बहुआयामी व्यापार मंच

विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है

विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है
भूमंडलीकरण के समर्थकों ने क्या सोचा था कि आगे चलकर वह फायदे के बजाय घाटे में बदल जाएगा। अपनी चीजों को दुनिया में कहीं बेचना तो दूर, घरेलू बाजारों में भी उनकी वाजिब कीमतें मिलना दुश्वार हो जाएंगी।

जापान में 55 वर्षीय महिला ने बदला 138 सालों का इतिहास

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। आज इस बात से इंकार करना बहुत मुश्किल है कि, भारत सहित पूरी दुनिया भर की महिलाएं पुरुषों से किसी भी बात में कम हैं। वह आज हर क्षेत्र में अपना और अपने देश का नाम रोशन कर रहीं हैं। वहीं, इसी राह में जापान की एक महिला ने बदला 138 साल का इतिहास। जानिए कौन है यह महिला और कैसे बदला उन्होंने इतिहास।

कौन है इतिहास वाली महिला :

दरअसल, जापान में 138 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी महिला को जापान के सेंट्रल बैंक के कार्यकारी निदेशक के पद के लिए चुना गया हो। उनका नाम 'टोकिको शिमिजु' है। वह 55 वर्षीय है। इतना ही नहीं शिमिजु पहली ऐसी महिला बन गई है। जो, जापान के सेंट्रल बैंक में कार्यकारी निदेशक का पद संभालेंगी। ऐसा करके शिमिजु ने जापान का विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है 138 साल पुराना इतिहास बदल दिया है। बता दें, इससे पहले आज तक जापान में किसी भी महिला को इस पद के लिए नहीं चुना गया है। बता दें, टोकिको शिमिजु को इस पद के लिए बैंक ऑफ जापान में हुए बदलावों के दौरान चुना गया।

छह कार्यकारी सदस्यों में भी हुईं शामिल :विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है

टोकिको शिमिजु को जापान के सेंट्रल बैंक में कार्यकारी निदेशक पद के साथ ही छह कार्यकारी सदस्यों में भी शामिल किया गया हैं। बता दें, यह 6 सदस्य मिलकर ही बैंक में रोजमर्रा का काम सँभालते है। हालांकि, शिमिजु बैंक से साल 1987 से ही जुड़ी हुई थी। इतने सालों में उन्होंने बैंक विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है में निम्लिखित कई पद संभाले हैं।

वित्तीय मार्केट विभाग

विदेशी मुद्रा विनियम विभाग सहित

बैंक के महाप्रबंधक का पद (2016 में)

लंदन में बैंक की मुख्य प्रतिनिधि पद (2018 में )

बैंक में है 47% महिलाकर्मी :

जानकारी के लिए बता दें, बैंक ऑफ जापान की स्थापना साल 1882 में हुई थी। तब से ही बैंक में 47% कर्मचारी महिला हैं। लेकिन मात्र 13% महिलाएं ही ऐसी हुईं जो वरिष्ठ प्रबंधक पद तक पहुंची हों। बाकि की बची हुई 20% महिलाएं कानूनी मामले, पेमेंट प्रोसेस और बैंक नोट से जुड़े काम देखती हैं। बता दें, बैंक में साल 1998 में एक मौद्रिक नीति की स्थापना की गई थी उसके बाद से ही महिलाओं को उच्च निर्णय लेने वाली पॉलिसी बोर्ड में शामिल किया गया था।

कुछ मुख्य बिंदु :

साल 2018 के विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार जापान की आबादी में 51% हिस्सा महिलाओ के नाम है।

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के अनुसार, जापान की गिनती 153 देशों में 121वें नंबर पर होती है।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

ताज़ा ख़बर पढ़ने के लिए आप हमारे विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है टेलीग्राम चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। @rajexpresshindi के नाम से सर्च करें टेलीग्राम पर।

फॉरेक्स ट्रेडिंग में गैप के बारे में सब कुछ – परिचय – प्रकार – अर्थ

विदेशी मुद्रा व्यापार में अंतर क्या है?

आप इसके नाम से जान सकते हैं। एक सामान्य GAP से पहले कोई बड़ी घटना नहीं होती है और लेन-देन की मात्रा में अचानक वृद्धि नहीं होती है। इसलिए, ट्रेडिंग विश्लेषण या बाजार के अगले आंदोलन के लिए विचार देने के लिए इसका अधिक मूल्य नहीं है।

ब्रेकअवे गैप

ब्रेकअवे जीएपी एक प्रकार है जिसका अंतर पुराने चलन से टूट जाता है जैसा कि नाम से पता चलता है।

इस प्रकार का GAP तभी प्रकट होता है जब बाजार के लिए विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है अत्यंत महत्वपूर्ण समाचार और बड़े आश्चर्य होते हैं, जिससे निवेशकों के लिए बाजार की प्रवृत्ति को उलटने के निर्णय लेने के लिए एक मजबूत मनोवैज्ञानिक लहर पैदा होती है।

जब ब्रेकअवे जीएपी प्रकट होता है, तो यह एक ऐसा क्षेत्र बनाता है जिसे बाजार के पिछले समर्थन और प्रतिरोध स्तरों के माध्यम से तोड़ने वाली मूल्य रेखा के रूप में देखा जाता है।

सादगी के लिए, आप ब्रेकअवे जीएपी को एक ब्रेकआउट के रूप में सोच सकते हैं। इसलिए, यह मूल्य अंतर भरा हो सकता है या नहीं भी हो सकता है (जैसे रीटेस्ट या मार्केट ब्रेकआउट के बाद आगे बढ़ते रहें)। हालांकि, उसके बाद, कीमत उस दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है जो पहले टूट गई थी।

ब्रेकअवे गैप

ऊपर के उदाहरण को देखते हुए, आप देख सकते हैं कि ब्रेकअवे जीएपी के विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है प्रकट होने और डाउनट्रेंड से बाहर निकलने के बाद, बाजार में तेजी आई और जीएपी को भरने के लिए कभी वापस नहीं आया।

भगोड़ा अंतर

भगोड़ा जीएपी एक प्रवृत्ति निरंतरता जीएपी है। चल रहे चलन में, भगोड़ा GAP की उपस्थिति उस प्रवृत्ति को मजबूत करेगी।

बाजार का विश्लेषण करने और व्यापारिक निर्णय लेने के लिए इसे सबसे अच्छा प्रकार का GAP माना जा सकता है।

भगोड़ा GAP की कुछ विशेषताएं ध्यान देने योग्य हैं:

  • भगोड़ा GAP अक्सर एक प्रवृत्ति के बीच में दिखाई देता है
  • यह उच्च मात्रा के साथ आता है जो इस विश्वास को और मजबूत करता है कि मौजूदा प्रवृत्ति जारी रहेगी।
  • भगोड़ा GAP आमतौर पर पिछले ब्रेकअवे GAP द्वारा एक नया चलन बनने के बाद होता है।
  • यह एक प्रवृत्ति निरंतरता अंतर है। इसलिए, यह बाजार की भावना का भी प्रतिनिधित्व करता है।
  • एक अपट्रेंड में, भगोड़ा जीएपी बाजार के उत्साह का प्रतिनिधित्व करता प्रतीत होता है। इसके विपरीत, एक डाउनट्रेंड में, यह बाजार की दहशत की स्थिति का प्रतिनिधित्व करता प्रतीत होता है।

चूंकि भगोड़ा GAP प्रवृत्ति का अनुसरण करता है, इसलिए इसके भरे जाने की संभावना कम होती है। हालाँकि, आपको यह याद रखने की आवश्यकता है कि GAP केवल छोटी अवधि में बाज़ार की गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए, GAP से प्राप्त सिग्नल भी थोड़े समय के लिए ही प्रभावी होंगे।

थकावट गैप

थकावट GAP तब होता है जब बाजार एक लंबा सफर तय कर चुका होता है और “थकावट” के संकेत दिखाता है। उस समय, यह संकेत देता है कि एक नया चलन बनने वाला है। एक थकावट GAP और एक भगोड़ा GAP के बीच भ्रमित होना आसान है।

थकावट गैप

बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रवृत्ति के अंत में थकावट जीएपी प्रकट होता है। लेकिन जरूरी नहीं, यह प्रवृत्ति की शुरुआत में भी दिखाई दे सकता है।

थकावट GAP के साथ बाजार की गति में निम्नलिखित विशेषताएं हैं।

  • अपट्रेंड लंबे समय से चल रहा है।
  • थकावट गैप काफी बड़ा है।
  • उस समय ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत बड़ा था।

ऊपर की छवि में, आप देख सकते हैं कि पिछले Candlesticks की तुलना में GAP अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देता है। लेकिन फिर कीमत नीचे जाती रहती है, जिससे पता चलता है कि वहां कोई और खरीदार नहीं है। यह पहले से ही प्रवृत्ति का उच्चतम मूल्य है और एक डाउनट्रेंड दिखाई देता है।

मतलब गैप के साथ व्यापार करते समय

मैंने ऊपर जो प्रस्तुत किया है, उससे आप कुछ हद तक समझ सकते हैं कि GAP का अर्थ क्या है।

सामान्य तौर पर, GAP एक तकनीकी संकेतक के रूप में कार्य करता है। उनकी उपस्थिति आंशिक रूप से निवेशकों को बता सकती है कि क्या प्रवृत्ति अभी भी जारी है या उचित व्यापारिक निर्णय लेने के लिए प्रवृत्ति समाप्त होने वाली है।

  • ब्रेकअवे जीएपी एक प्रवृत्ति की शुरुआत में होता है। यह संकेत देता है कि एक नया चलन अर्ली बन रहा है।
  • भगोड़ा GAP एक प्रवृत्ति के बीच में होता है। यह मौजूदा प्रवृत्ति की निरंतरता में विश्वास को मजबूत करता है।
  • थकावट जीएपी मौजूदा प्रवृत्ति के अंत में या एक नई प्रवृत्ति की शुरुआत में होता है, जो मात्रा और मूल्य दोनों कारकों द्वारा पुष्टि की जाती है।

GAP के साथ व्यापार करते समय याद रखने योग्य बातें

  • चार्ट पर GAP खोजना आसान है। हालाँकि, आपको यह निर्धारित करना काफी कठिन लगता है कि यह किस प्रकार का GAP है। और यही एक व्यापारी को सीखने और अभ्यास करने की आवश्यकता है।
  • GAP हमेशा नहीं भरा जाता है
  • GAP जितना बड़ा होगा, बाजार की चाल उतनी ही मजबूत होगी।
  • बड़े समय के फ्रेम पर GAP छोटे समय के फ्रेम पर GAP की तुलना में बहुत अधिक प्रभावशाली होता है।
  • व्यापार निर्णय केवल GAP पर आधारित नहीं होने चाहिए। आपको इसे अन्य कारकों, विशेष रूप से प्रवृत्ति के साथ जोड़ना चाहिए। के साथ संयुक्त होने पर GAP अच्छी तरह से काम करता है।
  • प्रत्येक प्रकार के GAP की अपनी विशेषताएं होती हैं। यह जाने बिना व्यापार न करें कि यह किस प्रकार का GAP है।

ट्रेडिंग करते समय GAP हमेशा अपरिहार्य रहा है। अपने विशेष कारकों के साथ, GAP को एक महत्वपूर्ण तकनीकी विश्लेषण संकेतक माना जाता है जो एक व्यापारी को विदेशी मुद्रा बाजार में उचित व्यापारिक निर्णय लेने में मदद करता है।

इस लेख के माध्यम से, मुझे आशा है कि यह आपको यह समझने में मदद करेगा कि GAP क्या है, GAP की प्रकृति और तकनीकी विश्लेषण के लिए इसका क्या अर्थ है। बाद में इसका अध्ययन करने के आधार के रूप में, अगले लेखों में, मैं आपको GAP कैंडलस्टिक पैटर्न से परिचित कराऊंगा। वहां से, आप विदेशी मुद्रा बाजार की गतिविधियों के लिए सबसे सटीक स्पष्टीकरण और निर्णय प्राप्त कर सकते हैं।

पाबंदी के मायने

हापुस आम

भूमंडलीकरण के समर्थकों ने क्या सोचा था कि आगे चलकर वह फायदे के बजाय घाटे में बदल जाएगा। अपनी चीजों को दुनिया में कहीं बेचना तो दूर, घरेलू बाजारों में भी उनकी वाजिब कीमतें मिलना दुश्वार हो जाएंगी।

स्वाद और खूश्बू के लिहाज से भारतीय आम की एक मशहूर किस्म हापुस यानी अल्फांसों के साथ इधर जो कुछ हुआ है, उससे भूमंडलीकरण का वही नकारात्मक चेहरा उभर कर सामने आया है, जिसकी ढकी-छिपी चर्चा अपने देश में अक्सर होती रही है।

हापुस आम, जो आम बेचे जाने के पारंपरिक तरीके यानी वजन या सैकड़ा के भाव से नही बल्कि दर्जन के भाव बिकता है और एक दर्जन की कीमत हाल तक स्थानीय बाजारों मे भी 800 रुपए तक थी। इधर पहली मई की यूरोपीय संघ द्वारा इस पर पाबंदी आयद करने के फैसले के बाद 350-400 रुपए प्रति दर्जन तक आ चुकी है।

यूरोपीय देश ब्रिटेन ही नहीं, दुबई और अन्य मध्य एशियाई देशों में इसकी मांग घटी है और देखा देखी जापान ने इसके आयात पर रोक लगा दी है। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के जिन विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है इलाकों से हापुस की खेपें नवीं मुंबई के वाशी स्थित कृषि उत्पाद बाजार समिति में विदेश भेजने के वास्ते उतरती हैं, वहा इससे लदे ट्रकों की कतारें लग गई हैं।

करेला, बैंगन, चिचिंडा और अरबी नामक चार सब्जियों सहित हापुस पर यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने से कोंकण के आम किसान और व्यापारी हताशा और चिंता में है।

मसला अकेले यूरोपीय सघ का नहीं है, जो भारत से आने वाले फल-सब्जियों की स्वच्छता को यूरोपीय मानकों की कसौटी पर खरा उतरने की शर्त रख रहा है। अमेरिकी, मध्य एशियाई देश, जापान, सिंगापुर, न्यूजीलैंड जैसे देश भी यहां से पहुंचने वाले खाद्यान्नो में ऐसी साफ-सफाई चाहते हैं।

अमेरिका की शर्त है कि हापुस और अन्य फल-सब्जियों को न्यूक्लियर रेडिएशन से उपचारित किया जाए। भारत में यह व्यवस्था में महाराष्ट्र के केवल लासनगांव में उपलब्ध है, जहां देश की सबसे बड़ी प्याज की मंडी है। जापान और मध्य एशियाई देश चाहते हैं कि उन्हें भेजे जाने वाले फल-सब्जियों को गर्म पानी और विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है गर्म वाष्प से उपचारित किया जाए।

यूरोपीय संघ का कहना है कि फल-मक्खियों जैसे परजीवियों का ब्रिटेन पहुंचने का मतलब है कि वहां की सलाद, खीरे, टमाटर वगैरह के सालाना पैदावार को नुकसान पहुंचना। ब्रिटेन में फलों-सब्जियों की जांच करने वाले विभाग का कहना है कि गैर यूरोपीय कीट अगर एक बार वहां की आबो हवा मे रच-बस गए, तो उनसे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए बेहतर है कि उन्हें अपने साथ लाने वाले फल-सब्जियों की खेप की आमद ही रोक दी जाए।

हापुस का निर्यात थमने से आम के देसी उपभोक्ताओं को तो लाभ होगा, लेकिन इसकी भारी कीमत हापुस के किसानों-व्यापारियों और विदेशी मुद्रा भंडार को चुकानी पड़ सकती है। अंदाजा है कि पाबंदी के चंद दिनों में ही महाराष्ट्र-कर्नाटक के किसानों और व्यापारियों को सौ करोड़ रुपए की चपत लग चुकी है। नुकसान सिर्फ भारत का नहीं है। यूरोप में भी भारत से अल्फांसो और आम की अन्य किस्में मंगा कर बाजार में बेचने वाले व्यापारियों के हित भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

मिसाल के तौर पर ब्रिटेन में सालाना आयातित करीब उनतीस लाख किलो भारतीय आमों का बाजार बासठ करोड़ रुपए का है। उधर, पाबंदी से हर दिन ब्रिटेन के लाखो खुदरा विक्रेताओं को भी नुकसान हो रहा है। भारत से सभी प्रकार के फलों का पैंसठ हजार टन के करीब सालाना निर्यात होता है, इसमें सबसे ज्यादा योगदान आम का ही है। इसका कारण यह है कि दुनिया में आम की कुल पैदावार का चालीस फीसद भारत में ही होता है।

ऐतराज सही या गलत है, इसकी कोई जांच अपने देश में तब भी नहीं कराई गई, जब ये खेपे वापस लौट विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है आईं। इससे लगता है कि सरकार को और हमारी कंपनियों को अपने नागरिकों की सेहत की कोई फ़िक्र नहीं है। आखिर जो चीज ब्रितानी या अमेरिकी नागरिक को नुकसान पहुंचा सकती है, वह भारतीयों का हाजमा भला कैसे दुरुस्त रखने में कामयाब हो सकती है। हापुस आम के परजीवी कीट अगर ब्रिटेन में विदेशी मुद्रा व्यापार में गैप क्या है इंसानी सेहत और खेती की बलि ले सकते हैं, तो इनका कुछ असर तो हमारे स्वास्थ्य और फसल पर पड़ रहा होगा।

किसानों और व्यापारियों को हो रहे नुकसान के मोर्चे पर घिरी भारत सरकार ने हालांकि, इस पाबंदी को नाजायज बताने और इस मामले को विश्व व्यापार संगठन के पास ले जाने की चेतावनी भी दी है, लेकिन इसका कोई असर होगा, इसकी संभावना कम है।

मुद्दा यह है कि जिस समझौते की बारीकियो को जाने बगैर सरकार हामी भर चुकी है, वह हमारे लिए गलफांस बन चुकी है। इस समझौते के तहत भारत ने यूरो गैप (यूरोपीय गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेज) नामक एक जरूरी संधि को मंजूरी दे रखी है, जिसमें साफ उल्लेख है कि भारत जैसे गर्म मुल्क को अपना कोई सामान ठंडी प्रकृति वाले यूरोपीय-अमेरिकी देशों में भेजने से पहले कड़े कृषि मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। लेकिन तापमान मे व्यापक अंतर के कारण ऐसे कृषि मानकों का पालन पूरी तरह संभव नहीं हो पाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर भारत ने विश्व व्यापार संगठन समझौता मानने की जल्दबाजी न दिखाई होती और इसकी शर्तों में अपनी जलवायु और भौगोलिक दशकों के अनुकूल परिवर्तन कराने पर जोर दिया होता तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। मुद्दा यह है कि तापमान और जलवायु में अंतर के आधार पर अमेरिका-यूरोप भेजे जाने वाले फल-सब्जियों के परीक्षण और प्रमाणन की मद मे भारत कुछ छूटें हासिल कर सकता है। पर अफसोस कि ऐसा नहीं हो सका।

अब चिड़िया चुग गई खेत वाले अंदाज में भारत सरकार दावा कर रही है कि उसने निर्यात योग्य खाने-पीने की सभी चीजों की जांच-परख और प्रमाणीकरण के वास्ते भरोसेमंद प्रयोगशाला की व्यवस्था की है। उसका दावा यह भी है कि इस प्रयोगशाला द्वारा प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य देश मानते हैं। लेकिन सवाल है कि क्या हापुस के मामले में इस प्रमाणीकरण का सहारा लिया गया था?

वैसे आज जो हड़कंप हापुस पर है, कुछ वैसे ही नजारे भारतीय आयुर्वेदिक औषधियों की खेपो में कीटनाशकों को लेकर पहले भी देखा जा चुका है। यूरोपीय-अमेरिकी देशों की नाराजगी के बाद दवाओं की खेप वापस मंगाई गई। क्या साफी और क्या च्यवनप्राश, जिन औषधियों को देश में खून साफ करने और प्रतिरोधक क्षमता में इजाफे के दावे के साथ धड़ल्ले से बेचा जाता है, उनके बारे में अमेरिका और कनाडा वगैरह ने कहा कि इनमें वे हानिकारक तत्व ज्यादा है।

ऐतराज सही या गलत है, इसकी कोई जांच अपने देश में तब भी नहीं कराई गई, जब ये खेपे वापस लौट आईं। इससे लगता है कि सरकार को और हमारी कंपनियों को अपने नागरिकों की सेहत की कोई फ़िक्र नहीं है। आखिर जो चीज ब्रितानी या अमेरिकी नागरिक को नुकसान पहुंचा सकती है, वह भारतीयों का हाजमा भला कैसे दुरुस्त रखने में कामयाब हो सकती है।

हापुस आम के परजीवी कीट अगर ब्रिटेन में इंसानी सेहत और खेती की बलि ले सकते हैं, तो इनका कुछ असर तो हमारे स्वास्थ्य और फसल पर पड़ रहा होगा। अपने व्यापार को हो रहे नुकसान का हंगामा खड़ा करने और मामले को विश्व व्यापार समझौते में उठाने से पहले क्या जरूरी नहीं है कि भारत सरकार उन आपत्तियों की जमीनी हकीकत जाने और अपने नागरिकों की जेब और सेहत के प्रति भी अपना थोड़ा फर्ज निभाए।

रेटिंग: 4.28
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 512
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *