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बिटकॉइन के उपयोग

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क्या है बिटकॉइन, कैसे काम करती है और कितनी सुरक्षित है, यहां मिलेगा जवाब

बिटकॉइन

दुनिया भर में बिटकॉइन का वर्चस्व बढ़ रहा है। अब दुनिया की जानी मानी इलेक्ट्रिक कंपनी टेस्ला ने भी कह दिया है कि बिटकॉइन के उपयोग वह जल्द ही बिटकॉइन को अपने वाहनों के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार करेगी। साथ ही उबर कंपनी भी बिटकॉइन की तरफ बढ रही है।

क्या है बिटकॉइन
बिटकॉइन वर्चुअल करेंसी है। इसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी, जो कि अब धीरे-धीरे इतनी लोकप्रिय हो गई है कि इसकी एक बिटकॉइन की कीमत लाखों रुपये में के बराबर पहुंच गई है। इसे क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है, क्योंकि भुगतान के लिए यह क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल करता है। यानी, अब इस करेंसी को भविष्य की करेंसी भी कह सकते हैं।

कैसे होता है लेन-देन
बिटकॉइन के लेन-देन के लिए उपभोक्ता को प्राइवेट की (कुंजी) से जुड़े डिजिटल माध्यमों से भुगतान का संदेश भेजना पड़ता है, जिसे दुनिया भर में फैले विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिये सत्यापित किया जाता है।

इसके जरिए होने वाला भुगतान डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान के विपरीत है। बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है, जिसका इस्तेमाल केवल ऑनलाइन लेनदेन के लिए किया जाता है। बिटकॉइन के मूल्यों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या एक मुद्रा के रूप में कार्य करने में यह सक्षम है.


चूंकि यह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित नहीं है, इसलिए निजी तौर पर इसका विनिमय होता है। इसे 'माइनिंग' नामक एक प्रक्रिया के जरिये जेनरेट किया जाता है, जिसके लिए एक खास किस्म के सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इसके लिए बेहतर प्रोसेसर एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति की जरूरत है, जो हमारे देश में मुश्किल है।

क्या बिटकॉइन सुरक्षित है
यह क्रिप्टोकरेंसी अत्यधिक अस्थिर है और इसलिए बहुत जोखिम भरा है। उदाहरण के लिए, जनवरी में बिटकॉइन का मूल्य बढ़कर 42,000 डॉलर हो गया, और फिर 30,000 डॉलर तक गिर गया, फिर एक हफ्ते के दौरान फिर से बढ़कर 40,000 डॉलर हो गया था।

बिटकॉइन के लिए आपके पास एक ऐप होता है जिसके जरिए आप लेन देन करते हैं। मान कर चलिए कि सर्वर से आपकी फाइल हट गई या पासवर्ड गलत हो गया तो समझ लो आपके पैसे हमेशा के लिए खो गए। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि कुछ लोगों ने लाखों के बिटकॉइन इसलिए खो दिए क्योंकि उनके पास पासवर्ड नहीं है वह भूल गए।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने-बेचने पर थी 10 साल की जेल
क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया था कि देश में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री करने वालों को 10 साल की जेल की सजा मिलेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक इसकी जद में वे सभी लोग आएंगे जो क्रिप्टोकरेंसी तैयार करेगा, उसे बेचेगा, क्रिप्टोकरेंसी रखेगा, किसी को भेजेगा या क्रिप्टोकरेंसी में किसी प्रकार की डील करेगा। इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलती थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिबंध हटा दिया है।

दुनिया भर में बिटकॉइन का वर्चस्व बढ़ रहा है। अब दुनिया की जानी मानी इलेक्ट्रिक कंपनी टेस्ला ने भी कह दिया है कि वह जल्द ही बिटकॉइन को अपने वाहनों के लिए भुगतान के रूप में स्वीकार करेगी। साथ ही उबर कंपनी भी बिटकॉइन की तरफ बढ रही है।

क्या है बिटकॉइन
बिटकॉइन वर्चुअल करेंसी है। इसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी, जो कि अब धीरे-धीरे इतनी लोकप्रिय हो गई है कि इसकी एक बिटकॉइन की कीमत लाखों रुपये में के बराबर पहुंच गई है। इसे क्रिप्टोकरेंसी भी कहा जाता है, क्योंकि भुगतान के लिए यह क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल करता है। यानी, अब इस करेंसी को भविष्य की करेंसी भी कह सकते हैं।

कैसे होता है लेन-देन
बिटकॉइन के लेन-देन के लिए उपभोक्ता को प्राइवेट की (कुंजी) से जुड़े डिजिटल माध्यमों से भुगतान का संदेश भेजना पड़ता है, जिसे दुनिया भर में फैले विकेंद्रीकृत नेटवर्क के जरिये सत्यापित किया जाता है।

इसके जरिए होने वाला भुगतान डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान के विपरीत है। बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है, जिसका इस्तेमाल केवल ऑनलाइन लेनदेन के लिए किया जाता है। बिटकॉइन के मूल्यों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या एक मुद्रा के रूप में कार्य करने में यह सक्षम है.


चूंकि यह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा समर्थित नहीं है, इसलिए निजी तौर पर इसका विनिमय होता है। इसे 'माइनिंग' नामक एक प्रक्रिया के जरिये जेनरेट किया जाता है, जिसके लिए एक खास किस्म के सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। इसके लिए बेहतर प्रोसेसर एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति की जरूरत है, जो हमारे देश में मुश्किल है।

क्या बिटकॉइन सुरक्षित है
यह क्रिप्टोकरेंसी अत्यधिक अस्थिर है और इसलिए बहुत जोखिम भरा है। उदाहरण के लिए, जनवरी में बिटकॉइन का मूल्य बढ़कर 42,000 डॉलर हो गया, और फिर 30,000 डॉलर तक गिर गया, फिर एक हफ्ते के दौरान फिर से बढ़कर 40,000 डॉलर हो गया था।

बिटकॉइन के लिए आपके पास एक ऐप होता है जिसके जरिए आप लेन देन करते हैं। मान कर चलिए कि सर्वर से आपकी फाइल हट गई या पासवर्ड गलत हो गया तो समझ लो आपके पैसे हमेशा के लिए खो गए। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि कुछ लोगों ने लाखों के बिटकॉइन इसलिए खो दिए क्योंकि उनके पास पासवर्ड नहीं है वह भूल गए।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने-बेचने पर थी 10 साल की जेल
क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया था कि देश में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री बिटकॉइन के उपयोग करने वालों को 10 साल की जेल की सजा मिलेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक इसकी जद में वे सभी लोग आएंगे जो क्रिप्टोकरेंसी तैयार करेगा, उसे बेचेगा, क्रिप्टोकरेंसी रखेगा, किसी को भेजेगा या क्रिप्टोकरेंसी में किसी प्रकार की डील करेगा। इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलती थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बिटकॉइन के उपयोग यह प्रतिबंध हटा दिया है।

बिटकॉइन क्या है किसने बनाया और कैसे खरीदें | Bitcoin In Hindi

Bitcoin Kya Hai In Hindi: बिटकॉइन का नाम तो आप लोगों ने जरुर सुना होगा, क्योंकि आज के समय में यह Crptocurrency बहुत चर्चा में है इसलिए सभी लोग बिटकॉइन के बारे में जानना चाहते हैं. बिटकॉइन या टेक्नोलॉजी में रूचि रखने वाले लोग अक्सर इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि Bitcoin क्या होता है.

अगर आपको भी बिटकॉइन के बारे में जानना है तो यह लेख आपके लिए ही है. हमने इस लेख के द्वारा कोशिस की है कि आपको बिटकॉइन के बारे में पूरी जानकारी प्रदान करा सकें.

इस लेख में आपको जानने को मिलेगा कि Bitcoin क्या है इन हिंदी, बिटकॉइन का आविष्कार किसने किया, बिटकॉइन का उपयोग कहाँ किया जाता है, आप कैसे एक बिटकॉइन खरीद सकते हैं, बिटकॉइन के फायदे और नुकसान क्या हैं और क्या भारत में बिटकॉइन लीगल है.

हमें पूरी उम्मीद है कि इस लेख में आपके बिटकॉइन से सम्बंधित अनेक सारे Confusion दूर हो जायेंगे, लेकिन उसके लिए आपको इस लेख को पूरा पढना होगा. तो चलिए शुरू करते हैं आज का यह लेख और जानते हैं बिटकॉइन क्या होता है विस्तार से.

बिटकॉइन के लाभ का पता नहीं, हानि का अंत नहीं, इसके भविष्य पर भी काले बादल

बिटकॉइन ( P C : Pixabay )

ऐसी कई वित्तीय योजनाएं और विचार हैं जिनके बारे में उसके समर्थक और विरोधी एक दूसरे से विपरीत राय रखते हैं। उदाहरण के लिए कोई कहता है कि सागौन का पौधा लगाना अच्छा रिटर्न देगा। कोई और कहेगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। कोरोना संकट के बीच बिटकॉइन को लेकर जुनून बढ़ता दिख रहा है। इसके पक्ष और विपक्ष में तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। मगर सच यह है कि बिटकॉइन से अटकलबाजों और अपराधियों को छोड़कर किसी और को कोई फायदा नहीं है। यह कार्बन उत्सर्जन के रूप में भी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में कोई शक नहीं कि बहुत जल्द अधिकतर देशों की सरकारें इसे प्रतिबंधित कर दें।

कोरोना महामारी के बारे में आ रही भयावह खबरों के बीच एक और कहानी चल रही है। यह कहानी है बिटकॉइन की। कोरोना महामारी बिटकॉइन कीमतों के लिए अच्छी रही है और बिटकॉइन को लेकर जूनून बिटकॉइन के उपयोग बढ़ रहा है। कॉइनबेस ग्लोबल नामक अमेरिकन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 14 अप्रैल को अपना आइपीओ लेकर आया। एक दिन एक्सचेंज के कर्मचारियों और संस्थापकों ने जरूर मोटा मुनाफा कमाया, लेकिन इसके बाद स्टॉक का दौर उतना अच्छा नहीं रहा।

हाल ही में मैंने बिटकॉइन के बारे में एक खबर पढ़ी। इस खबर ने बिटकॉइन को लेकर मेरा ध्यान आकर्षित किया। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) की एंटी करप्शन यूनिट ने जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक के आचरण के बारे में जांच का ब्योरा जारी किया है। इस कहानी में बिटकॉइन की अहम भूमिका है।

दिल्ली के रहने वाले मिस्टर अग्रवाल ने हीथ स्ट्रीक को दो बिटकॉइन का भुगतान किया था। यह भुगतान उन जानकारियों के बदले में था जिनका इस्तेमाल सट्टेबाजी में किया जा सकता था। स्ट्रीक ने बाद में बिटकॉइन 35,000 डॉलर में बेच दिया। उन्हें इसका गहरा अफसोस रहा होगा, क्योंकि दो बिटकॉइन की कीमत बेची गई रकम के तीन गुने से अधिक होगी।

एक दूसरी गैर वित्तीय खबर बिटकॉइन को लेकर है। इसमें रैनसमवेयर हैक्स का उल्लेसख किया गया है। एक दिन कोई इंडिविजुअल या कंपनी पाती है कि उसके कंप्यूटर की सारी फाइल एनक्रिप्टेड है। स्क्रीन पर रैनसम नोट है जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि फाइल वापस पाने के लिए बिटकॉइन में कैसे भुगतान करना है।

साफ है कि ज्यादातर पीडि़त भुगतान कर देते हैं। मैं समझता हूं कि बिटकॉइन मिस्टर अग्रवाल, हीथ स्ट्रीक और रैनसमवेयर अपराधियों की जरूरतों पर खरा उतरता है। उनको इस बात के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए कि बिटकॉइन की खोज की गई जिससे वे अपना कारोबार ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से चला सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे कहना पड़ता कि बिटकॉइन पूरी तरह से बेकार है।

ऐसी कई वित्तीय योजनाएं और विचार हैं जिनके बारे में उसके समर्थक और विरोधी एक दूसरे से विपरीत राय रखते हैं। उदाहरण के लिए कोई कहता है कि सागौन का पौधा लगाना अच्छा रिटर्न देगा। कोई और कहेगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। ये बिल्कुल विपरीत विचार हैं। बिटकॉइन इस तरह से नहीं है। बिटकॉइन के समर्थक और इस पर शक करने वाले इसकी बुनियादी खासियत को लेकर सहमत हैं।

समर्थकों के अनुसार बिटकॉइन बहुत अच्छा है, क्योंकि यह एक करेंसी है जिसे कोई सेंट्रल बैंक या सरकार नियंत्रित नहीं करती है। बिटकॉइन अनजान और ट्रेस न किए जा सकने वाले ट्रांजैक्शन की अनुमति देता है। कोई भी सरल तकनीकी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बिटकॉइन बना सकता है। विरोधी खेमे का कहना है कि बिटकॉइन एक बेकार विचार है।

बिटकॉइन के समर्थक इस बात पर निराशा जताते हैं कि बहुत सी सरकारें इसके प्रति दुश्मनी का रवैया रखती हैं। वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर किसी सरकार का दुश्मनी भरा रवैया तार्किक है। दुनिया में हर सरकार अपनी करेंसी और अपने मौद्रिक परिदृश्य पर नियंत्रण रखना चाहेगी।

जो देश ऐसा नहीं कर सकते हैं उनको आर्थिक मोर्चे पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए जब भी लोग एक करेंसी में भरोसा खो देते हैं, तो वे अपनी असेट किसी और करेंसी में शिफ्ट कर देते हैं। एक तय उम्र पार कर चुके हर भारतीय को वे दिन आज भी याद हैं जब ऐसा नियमित तौर पर होता था।

सबसे बड़ी बात माइनिंग प्रॉसेस की लगातार बढ़ रही बिजली की खपत है। यह बिटकॉइन की अंतर्निहित खासियत है। कैंब्रिज यूनीवर्सिटी की स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि बिटकॉइन सालाना 178 टेरावाट की खपत करता है। एक तरफ हम कार्बन फुटप्रिंट और क्लाइमेट इमरजेंसी की लगातार बात करते हैं। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी रकम को बनाने में बड़े पैमाने पर एनर्जी को बरबाद किया जा रहा है जिसका अटकलबाजी और आपराधिक गतिविधियों के अलावा और कोई इस्तेमाल नहीं है।

हाल में ऐसी खबरे आई थीं कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कड़े कदम उठाने जा रही है। इसके तहत भारतीय नागरिकों के पास मौजूद सभी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया जाना था। साफ है कि अभी सरकार की प्राथमिकताएं दूसरी हैं। लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि आखिरकार सरकार इस तरह के कदम उठाएगी, जिससे दुनिया की दूसरी सरकारें बिटकॉइन को खत्म करने की दिशा में प्रेरित हों।

(लेखक वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

बिटकॉइन के लाभ का पता नहीं, हानि का अंत नहीं, इसके भविष्य पर भी काले बादल

बिटकॉइन ( P C : Pixabay )

ऐसी कई वित्तीय योजनाएं और विचार हैं जिनके बारे में उसके समर्थक और विरोधी एक दूसरे से विपरीत राय रखते हैं। उदाहरण के लिए कोई कहता है कि सागौन का पौधा लगाना अच्छा रिटर्न देगा। कोई और कहेगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा।

नई दिल्ली, धीरेंद्र कुमार। कोरोना संकट के बीच बिटकॉइन को लेकर जुनून बढ़ता दिख रहा है। इसके पक्ष और विपक्ष में तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। मगर सच यह है कि बिटकॉइन से अटकलबाजों और अपराधियों को छोड़कर किसी और को कोई फायदा नहीं है। यह कार्बन उत्सर्जन के रूप में भी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में कोई शक नहीं कि बहुत जल्द अधिकतर देशों की सरकारें इसे प्रतिबंधित कर दें।

कोरोना महामारी के बारे में आ रही भयावह खबरों के बीच एक और कहानी चल रही है। यह कहानी है बिटकॉइन की। कोरोना महामारी बिटकॉइन कीमतों के लिए अच्छी रही है और बिटकॉइन को लेकर जूनून बढ़ रहा है। कॉइनबेस ग्लोबल नामक अमेरिकन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 14 अप्रैल को अपना आइपीओ लेकर आया। एक दिन एक्सचेंज के कर्मचारियों और संस्थापकों ने जरूर मोटा मुनाफा कमाया, लेकिन इसके बाद स्टॉक का दौर उतना अच्छा नहीं रहा।

हाल ही में मैंने बिटकॉइन के बारे में एक खबर पढ़ी। इस खबर ने बिटकॉइन को लेकर मेरा ध्यान आकर्षित किया। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) की एंटी करप्शन यूनिट ने जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक के आचरण के बारे में जांच का ब्योरा जारी किया है। इस कहानी बिटकॉइन के उपयोग में बिटकॉइन की अहम भूमिका है।

दिल्ली के रहने वाले मिस्टर अग्रवाल ने हीथ स्ट्रीक को दो बिटकॉइन का भुगतान किया था। यह भुगतान उन जानकारियों के बदले में था जिनका इस्तेमाल सट्टेबाजी में किया जा सकता था। स्ट्रीक ने बाद में बिटकॉइन 35,000 डॉलर में बेच दिया। उन्हें इसका गहरा अफसोस रहा होगा, क्योंकि दो बिटकॉइन की कीमत बेची गई रकम के तीन गुने से अधिक होगी।

एक दूसरी गैर वित्तीय खबर बिटकॉइन को लेकर है। इसमें रैनसमवेयर हैक्स का उल्लेसख किया गया है। एक दिन कोई इंडिविजुअल या कंपनी पाती है कि उसके कंप्यूटर की सारी फाइल एनक्रिप्टेड है। स्क्रीन पर रैनसम नोट है जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि फाइल वापस पाने के लिए बिटकॉइन में कैसे भुगतान करना है।

साफ है कि ज्यादातर पीडि़त भुगतान कर देते हैं। मैं समझता हूं कि बिटकॉइन मिस्टर अग्रवाल, हीथ स्ट्रीक और रैनसमवेयर अपराधियों की जरूरतों पर खरा उतरता है। उनको इस बात के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए कि बिटकॉइन की खोज की गई जिससे वे अपना कारोबार ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से चला सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे कहना पड़ता कि बिटकॉइन पूरी तरह से बेकार है।

ऐसी कई वित्तीय योजनाएं और विचार हैं जिनके बारे में उसके समर्थक और विरोधी एक दूसरे से विपरीत राय रखते हैं। उदाहरण के लिए कोई कहता है कि सागौन का पौधा लगाना अच्छा रिटर्न देगा। कोई और कहेगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। ये बिल्कुल विपरीत विचार हैं। बिटकॉइन इस तरह से नहीं है। बिटकॉइन के समर्थक और इस पर शक करने वाले इसकी बुनियादी खासियत को लेकर सहमत हैं।

समर्थकों के अनुसार बिटकॉइन बहुत अच्छा है, क्योंकि यह एक करेंसी है जिसे कोई सेंट्रल बैंक या सरकार नियंत्रित नहीं करती है। बिटकॉइन अनजान और ट्रेस न किए जा सकने वाले ट्रांजैक्शन की अनुमति देता है। कोई भी सरल तकनीकी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बिटकॉइन बना सकता है। विरोधी खेमे का कहना है कि बिटकॉइन एक बेकार विचार है।

बिटकॉइन के समर्थक इस बात पर निराशा जताते हैं कि बहुत सी सरकारें इसके प्रति दुश्मनी का रवैया रखती हैं। वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर किसी सरकार का दुश्मनी भरा रवैया तार्किक है। दुनिया में हर सरकार अपनी करेंसी और अपने मौद्रिक परिदृश्य पर नियंत्रण रखना चाहेगी।

जो देश ऐसा नहीं कर सकते हैं उनको आर्थिक मोर्चे पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए जब भी लोग एक करेंसी में भरोसा खो देते हैं, तो वे अपनी असेट किसी और करेंसी में शिफ्ट कर देते हैं। एक तय उम्र पार कर चुके हर भारतीय को वे दिन आज भी याद हैं जब ऐसा नियमित तौर पर होता था।

सबसे बड़ी बात माइनिंग प्रॉसेस की लगातार बढ़ रही बिजली की खपत है। यह बिटकॉइन की अंतर्निहित खासियत है। कैंब्रिज यूनीवर्सिटी की स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि बिटकॉइन सालाना 178 टेरावाट की खपत करता है। एक बिटकॉइन के उपयोग तरफ हम कार्बन फुटप्रिंट और क्लाइमेट इमरजेंसी की लगातार बात करते हैं। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी रकम को बनाने में बड़े पैमाने पर एनर्जी को बरबाद किया जा रहा है जिसका अटकलबाजी और आपराधिक गतिविधियों के अलावा और कोई इस्तेमाल नहीं है।

हाल में ऐसी खबरे आई थीं कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कड़े कदम उठाने जा रही है। इसके तहत भारतीय नागरिकों के पास मौजूद सभी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया जाना था। साफ है कि अभी सरकार की प्राथमिकताएं दूसरी हैं। लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि आखिरकार सरकार इस तरह के कदम उठाएगी, जिससे दुनिया की दूसरी सरकारें बिटकॉइन को खत्म करने की दिशा में प्रेरित हों।

(लेखक वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

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