, ‘‘जापान के अनुरोध को स्वीकार करते हुए भारत बुनियादी ढांचे के लिये पांच साल या उससे अधिक की न्यूनतम परिपक्वता अवधि के विदेशी वाणिज्यक कर्जों के मामले में ‘हेजिंग' यानी संबंधित विदेशी कर्ज को लेकर विदेशी विनिमय दर के वायदा और विकल्प बाजार में सौदे करने की अनिवार्यता को खत्म करने पर सहमत हो गया है.''

थम जाएगी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट! मोदी सरकार ने जापान के साथ किया ये बड़ा करार

Updated: October 30, 2018 9:32 AM IST

थम जाएगी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट! मोदी सरकार ने जापान के साथ किया ये बड़ा करार

नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार जारी गिरावट को थामने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी जापान यात्रा में एक बड़ा करार किया है. इसके तहत दोनों देश आपस में 75 अरब डालर के बराबर विदेशी मुद्रा की अदला-बदली की व्यवस्था करेंगे. इस समझौते के बाद भारत जरूरत पड़ने पर जापान को रुपया देकर डॉलर हासिल कर सकता है. उसी तरह जापान जरूरत पड़ने पर भारत को येन देकर उससे डॉलर ले सकता है. इस तरह दोनों देश भुगतान संकट वायदा का उपयोग करते हुए मुद्रा हेजिंग जैसी स्थिति पैदा होने पर डॉलर की समस्या से नहीं जूझेंगे.

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यह सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था समझौतों में से एक है. जापान के साथ इस तरह की सुविधा से रुपये की विनिमय दर तथा पूंजी बाजारों में बड़ी स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और प्रगाढ़ होगा तथा इसमें विविधता बढ़ेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मेजबान प्रधानमंत्री शिंजो आवे दोनों नेताओं के बीच शिखर स्तर की बातचीत के बाद भारत-जापान की साझा सोच पर जारी वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘वित्तीय तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के दृष्टिकोण से जापान और भारत की सरकारें 75 अरब डालर के द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली समझौते (बीएसए) पर सहमति का स्वागत करती हैं.’’ विदेशी मुद्रा अदला-बदली समझौते के बारे में आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग ने ट्विटर पर लिखा है, ‘‘जापान के 75 अरब डालर की विदेशी मुद्रा की द्विपक्षीय अदला-बदली की यह व्यवस्था दुनिया में इस तरह के सबसे बड़े समझौतों में एक है.’’

बुनियादी सोच में दोष

भारत ने अनाज के मामले में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़ी छलांग लगाई। लेकिन हरित क्रांति की नींव में पड़ी सोच ने एक भयानक वातावरण को जन्म दिया। यह सोच थी उपभोग केंद्रित व्यवस्था निर्माण की। हमने खेती को केवल एक माध्यम यानी रिसोर्स के तौर पर चुना। माध्यम देश की भूख मिटाने का, माध्यम विदेशी मुद्रा बचाने का, माध्यम अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भरता पाने का। और इस सोच के कारण ही खेत, मिट्टी, पानी और किसान, इस सबके दोहन से अधिकतम फायदे की प्रवृत्ति ने जन्म लिया। इन सबमें खेती, मिट्टी, किसान की भलाई और उन तमाम मुद्दों को कहीं जगह नहीं मिली, जिनका ऊपर जिक्र किया गया है।

हरित क्रांति के बाद ज्यादा उत्पादन खेती का मूल मंत्र हो गया और खेती पूरी तरह रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग पर निर्भर हो गई। हालाँकि बीजों पर अनुसंधान भी हुए और ज्यादा पैदावार देने वाले उन्नत किस्म के बीज आम किसानों तक पहुँचे लेकिन उनमें भी बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बोलबाला होने से कुल मिलाकर खेती की लागत लगातार बढ़ती रही। और फिर आई मशीनों की बारी। मिट्टी तैयार करने से लेकर, कुड़ाई, गुड़ाई, बुवाई और कटाई तक में बड़ी-बड़ी मशीनों के इस्तेमाल को खेती में सफलता का रामबाण बताया गया और उसी लिहाज से बैंक ऋण की नीतियाँ बनाई गई। हालाँकि इस पूरी कवायद में इस तथ्य को नजरअंदाज कर दिया गया कि देश के 90 प्रतिशत से ज्यादा किसान छोटे या सीमांत किसान हैं, जिनके खेतों की जोत 5 एकड़ से भी कम है। इन किसानों के लिये बड़ी मशीनों का इस्तेमाल न केवल ज्यादा खर्चीला है, बल्कि अव्यावहारिक भी।

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