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मूल्य नीति

मूल्य नीति
कृषि जिंसों पर सरकार को सुझाव देने वाली एजेंसी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने केंद्र सरकार को देश में चीनी की बिक्री के लिए दोहरी मूल्य नीति तैयार करने का सुझाव दिया है। आयोग का मानना है कि इससे किसानों को फायदा होगा।

मूल्य नीति अंग्रेजी में

अनेक अवरोधों के बावजूद प्लास्टिक की खपत में तेजी से वृद्धि हुई है . लेकिन यदि एक उचित मूल्य नीति नहीं बनाई जाती .

Consumption of plastics has been increasing very fast in spite of various constraints , but this trend may not continue , unless there is a proper price policy .

यह फैसला कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों पर आधारित है, जो विपणन सत्र 2016-17 के वास्ते रबी फसलों से संबंधित मूल्य नीति के लिए दी गई थीं।

The decision is based on recommendations of Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP) for the Price Policy for Rabi Crops for the Marketing Season 2016-17.

नए निवेश को बढ़ाने तथा ऊर्जा दक्षता हासिल करने के लक्ष्यों को पूरा करने केलिए भारत को ज्यादा युक्तिसंगत मूल्य नीति बनानी होगी और अपनी ऊर्जा कीमतों को वैश्विक दामों के अनुरूप रखना होगा।

Both goals of expanding new investment and achieving energy efficiency require a more rational pricing policy, aligning India’s energy prices with global prices.

सीएसीपी जो एक विशेषज्ञ संस्था है, ने एमएसपी पर सिफारिशें करते समय उत्पादन लागत, कुल मांग-आपूर्ति, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कीमतें, अंतर फसल मूल्य समानता, कृषि और गैर कृषि क्षेत्रों के बीच कारोबार, शेष अर्थव्यवस्था पर मूल्य नीति के संभावित प्रभाव के अलावा जमीन और पानी जैसे उत्पादन संसाधनों के उचित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने को भी ध्यान में रखा है।

CACP, which is an expert body, takes into account the cost of production, overall demand-supply, domestic and international prices, inter-crop price parity, terms of trade between agricultural and non-agricultural sectors, the likely effect of the Price Policy on the rest of economy, besides ensuring rational utilization of production resources like land and water, while recommending MSPs.

निम्न Google Ads नीतियां मूल्य एक्सटेंशन के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं और आमतौर पर अस्वीकृतियों से संबंधित होती हैं.

The following Google Ads policies are especially relevant to price extensions and are often associated with disapprovals.

परंतु इससे यह तर्क प्रभावित नहीं होता है कि मूल्य विद्वानों एवं नीति बनाने वाली इन संस्थाओं के बीच परस्पर आदान - प्रदान में निहित होता है।

But that does not affect the argument that value lies in the interchange between academia and these institutions that make policy.

यूरोपीय संघ के देशों ने जल संसाधनों के उपयोग के लिए पानी के मूल्य निर्धारण की नीतियों को अपनाया है ताकि पर्यावरण सुरक्षा को प्रोत्साहित किया जा सके।

The EU States have adopted water pricing policies to provide adequate incentives for users to use water resources efficiently thereby contributing to environmental objectives.

तटस्थता की नीति जिन बुनियादी मूल्यों को रेखांकित करती है वे शांति, अहिंसा और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान हैं।

The basic values that underlie the policy of neutrality are of peace, non-violence and peaceful resolution of disputes.

नई हाइड्रोकार्बन लाइसेंसीकरण नीति के तहत मूल्य निर्धारण एवं क्रय विक्रय की स्वतंत्रता एवं पारदर्शी राजस्व सहभाजन प्रक्रिया होगी।

Under the new Hydrocarbon Exploration Licensing Policy, there will be pricing and marketing freedom and a transparent revenue-sharing methodology.

Monetary policies will maintain price stability over the medium term and continue to support economic recovery.

आपकी अटल आज्ञाकारिता तथा सही नीतियों और सही मूल्यों के लिए दृढ़ता, आपके और आपके अविश्वासी साथी के लिए एक स्वास्थ्यकर सुरक्षा है।

Your uncompromising obedience and firmness for right morals and values is a healthy protection for you and your unbelieving mate.

There are other concerns as well because they are saying that because of very expansionary monetary policies it is having an adverse effect on commodity prices.

और अपने इस नए घर को अच्छी तरह से स्वीकार करते हुए उन्होंने भारतीय मूल्यों, पारिवारिक परंपराओं और कार्य नीति को बनाए रखा और आगे बढ़ाया है।

And yet it has retained and carried forward Indian values, family traditions and work ethic while adapting very well to this adopted home.

संकुचनकारी नीति परिणामस्वरूप विकृतियों और परिसंपत्ति मूल्यों की गिरावट से बचने के लिए मुद्रास्फीति को धीमा करने का इरादा है।

Demand reduction refers to efforts aimed at reducing the public desire for illegal and illicit drugs.

और, बड़ी ही सरलता से, मैं उसे सारांशित कर रहा हु क्योकि, समय की थोड़ी पाबंदी है, यह एक देश की क्षमता होती है, दूसरो को अपनी ओर आकर्षित करने की, अपनी संस्कृति से, अपने राजनीतिक मूल्यों से, अपनी विदेश नीतियों से.

And, very simply, and I'm really cutting it short because of the time limits here, it's essentially the ability of a country to attract others because of its culture, its political values, its foreign policies.

यह नीति कम अपेक्षित मूल्य, औपचारिक शिक्षा से एकीकरण का अभाव, निष्कर्ष पर ध्यान देने का अभाव, प्रशिक्षण के लिए अच्छी बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षकों का अभाव, आदि सहित कौशल संबंधी प्रमुख बाधाओं को दूर करती है।

It addresses key obstacles to skilling, including low aspirational value, lack of integration with formal education, lack of focus on outcomes, low quality of training infrastructure and trainers, etc.

यह प्रस्ताव, जो हर दो महीने में बदलता है, यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एक खास नीति या कार्रवाई एक विशिष्ट मूल्य के अनुरूप है।

The resolution, which changes bimonthly, asks whether a certain policy or action conforms to a specific value.

Agricultural Price Policy in India: भारत में कृषि मूल्य नीति क्या है जानिए यहां

भारत एक कृषि संस्कृति आधारित देश है. जहाँ आज भी अधिसंख्य आबादी कृषि उपार्जन के कार्य में लगी हुई है. कुछ समय पहले तक भारत की अर्थव्यवस्था में आधे से अधिक योगदान कृषि का हुआ करता था जबकि अब यह योगदान लगातार घट रहा है. देखा जाए तो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि मूल्य नीति के योगदान के आधार पर कृषि मूल्य नीति के उद्देश्य अलग-अलग देशों में अलग-अलग होते हैं. भारत सरकार की कृषि मूल्य नीति के पीछे का मूल उद्देश्य किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा करना है.

आम तौर पर, विकसित देशों में, कृषि मूल्य नीति का प्रमुख उद्देश्य कृषि आय में भारी गिरावट को रोकना होता है जबकि विकासशील अर्थव्यवस्था में इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि करना होता है. अगर आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की तलाश कर रहे हैं, तो आप हमारे जनरल अवेयरनेस ई बुक डाउनलोड कर सकते हैं FREE GK EBook- Download Now. / GK Capsule Free pdf - Download here

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कृषि मूल्य नीति -

कृषि मूल्य नीति का किसी भी देश के आर्थिक विकास में अग्रणी भूमिका होती है. किसानों को कृषि कार्य हेतु उत्पादन उन्मुख निवेश और कृषि प्रौद्योगिकी के लिए प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने का यह एक महत्वपूर्ण साधन है. इसमें कोई सन्देह नहीं कि कृषि कीमतों में तीव्र या प्रचंड उतार-चढ़ाव के परिणाम कभी किसान और कभी उपभोक्ता के लिए हानिकारक होते हैं.

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अतः भारत जैसे विकासशील देश का हित इसी में है, कि किसान और उपभोक्ता दोनों परेशानी से बचे रहें इसलिए यहाँ फसलों और अनाजों के मूल्य बहुत सोच समझकर तय किए जाने की आवश्यकता है.

कृषि मूल्य नीति, प्रभाव -

भारत जैसे विकासशील देश में कृषि मूल्य नीति के बड़े दूरगामी प्रभाव निकल कर आते हैं यह नीति किसानों की आय और उपभोक्ताओं की खपत दोनों को प्रभावित करती हैं. (भारत सरकार हर साल प्रमुख कृषि वस्तुओं के लिए खरीद या समर्थन मूल्य की घोषणा करती है और सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से कृषि उत्पादों के खरीद कार्यों का आयोजन करती है.) उदाहरण के तौर पर किसी साल किसी विशेष फसल की कीमत में भारी गिरावट होती है तो इससे न केवल किसानों की आय में कमी आएगी बल्कि आने वाले समय में किसान को उस फसल की खेती करने की इच्छा भी घट जाएगी. इससे यह होगा कि यदि वह फसल लोगों का (उपभोक्ताओं) मुख्य खाद्य पदार्थ है, तो फसल की मांग अधिक रहेगी परन्तु आपूर्ति कम हो जाएगी. बफर स्टॉक नहीं होने की स्थिति में सरकार को मजबूरन दूसरे देशों से फसल के आयात को बाध्य होना पड़ेगा.

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नतीज़ा विशेष फसल की कीमतों में भारी वृद्धि और इसकी वजह से उपभोक्ता को भारी नुकसान. इस प्रकार यदि किसी विशेष फसल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती रहती है, तो निश्चित रूप से इसका देश की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है.

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  • राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान के आधार पर कृषि मूल्य नीति के उद्देश्य अलग-अलग देशों में अलग-अलग होते हैं. आम तौर पर, विकसित देशों में, कृषि मूल्य नीति का प्रमुख उद्देश्य कृषि आय में मूल्य नीति भारी गिरावट को रोकना है. जबकि विकासशील अर्थव्यवस्था में इसका प्रमुख उद्देश्य कृषि उत्पादनों में अधिक से अधिक वृद्धि करना है.
  • कृषि मूल्य नीति का सबसे प्रमुख उद्देश्य खाद्यान्न और गैर-खाद्यान्नों की कीमतों मूल्य नीति और कृषि वस्तुओं के बीच उचित संबंध सुनिश्चित करना है ताकि अर्थव्यवस्था के इन दो क्षेत्रों के बीच व्यापार की शर्तें एक दूसरे के खिलाफ न बदले.
  • कृषि मूल्य नीति को अधिकतम और न्यूनतम सीमा के भीतर के उतार-चढ़ाव पर कड़ी नजर रखनी चाहिए, ताकि उत्पादक (किसान) और उपभोक्ता के हितों के बीच संतुलन बहाल रहे.
  • कृषि मूल्य नीति ऐसी होनी चाहिए कि प्रतिस्पर्धी फसलों की कीमतों के बीच संतुलन बना रहे ताकि विभिन्न वस्तुओं के संबंध में उत्पादन लक्ष्यों को उसकी मांग के अनुसार पूरा किया जा सके.
  • कृषि मूल्य नीति का एक प्रमुख उद्देश्य मौसमी उतार-चढ़ाव और इसकी वजह से मूल्य वृद्धि को न्यूनतम सीमा तक नियंत्रित करना है.
  • कृषि मूल्य नीति का लक्ष्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच मूल्य का अधिक एकीकरण लाना भी होना चाहिए, ताकि अधिशेष योग्य मार्केटिंग (विपणन) का नियमित प्रवाह बना रहे और कृषि उत्पादों के निर्यात को नियमित रूप से प्रोत्साहित किया जा सके.
  • कृषि मूल्य नीति का उद्देश्य देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक परिव्यय को बढ़ाना भी होना चाहिए. और इसके लिए सामान्य मूल्य स्तर को स्थिर करना आवश्यक होगा.
  • इसका सबसे महती और जरुरी उद्देश्य है उत्पादन में वृद्धि.
  • फसलों के अधिक उत्पादन की स्थिति में कीमत में गिरावट को रोकने के लिए.
  • बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करके उनके हितों की रक्षा करना.
  • घरेलू खपत की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास.
  • सभी कृषि उत्पादों के मूल्य में स्थिरता प्रदान करने के लिए.
  • कृषि वस्तुओं और कृषि विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों के बीच उचित संतुलन सुनिश्चित करने के लिए.
  • इससे देश के दो अलग अलग क्षेत्रों या पूरे देश के बीच फसल के मूल्य अंतर को दूर होंगे.
  • कृषि उत्पादों के उत्पादन और निर्यात में वृद्धि मूल्य नीति होगी.
  • पूरे देश में विभिन्न उद्योगों को उचित मूल्य पर कच्चा माल उपलब्ध कराना.
  • इससे एक तरफ जहाँ किसानों की आय बढ़ाने के अवसर पैदा किए जा रहे हैं दूसरी तरफ देश के गरीबों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. इससे देश में एक अलग निर्बल विनियोजन की समस्या पैदा होना स्वाभाविक है.
  • उच्च उत्पाद कीमतों के माध्यम से किसानों को सब्सिडी देना एक अशक्त तरीका है क्योंकि इससे उपभोक्ता को उच्च कीमत चुकाने का दण्ड मिलता है. साथ हीं इसका यह मतलब है कि बड़े किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, यानि कि बड़े किसान जो वसे भी अमीर और सक्षम हैं उन्हें जरूरत से ज्यादा मिलेगा जबकि छोटे किसान जो हमेशा संघर्ष की स्थिति में हैं, अभी भी उसी स्थिति में रहेंगे.
  • किसान अपने उत्पादन को बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करते हैं लेकिन यह उन लोगों के लिए समस्या पैदा करता है जिन्हें उत्पादन में इस वृद्धि से लाभ नहीं मिलता है.

भारत की अर्थ व्यवस्था में कृषि के योगदान की कमी का एक कारण विकास भी है. जैसा कि हम जानते हैं जैसे जैसे कोई देश विकास करता है उसकी अर्थ व्यवस्था में कृषि का योगदान कम होता जाता है. यह भी एक कारण है कि भारत के अन्य क्षेत्रों के विकास के कारण यहाँ की अर्थव्यस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी लगातार घटी है. एक नज़र निम्नलिखित आंकड़े पर डालें -

2017 के लिए कोप्रा के लिए मूल्य नीति 2017 के लिए एमएसपी की घोषणा।

डेटा सरकार

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नाम :रूचि शर्मा
पद: उप निदेशक (एसडीडीएस), डीईएस, डीए एंड एफडब्ल्यू
ई-मेल आईडी: dddes[dot]it-agri[at]nic[dot]in
संपर्क नंबर:+91-11-23387280

चीनी के लिए दोहरी मूल्य नीति का सुझाव

► सीएसीपी ने औद्योगिक और घरेलू ग्राहकों के लिए अलग-अलग कीमत पर विचार करने का दिया सुझाव
शीतलपेय, आइसक्रीम और मिठाई बनाने वालों से वसूलें ज्यादा दाम
इससे चीनी मिलों के साथ ही गन्ना किसानों को भी होगा लाभ
कंपनियों के लिए घरेलू ग्राहकों से 20 से 30 फीसदी ज्यादा कीमत रख सकती है सरकार

बिजनेस स�?टैंडर�?ड चीनी के लिए दोहरी मूल्य नीति का सुझाव

कृषि जिंसों पर सरकार को सुझाव देने वाली एजेंसी कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने केंद्र सरकार को देश में चीनी की बिक्री के लिए दोहरी मूल्य नीति तैयार करने का सुझाव दिया है। आयोग का मानना है कि इससे किसानों को फायदा होगा।

सीएसीपी के चेयरमैन विजय पॉल शर्मा ने कहा, 'आम उपभोक्ताओं के लिए वाजिब दाम के साथ ही औद्योगिक ग्राहकों के लिए उत्पादन लागत तथा उपलब्धता के आधार पर उच्च कीमत के लिए दोहरी मूल्य नीति बनाने पर विचार करने का यह उचित समय है।' देश में चीनी के कम उत्पादन के अनुमान और निर्यात की संभावनाओं में सुधार से थोक बाजार में चीनी के दाम 1 से 2 रुपये किलो तक बढ़ गए हैं। उत्तर प्रदेश में चीनी एम के मिल गेट दाम 33 से 34.50 रुपये किलो और महाराष्टï्र में चीनी एस के दाम 32 रुपये किलो हो गए हैं। सरकार ने देश भर में चीनी न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 रुपये किलो मूल्य नीति तय किया है।

उद्योग के सूत्रों के अनुसार देश में कुल चीनी खपत की करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी कंपनियों या बल्क में खरीद करने वाले ग्राहकों की है। इनमें शीतल पेय और मिठाई बनाने वाले भी शामिल हैं। इन ग्राहकों द्वारा सालाना 6 करोड़ टन चीनी की खपत होने का अनुमान है। आम ग्राहकों की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। दिलचस्प है कि औद्योगिक खपत में लगातार तेजी आ रही है लेकिन घरेलू ग्राहकों की ओर से खपत में कमी आ रही है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने कहा, 'कंपनियों के लिए अधिक कीमत होने से चीनी मिलों को अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे वह गन्ने का बकाया तेजी से निपटाने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही किसानों को गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और इससे उनकी आय भी बढ़ेगी। किसानों के फायदे के लिए सभी तरह की पहल का हम समर्थन करते हैं।'

इस बीच रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि चीनी के दाम औसतन 2 रुपये किलो बढऩे से चीनी मिलों के मुनाफे में निकट अवधि में सुधार आ सकता है। दिसंबर अंत में चीनी के दाम नौ माह के उच्च स्तर पर थे। दूसरी ओर गन्ने की कीमत स्थिर बनी हुई है क्योंकि मूल्य नीति उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। इससे एसएपी और केंद्र द्वारा घोषित उचित एवं लाभकारी मूल्य के बीच अंतर काफी कम हो गया है। इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और ग्रुप हेड सब्यसाची मजूमदार ने कहा, 'चीनी के दाम बढऩे और गन्ने की कीमत स्थिर रहने से चीनी मिलों के मुनाफे में निकट भविष्य में सुधार होगा।'

मूल्य विभेदन या अंतर

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मूल्य विभेदन — एक मूल्य निर्धारण नीति है जिसके अनुसार एक ही समय में खरीदारों के विभिन्न समूहों को एक ही सामान अलग-अलग मूल्यों पर बेचा जाता है। यह अंतर बाहरी कारकों के कारण नहीं होता है: उत्पादों के उत्पादन और ढुलाई में निर्माताओं को अधिक लागत नहीं आती है, उपभोक्ताओं के एक विशेष वर्ग के लिए उत्पाद को अधिक आकर्षक बनाने के लिए अलग-अलग कीमतें निर्धारित की जाती हैं।

इस मामले में, "विभेदन" शब्द की नकारात्मक व्याख्या नहीं की जानी चाहिए: इसका मतलब उपभोक्ताओं के एक खास वर्ग के साथ पक्षपात करना नहीं है, बल्कि खरीदारों के विभिन्न समूहों के बीच अंतर करने और उनके लिए अधिक अनुकूल स्थिति बनाने की इच्छा है।

मूल्य विभेदन का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ज़्यादा से ज़्यादा माल उस अधिकतम कीमत पर बेचना है, जो वे अदा करने को तैयार हैं। मूल्य नीति कीमतों के गठन के आधार पर विभिन्न प्रकार के मूल्य विभेदन होते हैं।

मूल्य भेदभाव की विभिन्न श्रेणियां या डिग्री

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ग्राहक की खरीदने की शक्ति के बारे में निर्माता की जागरूकता के आधार पर मूल्य विभेदन मूल्य नीति के प्रकारों को वर्गीकृत किया जाता है। मूल्य भेदभाव के तीन प्रकार या डिग्रियां हैं:

  • प्रथम-डिग्री मूल्य विभेदन (पूर्ण मूल्य विभेदन)- निर्माता ने अपने ग्राहकों और उनकी प्राथमिकताओं का इस हद तक विश्लेषण किया है कि वे एक उत्पाद को अधिकतम कीमत पर बेच सकते हैं जो प्रत्येक ग्राहक भुगतान करने को तैयार है। इस प्रकार की मूल्य निर्धारण नीति को लागू करने के लिए, आपको अपने ग्राहकों के बारे में भारी मात्रा में जानकारी एकत्रित करनी होगी और उन्हें सबसे स्वीकार्य मूल्य पर उत्पाद या सेवा प्रदान करनी होगी। स्पष्ट कारणों से इस मूल्य निर्धारण नीति को लागू करना मुश्किल है: इस मात्रा में डेटा एकत्रित करना और उसे संसाधित करना कठिन है।
  • द्वितीय -डिग्री मूल्य विभेदन- इस स्तर में, विक्रेता उत्पाद की कीमत इस आधार पर निर्धारित करता है कि उपभोक्ता कितनी मात्रा में उत्पाद खरीदता है। एक ही उत्पाद की कीमतें खरीद की मात्रा के आधार पर भिन्न -भिन्न होती हैं, खरीदार स्वतंत्र रूप से उस कीमत को चुनता है जो उसके लिए उपयुक्त होती है।
  • तीसरी डिग्री का मूल्य विभेदन- विक्रेता अलग-अलग खरीदारों को उनकी आय के स्तर के आधार पर अलग-अलग कीमतों पर उत्पाद या सेवा बेचता है। उदाहरण के लिए, वे उन ग्राहकों को छूट प्रदान करते हैं जो कठिन वित्तीय परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

बाजार की स्थिति तय करती है कि किसी उत्पाद की कीमत कैसे तय की जायेगी। वास्तव में, जिस उत्पाद निर्माता का एकाधिकार स्थापित होता है केवल उसके पास ही मूल्य विभेदन के लिए शर्तों को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करने की शक्ति होती है। एकाधिकार में, अपनी मूल्य नीति निर्धारित करना सबसे आसान होता है। यदि किसी कंपनी का एकाधिकार नहीं है, तब एक सुविचारित मूल्य विभेदन संभव है।

मूल्य विभेदन के उदाहरण

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मूल्य विभेदन एक आधुनिक प्रथा है। पहली बार इसका उपयोग विक्टोरिया सीक्रेट लॉन्जरी ब्रांड द्वारा किया गया था: 1996 में, उनके ग्राहकों को कंपनी के उत्पादों के कैटलॉग मिले, जिसमें विभिन्न ग्राहकों के लिए अलग-अलग मूल्य थे। जब एक ग्राहक को कैटलॉग में दी गई अलग-अलग कीमतों के बारे में पता चला, तो वह मूल्य निर्धारण नीति से इतनी नाराज हो गई कि उसने कंपनी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए विक्टोरिया सीक्रेट के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया। ग्राहक केस हार गई क्योंकि अदालत ने फैसला सुनाया कि लचीली मूल्य निर्धारण रणनीति क़ानूनी है।

विशेष उत्पाद बेचने वाले ब्रांडों के लिए, गलत मूल्य विभेदन नीति का उपयोग करने से ग्राहक संबंध ख़राब हो सकते हैं, जिसका अर्थ है बिक्री में गिरावट। इस मामले मूल्य नीति में मूल्य विभेदन नीति बहुत सूक्ष्म तरीके से लागू की जा सकती है, पहले आपको मनोवैज्ञानिक तरीकों से नियमित ग्राहकों की राय का अध्ययन करने की ज़रूरत होती है। यहां मूल्य विभेदन नीति की प्रभावशीलता की शर्त यह होती है कि ग्राहक को इस बात की जानकारी नहीं होनी चाहिए कि अन्य ग्राहकों के लिए उत्पाद के मूल्य अलग हैं।

बड़े मार्केट के लिए मूल्य विभेदन के मामले में, इसके सिद्धांत अलग नहीं है, पर ऐसी मूल्य निर्धारण नीति को लागू करने की शर्तें बहुत अलग हैं। बड़े बाज़ार के लिए, दूसरी डिग्री का मूल्य विभेदन बहुत आम बात है: जहां कोई ग्राहक, उदाहरण के लिए, दो चीजें खरीदता है और एक तीसरी चीज़ मुफ्त उपहार के रूप में प्राप्त कर सकता है। कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे H&M, O'STIN, बर्गर किंग, KFC और कई अन्य कंपनियां मूल्य नीति इन रणनीतियों का उपयोग करती हैं।

कंपनियां मूल्य विभेदन का उपयोग इसलिए करती हैं क्योंकि यह रणनीति उनके लिए लाभदायक है: यह ब्रांड की ओर ध्यान आकर्षित कर सकती है और बिक्री बढ़ा सकती है। लेकिन इस रणनीति के अपने कुछ नुकसान भी हैं।

विषय के अनुसार सीखना

बिज़नेस इनकम में वृद्धि। सर्वोत्तम मूल्य निर्धारण के दृष्टिकोण

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अपने उत्पाद की कीमत को तय करने के 15 तरीके: मांग कारक, मूल्य भेदभाव, अधिक बुकिंग

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