एक दलाल चुनना

एक दिन के व्यापारी की मूल बातें

एक दिन के व्यापारी की मूल बातें
उन्होंने कहा कि भारत डिजिटल पहुंच को सार्वजनिक बना रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब भी ‘‘बड़ा डिजिटल अंतर’’ है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से शासन में गति एवं पारदर्शिता लाई जा सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस

बॉक्स ऑफिस के बाद ओटीटी पर धूम मचायेगी कांतारा, जानें कब होगी रिलीज

LagatarDesk : कन्नड़ फिल्म कांतारा ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धूम मचायी है. अब फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अपना जलवा बिखेरेगी. रिपोर्ट की मानें तो कांतारा 24 नवंबर को अमेजन प्राइम पर रिलीज होगी. हालांकि मेकर्स ने अभी तक ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं की है. इस खबर के फैंस बेसब्री से फिल्म के ओटीटी पर रिलीज होने का का इंतजार कर रहे हैं. (पढ़ें, बोकारो : एसीबी के बहाने चेक एंड बैलेंस करना चाहती हैं हेमंत सरकार : अमर बाउरी)

2022 की बिगेस्ट हिट फिल्मों में से एक है कांतारा

सप्तमी गौड़ा स्टारर फिल्म कांतारा को 2022 की बिगेस्ट हिट फिल्मों में से एक है. इस फिल्म को 30 सितंबर 2022 को कन्नड़ भाषा में रिलीज किया गया था. लेकिन दर्शकों के प्यार और फिल्म के हिट होने के बाद इसे हिंदी और कई दूसरी भाषाओं में भी रिलीज किया जा रहा है. फिल्म एक दिन के व्यापारी की मूल बातें का हिंदी वर्जन 14 अक्टूबर को रिलीज किया गया था. इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी है. अब ओटीटी पर रिलीज को लेकर दर्शकों में काफी क्रेज है.

कांतारा एक लोककथा पर आधारित फिल्म है. इस फिल्म में भूतकोला परंपरा को दिखाया गया है. फिल्म कांतारा की कहानी के राइटर और डायरेक्ट ऋषभ शेट्टी हैं. ऋषभ ने इसमें अभिनय भी किया है. इसके प्रोड्यूसर विजय किरगांडूर और चालुवे गौड़ा हैं. इस फिल्म को होंबाले फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है. फिल्म में एक छोटे से गांव में एक देवता को लेकर प्रचलित मान्यताएं दिखाई गयी हैं. यह कहानी एक ऐसे राजा की है जो शांति की तलाश में दर-दर भटकता है. राजा को एक पत्थर में शांति मिलती है लेकिन उसके लिए एक शर्त रखी जाती है. कहानी में यहीं से कई ट्विस्ट आते हैं.

जी-20 में भारत की अध्यक्षता के दौरान ‘विकास के लिए डेटा’ पर विशेष जोर रहेगा: मोदी

Image: ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को जी-20 शिखर सम्मेलन में कहा कि ‘डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन’ (डिजिटल प्रौद्योगिकी के अनुकूल ढलने के लिए बदलाव) कुछ लोगों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए और इसका अधिक लाभ तभी मिल सकता है, जब इसकी एक दिन के व्यापारी की मूल बातें पहुंच को वास्तव में समावेशी बनाया जाए।

मोदी ने इस बात की मजबूती से वकालत एक दिन के व्यापारी की मूल बातें की कि जी-20 नेता अगले 10 वर्षों में हर इंसान के जीवन में ‘डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन’ लाने के लिए काम करने का संकल्प लें, ताकि कोई भी व्यक्ति नई प्रौद्योगिकियों के लाभ से वंचित न रहे।

प्रधानमंत्री ने ‘डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन’ पर आयोजित एक सत्र में कहा कि आगामी वर्ष में भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ‘विकास के लिए डेटा’ के इस्तेमाल को मुख्य रूप से महत्व दिया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस: "Helping men and boy"

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस

हर एक दिन के व्यापारी की मूल बातें वर्ष 19 नवंबर को पुरुषों के स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनकी सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को उजागर करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस (International Men's Day) मनाया जाता है। यह दिन उन सकारात्मक मूल्यों को चिन्हित करता है जो पुरुष इस दुनिया में लाते हैं और एक रोल मॉडल (role model) बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 2022 की थीम है "Helping men and boy"

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष एक दिन के व्यापारी की मूल बातें दिवस के उद्देश्य

जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से प्रभावशाली पुरुषों को बढ़ावा देना

MP के सराफा एक दिन के व्यापारी की मूल बातें कारोबारी से साढ़े 5 करोड़ की धोखाधड़ी: दिल्ली के कारीगर को मरम्मत के लिए दिए थे हीरे जड़े सोने के गहने, 3 साल बाद भी नहीं लौटाया

कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। एक दिन के व्यापारी की मूल बातें एक दिन के व्यापारी की मूल बातें ग्वालियर के एक बड़े सराफा कारोबारी के साथ करोड़ों रूपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सराफा कारोबारी के साथ धोखाधड़ी करने वाला उनका ही सुनार है, जिससे वह करीब 20 सालों से जेवरात तैयार करा रहा था, आरोपी मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है। उसे सराफा कारोबारी ने करीब 3 साल पहले अपने पुश्तैनी गहने एक दिन के व्यापारी की मूल बातें मरम्मत के लिए दिए थे। गहनों पर हीरे भी जड़े थे। इन्हीं गहनों को वह हड़प लिया। गहनों की कीमत करीब 5.50 करोड़ रूपए है। पीड़ित कारोबारी की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

एसएसपी अमित सांघी ने बताया कि सराफा बाजार में जैन ज्वेलर्स के नाम से सराफा कारोबारी मुकेश जैन की दुकान है। वहीं दिल्ली के करोल बाग में रहने वाला दिवाकर जाना सुनार है। मुकेश दिवाकर से गहने बनवाते थे। इसी विश्वास में मुकेश ने 2019 में अपने पुश्तैनी गहने जिनमें 119 कैरेट हीरे जड़े हुए थे, उन्हें मरम्मत के लिए दिवाकर को दिया था। दिवाकर ने 3 महीने में मरम्मत कर वापस लौटाने की बात कही। लेकिन तीन महीने बाद भी उसने गहने नहीं लौटाए। इसके बाद लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन के दौरान उससे संपर्क नहीं हो पाया। फिर वह कुछ दिन में पैसे लौटाने की बात करने लगा।

सुनिश्चित करूंगा कि प्रशासन संविधान के दायरे में काम करे : डॉ. बोस

केंद्र व राज्य के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डॉ. सी. वी. आनंद बोस पश्चिम बंगाल के नये राज्यपाल के तौर पर आ रहे हैं। मूल रूप से केरल के निवासी डॉ. बोस वर्तमान में मेघालय सरकार के एडवाइजर हैं। सिविल सर्वेंट, हाउसिंग एक्सपर्ट, लेखक व वक्ता होने के साथ ही डॉ. बोस भारत सरकार के सचिव, मुख्य सचिव और यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर भी रह चुके हैं। इसके अलावा बोस यूएन हैबिटाट गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के तौर पर डॉ. बोस एक दिन के व्यापारी की मूल बातें के नाम की घोषणा होने के बाद सन्मार्ग से उन्होंने खास बातचीत की। डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने अपनी भावी कार्य योजनाओं पर क्या कहा, आइये जानते हैं।
सवाल-पश्चिम बंगाल में आपकी प्राथमिकताएं क्या होंगी ?
जवाब – सबसे पहले मैं पश्चिम बंगाल को समझूंगा, यहां के हालातों पर अध्ययन करूंगा। इसके बाद मेरी प्राथमिकता यह देखने की हाेगी कि प्रशासन अपने कार्य संविधान के तहत करे। इसके साथ ही केंद्र व राज्य सरकार के बीच सौहार्द्रपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश रहेगी। राज्यपाल की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि सरकार संविधान के दायरे के भीतर काम करे और लोगों को राहत पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सभी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। एक दिन के व्यापारी की मूल बातें
सवाल – अलग उत्तर बंगाल, कूचबिहार व दार्जिलिंग जैसी मांगों के बीच कितनी चुनौतियां महसूस कर रहे हैें ?
जवाब – ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न हो। जरूरत है तो केवल सही तरीके से आगे बढ़ने की। एक साथ मिलकर सभी समस्याओं का समाधान संभव है। सभी को साथ लेकर काम करना सबसे जरूरी है। मैं वही कहूंगा या करूंगा जो संविधान के तहत है। राज्यपाल को रास्ता जानना होगा, दिखाना होगा और उस पर चलना होगा।
सवाल – केंद्र व राज्य सरकार के बीच घमासान कोई नयी बात नहीं है। इसे कैसे ठीक करेंगे ?
जवाब – राजभवन और राज्य सरकार के बीच मतभेदों को विवाद की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि ‘विचारों में अंतर’ की तरह देखा जाना चाहिए क्योंकि दोनों एक-दूसरे की पूरक संस्थाएं हैं। मुझे केंद्र तथा राज्य के बीच सेतु के रूप में काम करना होगा। उम्मीद है कि इसमें राज्य सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। अगर किसी तरह का टकराव होता है तो उसका कोई ना कोई हल भी जरूर है। इससे संबंधित सभी को एकजुट होकर इसे ठीक करने की आवश्यकता है। राजभवन और राज्य सरकार एक-दूसरे की पूरक संस्थाएं हैं। संविधान के निर्माता निश्चित रूप से कोई दायित्वहीन पद सृजित नहीं करना चाहते थे। निश्चित रूप से एक उद्देश्य था। संविधान में राज्यपाल का उद्देश्य स्पष्ट रूप से परिभाषित है।
राज्य के लोगों के कल्याण के लिए करूंगा काम
डॉ. बोस ने कहा, ‘संविधान के तहत राज्य के लोगों के कल्याणा के लिए कार्य करूंगा। पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जायेगा।’ उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के लोगों का होकर काम करना ही सबसे मुख्य है।’ राजभवन व राज्य सरकार के बीच चले आये विवाद पर डॉ. बोस ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल के राजभवन में पहुंचकर मैं सब कुछ ठीक से जांच करूंगा, सब विश्लेषण करूंगा और इसके बाद ही जान सकूंगा कि किसी मुद्दे पर समस्या क्यों थी।’ उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल का कर्तव्य व अधिकार एक दिन के व्यापारी की मूल बातें संविधान में स्पष्ट है। निर्वाचित राज्य सरकार के भी सांवैधानिक अधिकार हैं। मैं संविधान की मर्यादा रक्षा में राज्यपाल के तौर पर अपने कर्तव्यों का पालन करूंगा।’ डॉ. बोस के अनुसार, ‘लोकतंत्र में काम करने के दौरान टकराव हो ही सकता है। कई बार यह अनिवार्य भी हो जाता है, मत विरोध को लेकर विचलित नहीं होना चाहिये।’ राजभवन को भाजपा का पार्टी कार्यालय बनाने का आरोप कई बार सत्ताधारी पार्टी तृणमूल लगाती आयी है। इस पर डॉ. बोस ने कहा, ‘आरोप तो आरोप ही हैं। मैं संविधान और अपने विश्लेषणों के अनुसार राजभवन को संचालित करने की कोशिश करूंगा। इस मामले में सब निश्चिंत रह सकते हैं।’ यहां उल्लेखनीय है कि गत गुरुवार को नये राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस की घोषणा की गयी। फिलहाल उन्होंने पद भार ग्रहण नहीं किया है।

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