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अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में निवेश क्यों करें?

अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में निवेश क्यों करें?

Financial planning: पहली सैलरी से ही ऐसे शुरू करें निवेश, कभी नहीं होगी पैसों की कमी

आपके शौक और सपनों के बीच कभी पैसे की कमी आड़े न आए, इसकी तैयारी की जिम्मेदारी भी आपकी ही है और ये तैयारी आपको अपनी पहली सैलरी से ही शुरू करनी चाहिए. फिर आपने पहली नौकरी या बिजनेस किसी भी उम्र में क्यों न शुरू किया हो. कहीं ऐसा न हो कि पैसे की कमी की वजह से कई सपने सिर्फ सपने ही रह जाएं. आज हम बात कर रहे हैं First Salary से Financial planning की.

नई दिल्ली : किसी भी सैलेरीड पर्सन को पूछ लीजिए तो ताराप्रकाश जोशी की पंक्तियां हूबहू याद आ जाएंगी, 'मेरा वेतन ऐसे रानी, जैसे गरम तवे पे पानी'. ऐसा इसीलिए क्योंकि ज्यादातर सैलेरीड लोग अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग नहीं करते. अगर आपकी भी नई-नई नौकरी लगी है और शुरुआती तनख्वाह का लुत्फ उठा रहे हैं, तो ये मौका कुछ देर रुक कर इत्मिनान से ये आर्टिकल पढ़ने का है.

सबसे पहले ये कहावत अच्छे से याद कर लीजिए कि 'काम से पैसा मिलता है और पैसे से पैसा बनता है'. लिहाज़ा, अपनी पहली ही तनख्वाह से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग बना लीजिए. अगर आप चाहते हैं कि शौक और सपनों के बीच कभी पैसे की कमी आड़े न आए, इसकी तैयारी भी आपको ही करनी होगी. जानिए पहली तनख्वाह मिलते ही क्या-क्या काम करना जरूरी है ताकि रिटायरमेंट से पहले आप बन सकें करोड़पति.

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Investment से पहले कराएं Insurance

निवेश से पहले बीमा कराना जरूरी है. अगर बीमा नहीं होगा तो एक झटके में आपकी बचत और निवेश दोनों जा सकती है. शुरुआत में इंश्योरेंस करवाना इसीलिए भी फायदेमंद है क्योंकि इंश्योरेंस की प्रीमियम भी कम आती है. इसलिए यह जरूरी है कि आप पहली सैलरी से ही अपने लिए टर्म और मेडिकल इंश्योरेंस ले लें. ऑनलाइन इंश्योरेंस का प्रीमियम कम आता है, लेकिन कोई भी इंश्योरेंस लेने से पहले कंपनी के सभी नियम और शर्तें जरूर जान लें. इसके साथ ही कंपनियों को आपस में कंपेयर करके ही इंश्योरेंस लें और हां, उसका प्रीमियम समय पर भरने वाला हिस्सा तनख्वाह आते ही निकाल लें.

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RD-FD के साथ म्यचुअल फंड का है जमाना

अपनी तनख्वाह के एक हिस्से से इंश्योरेंस के बाद निवेश (Investment and insurance) जरूरी है ताकि आपके साथ, आपका पैसा भी कमाई कर सके. तो अपनी पहली सैलरी में कुछ पैसे तो जरूर बचाइए. हो सकता है आपकी सैलरी बहुत कम हो, लेकिन फिर भी बचत की आदत यहीं से शुरू होगी. सारे खर्च निकालने के बाद 30 फीसदी बचत हो और इसके बाद 20 फीसदी का निवेश किया जाए. इससे बेहतर काम कुछ हो नहीं सकता.

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RD-FD पर मिलने वाला ब्याज अब काम हो गया है. महंगाई जिस तेजी से बढ़ती है वहां उस अनुपात में पैसा नहीं बढ़ रहा, इसीलिए म्यूचुअल फंड की दुनिया में दाखिल होने का मौका भी बना ही लीजिए. लेकिन यहां समस्या होगी कि आपके लिए कौन सा म्यूचुअल फंड सही है. इसके लिए काफी रिसर्च की जरूरत है. क्योंकि बाजार में तो कई हजार म्यूचुअल फंड स्कीम हैं. म्यूचुअल फंड मैनेजर्स के जरिए भी और ऑनलाइन भी. जिस तरह से आप ठीक समझें, काम शुरू किया जा सकता है. बस थोड़ा सा खुद का रिसर्च और मार्केट एक्सपर्ट से बातचीत कर कंपनियों को कंपेयर करें और फिर म्यूचुअल फंड के रास्ते शेयर मार्केट से रिटर्न कमाइए.

अपना इमरजेंसी फंड रखो तैयार

जिंदगी इतनी उलझन भरी है कि हर किसी को इमरजेंसी फंड रखना जरूरी है. अपनी सैलरी का 10 फीसदी का इमरजेंसी फंड बनाएं. इस फंड को बचत खाते में रखें, क्योंकि इमरजेंसी फंड की लिक्वीडिटी बहुत जरूरी होती है और आपके बचत खाते से ज्यादा लिक्वीडिटी कहीं नहीं होती. लेकिन क्योंकि बचत खाते में ब्याज बहुत कम होता है, इसलिए इस पैसे को निष्क्रिय नहीं छोड़ना चाहिए. आप अपने बचत खाते में इस पैसे को स्वीप-इन FD कर सकते हैं, जिस पर सात से आठ फीसदी तक ब्याज मिलता है. इसके अलावा आप म्यूचुअल फंड की किसी ऐसी स्कीम में भी इनवेस्ट कर सकते हैं, जिसमें से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा हो.

एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने लक्ष्मी फॉर लक्ष्मी की शुरुआत की

मुंबई- इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भारत के बड़े म्यूचुअल फंडों में से एक एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने एक विशेष वित्तीय सशक्तिकरण (financial empowerment) पहल #लक्ष्मीफॉरलक्ष्मी की घोषणा की है जो महिलाओं के लिए और महिलाओं द्वारा संचालित होगी। इसके तहत एचडीएफसी म्युचुअल फंड एक अनूठी मिस्ड कॉल सेवा के माध्यम से महिला निवेशकों को उनके पास एक महिला वित्तीय विशेषज्ञ से जोड़ेगा। फाइनेंशियल मामलों की महिला एक्सपर्ट निवेशक के प्रश्नों का उत्तर देकर उनका मार्गदर्शन और समाधान करेगी, जैसे कि म्यूचुअल फंड में क्यों और कैसे निवेश करें, एसआईपी के लाभ क्या हैं वगैरह वगैरह।

यह नई पहल इस तथ्य पर आधारित है कि किसी व्यक्ति के लिए किसी अवधारणा को समझना बहुत आसान होता है जब इसे किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा सिखाया जाता है जो उन्हें समझता है और समान विचारधारा वाला होता है। #लक्ष्मीफॉरलक्ष्मी पहल महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए एक वित्तीय सशक्तिकरण अभियान है। इसके माध्यम से एचडीएफसी म्यूचुअल फंड अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में निवेश क्यों करें? का लक्ष्य महिला निवेशकों को उनके लिए म्यूचुअल फंड निवेश को सुलभ बनाने के साथ-साथ आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने की यात्रा में उनकी सहायता करना है।

यह पहल एचडीएफसी म्यूचुअल फंड के निवेशक शिक्षा अभियान (Investor Education campaign) #BarniSeAzadi का विस्तार है, जो भारत के 75 वें स्वतंत्रता दिवस पर लॉन्च किया गया और जिसमें महिलाओं से पारंपरिक बचत विधियों (traditional savings methods) से अपने पैसे को आजाद कराने और म्यूचुअल फंड (एमएफएस) में निवेश करने का आग्रह किया, ताकि वे अपनी कड़ी गाढ़ी कमाई के पैसे से और पैसा कमा सकें। इस अभियान को देश भर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और इसने वित्तीय जागरूकता पैदा करने के लिए प्रयास को सार्थक साबित किया। #Barniseazadi जैसे अभियान महिलाओं के लिए वित्तीय जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व को दोहराते हैं।

एचडीएफसी एएमसी के एमडी और सीईओ नवनीत मूनोट ने कहा कि महिलाओं को हमेशा पैसे बचाने के लिए और उसका इस्तेमाल किसी मुश्किल समय के दौरान करने हेतु जाना जाता है। हालांकि, ऐसे पारंपगत तरीके से पैसा रखने से शायद ही कभी मुद्रास्फीति या महंगाई से लड़ने लायक जैसी कमाई होती है। इस प्रकार, हमारे #लक्ष्मी फॉर लक्ष्मी अभियान के माध्यम से, हम महिलाओं को निवेश के तरीकों को बेहतर ढंग से समझने और उनसे लाभ पाने के लिए उन्हें सशक्त बनाना चाहते हैं। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड न केवल एक धन निर्माता (wealth creator) बनने की इच्छा रखता है बल्कि हर भारतीय, विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक इन्वेस्टमेंट एजुकेटर भी है, क्योंकि जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं, तो वे एक मजबूत, प्रगतिशील समाज के लिए काफी अधिक योगदान देते हैं जो स्वस्थ और अधिक समृद्ध साबित होते हैं।

महिलाओं को फाइनेंशियल प्लानिंग की बारीकियों को काफी पहले ही समझ लेना चाहिए, ताकि वे सेविंग कर उसका उचित निवेश कर धन का सृजन कर सकें और परिणामस्वरूप आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। इस संबंध में, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड इस देश की हर एक महिला को अपने वित्तीय विकल्प प्रदान करने और उन्हें सक्षम बनाना चाहता है। इसलिए आपसे अनुरोध है कि कृपया इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि हमारे देश में अधिक से अधिक महिलाएं निवेश करना शुरू कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।

sebi न्यूज़

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में Stock Market के गुर सीखने को मिलेगा, 'भारत का शेयर बाजार' नाम से स्टॉल लगाएगा सेबी

सेबी ने कहा कि 14-27 नवंबर 2022 तक नयी दिल्ली में होने वाले 41वें भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (आईआईटीएफ- 2022) में 'भारत का शेयर बाजार' नाम से एक स्टॉल स्थापित कर रहा है।

Big Alert! SEBI ने जारी किया सर्कुलर, निवेशकों को लेकर उठाया ये बड़ा कदम; 31 मार्च 2023 से लागू होगा नया नियम

SEBI ने आज एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें उसने निवेशकों के हित को ध्यान में रखते हुए कुछ नए नियम बनाएं है। साथ ही, 15 अप्रैल तक मौजूदा अनपेड क्लाइंट सिक्योरिटीज को खत्म करने का आदेश दिया गया है।

लिस्टेड कंपनियों पर सेबी की सख्ती, निवेशकों की 2,899 शिकायतों पर सुनाया फैसला

सेबी के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर माह की शुरुआत में 3,001 शिकायतें लंबित थीं। सेबी के पास ये शिकायतें रिफंड, आवंटन, निकासी और ब्याज से संबंधित थीं।

SEBI का बड़ा एक्शन, बॉम्बे डाइंग और वाडिया परिवार पर लगाया 2 साल का प्रतिबंध, थोपा 15.75 करोड़ रुपये का जुर्माना

सेबी ने वाडिया समूह की कंपनी स्काल सर्विसेज लिमिटेड और इसके तत्कालीन निदेशक डी एस गगरात, एन एच दतनवाला, शैलेश कार्णिक, आर चंद्रशेखरन और बॉम्बे डाइंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक एवं मुख्य वित्तीय अधिकारी दुर्गेश मेहता पर भी यह पाबंदी और जुर्माना लगाया है।

सेबी तीन कंपनियों की संपत्तियों की 10 नवंबर को करेगा नीलामी, जानिए क्या है मामला

इन 10 संपत्तियों में से पांच सुमंगल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की, तीन इंफोकेयर इंफ्रा लिमिटेड की हैं और शेष जीएसएचपी रियलटेक लिमिटेड की हैं।

IPO का भाव सुझाना SEBI का काम नहीं, कंपनियां प्राइस बैंड तय करने की प्रक्रिया का खुलासा करें

IPO: आप किस मूल्य पर आईपीओ लाना चाहते हैं यह देखना आपका काम है। हमारा इसके बारे में सुझाव देने का काम नहीं है।’’

Share Brokers के झूठे वादों पर लगाम लगाने के लिए SEBI ने बढ़ाई सख्ती, इन कारणों से उठाया यह कदम

Share Brokers के झूठे वादों पर लगाम लगाने के लिए SEBI ने बढ़ाई सख्ती, इन कारणों से उठाया यह कदम SEBI increased strictness to false promises by Share Brokers

Stock Market निवेशकों के लिए SEBI लाएगा 'रिस्क फैक्टर डिसक्लोजर', सही फैसले लेने में मिलेगी मदद

पूंजी बाजार में निवेश की मूल बातों को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है, और इसका एक प्रमुख कारण सही जानकारी की कमी है।

SEBI ने म्युचुअल फंड कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय शेयरों में निवेश की अनुमति दी, निवेशकों को मिलेगा बंपर रिटर्न

सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि प्रत्येक म्यूचुअल फंड द्वारा विदेशी निवेश फरवरी के स्तर तक सीमित रहे।

Jio-Facebook Deal: रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए आई ये बुरी खबर, फेसबुक डील में कंपनी से हुई बड़ी चूक

सेबी के प्रावधानों का उल्लंघन के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज और सावित्री पारेख एवं के सेतुरामन पर संयुक्त रूप से 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला लिया गया है

SEBI ने Mutual Funds निवेशकों के लिए ‘नॉमिनी’ बनाने का नियम बदला, 1 अगस्त से लागू होगा नया रूल

इस पहल का मकसद प्रतिभूति बाजार में सभी पक्षों की गतिविधियों में एकरूपता लाना है। पिछले साल सेबी ने नये कारोबारी और डीमैट खाता खोलने वाले निवेशकों के लिये भी ऐसा ही विकल्प दिया था।

SEBI ने NSE की पूर्व प्रमुख चित्रा रामकृष्ण को भेजा नोटिस, 3.12 करोड़ रुपये की करेगा वसूली

नोटिस में यह चेतावनी भी दी गयी है कि अगर वह 15 दिन के भीतर भुगतान करने में विफल रहती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करने के साथ संपत्ति तथा बैंक खातों की कुर्की भी की जा सकती है।

IPO Watch 2022: पांच और कंपनियों को SEBI से आईपीओ लाने की मंजूरी, 11 हजार करोड़ जुटाने की तैयारी

ब्लैकस्टोन समर्थित आधार हाउसिंग आईपीओ के जरिये 7,300 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है।

अच्छी खबर: सेबी ने बढ़ाई लिमिट, UPI के जरिए अब 5 लाख रुपये तक निवेश करें

एक मई, 2022 या उसके बाद खुलने वाली ऋण प्रतिभूतियों के सार्वजनिक निर्गमों पर नया प्रावधान लागू होगा।

माधवी पुरी बुच बनी सेबी की नई चेयरपर्सन, जानिए कौन हैं ये

सूत्रों ने बताया कि मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने तीन साल की शुरुआती अवधि के लिए बुच की नियुक्ति को मंजूरी दी है।

CBI ने NSE में अनियमितता मामले में चित्रा के सलाहकार आनंद सुब्रमण्यम को किया गिरफ्तार, सेबी ने की थी शिकायत

सेबी की इस रिपोर्ट में एक रहस्यमयी योगी के बारे में पता चला है जो पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण के कार्यों और अन्य अनियमितताओं का मार्गदर्शन कर रहा था।

स्टार्टप कंपनी शेयर बाजार के लिए बड़ी चुनौती, जानिए, सेबी चेयरमैन ने क्यों कही ये बात

तकनीकी कंपनियों ने अब तक आईपीओ के जरिये लगभग 43,283 करोड़ रुपये जुटाए हैं। त्यागी ने कहा, इन कंपनियों का उचित मूल्यांकन इन दिनों हितधारकों के बीच गहन बहस का विषय है।

राहत: कंपनियों में चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक का पद अलग करना स्वैच्छिक होगा, अनिवार्य नहीं : सेबी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अगर भारतीय कंपनियों के इस मामले में कोई विचार हैं, तो नियामक को इस पर गौर करना चाहिए।

शेयरों की तरह Gold से मिनटों में कमा पाएंगे मुनाफा, SEBI ने एक्सचेंज के लिए BSE को मंजूरी दी

सेबी ने जनवरी में सोने के शेयर बाजार के संचालन के लिए एक रूपरेखा पेश की थी। इसके तहत ईजीआर के रूप में पीली धातु का कारोबार किया जाएगा।

विदेशी निवेशकों का Share Market पर भरोसा बरकरार, किया इतने हजार करोड़ का निवेश

सेबी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बाजारों में पी-नोट्स के जरिये निवेश का मूल्य दिसंबर, 2021 के अंत तक बढ़कर 95,501 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो नवंबर के अंत तक 94,826 रुपये था।

फंड ऑफ फंड्स को लेकर न हों कंफ्यूज, यहां पाएं पूरी जानकारी

Fund of Funds: ग्लोबल FoF ऐसे फंड होते हैं, जो ग्लोबल फंड्स या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) की यूनिट में एक ज्योग्राफिक मेंडेट के साथ निवेश करते हैं

  • Himali Patel
  • Publish Date - September 22, 2021 / 01:22 PM IST

फंड ऑफ फंड्स को लेकर न हों कंफ्यूज, यहां पाएं पूरी जानकारी

ग्लोबल लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश करने के बजाय, FoF निवेशकों को विदेशी बाजारों में निवेश करने का आसान और कम जोखिम भरा तरीका ऑफर करते हैं

निवेशकों के तौर पर हम सभी डिवेलपिंग टेक्नोलॉजी और लार्ज इनोवेशन कॉर्पोरेशन तक पहुंच चाहते हैं, जो ग्रोथ में अहम भूमिका निभाते हैं. इस लिहाज से अंतर्राष्ट्रीय इक्विटी में निवेश करने के लिए म्युचुअल फंड सबसे किफायती विकल्प बना हुआ है. ग्लोबल एक्सपोजर वाले म्यूचुअल फंड ज्यादातर फंड ऑफ फंड्स (FoF) होते हैं, जो भारतीय एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए ऑफर किए जाते हैं. सरल शब्दों में कहें तो भारत में ग्लोबल FoF ऐसे फंड होते हैं, जो ग्लोबल फंड्स या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) की यूनिट में एक ज्योग्राफिक मेंडेट के साथ निवेश करते हैं.

FoF में हिस्सेदारी कैसे काम करती है

ग्लोबल लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में सीधे निवेश करने के बजाय, FoF निवेशकों को विदेशी बाजारों में निवेश करने का आसान और कम जोखिम भरा तरीका ऑफर करते हैं. इक्विटी या बॉन्ड में सीधे निवेश करने की जगह इस फंड का मैनेजर अन्य म्यूचुअल फंडों के पोर्टफोलियो को मैनेज करता है.

एक FoF उसी फंड हाउस या किसी अन्य फंड हाउस द्वारा मैनेज स्कीम में निवेश कर सकता है. पोर्टफोलियो को कई तरह के रिस्क सहने और निवेशकों के वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाया गया है. डिफरेंट फंड कैटेगरी में निवेश करने के चलते निवेशकों को विविधता से अधिक फायदा मिलने की संभावना होती है.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको अपनी भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना हाई ग्रोथ देखने को मिलती है. इसके अलावा, यह कंट्री-स्पेसिफिक रिस्क को कम करने में मदद करता है.

कौन निवेश कर सकता है

फंड ऑफ फंड्स उन छोटे निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो ज्यादा जोखिन उठाना नहीं चाहते. पोर्टफोलियो में विविधता लाने से रिस्क घटता है. यह सीमित मासिक निवेश की क्षमता रखने वालों के लिए भी अच्छा साधन है. पांच साल या उससे अधिक समय तक निवेश करने वाले व्यक्ति भी इस फंड में निवेश कर सकते हैं.

Gold Price Today: आज इस महीने की सबसे कम कीमतों पर बिक रहा है सोना और चांदी, जानिए क्यों, फटाफट चेक करें नए रेट्स

Gold Silver Price Today 9th September 2021: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है. गुरुवार को चांदी के दाम में 800 रुपये प्रति किलोग्राम से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई.

Gold Price Today: आज इस महीने की सबसे कम कीमतों पर बिक रहा है सोना और चांदी, जानिए क्यों, फटाफट चेक करें नए रेट्स

TV9 Bharatvarsh | Edited By: अंकित त्यागी

Updated on: Sep अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में निवेश क्यों करें? 09, 2021 | 5:08 PM

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें गिरने से घरेलू बाजार में सोना खरीदना और सस्ता हो गया है. गुरुवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने के भाव 196 रुपये अंतरराष्ट्रीय म्युचुअल फंड में निवेश क्यों करें? प्रति दस ग्राम तक लुढ़क गए. वहीं, इस दौरान चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. एक किलोग्राम चांदी का भाव लुढ़कर 63 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे चला गया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी डॉलर में आ रही तेजी की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के दाम गिर रहे है. अगले कुछ हफ्तों तक इसकी गिरावट थमने के आसार नहीं है. ऐसे में घरेलू बाजार में सोने की कीमतें लुढ़कर 43 रुपये प्रति दस ग्राम तक आ सकती है.

सोने की नई कीमतें (Gold Price, 9 September 2021)

दिल्ली के सर्राफा बाजार में गुरुवार को 99.9 फीसदी वाले सोने के दाम 196 रुपये गिरकर 45,952 रुपये पर आ गए. इससे पहले बुधवार कीमतें 46,148 रुपये प्रति दस ग्राम पर बंद हुई थी.

वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के दामों में तेज गिरावट देखने को मिली है. बाजार में दाम गिरकर 1,800 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गए है. कारोबा के अंत में सोना 1793 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ.

चांदी की नई कीमतें (Silver Price, 9 September 2021)

सोने की तरह चांदी में भी भारी गिरावट आई है. गुरुवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी के भाव 830 रुपये प्रति किलोग्राम गिर गए. चांदी की कीमतें 63,545 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 62,715 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी के दाम 24.05 डॉलर प्रति औंस पर आ गए है.

क्यों सस्ता हुआ सोना (Why gold price down sharply)

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वाइस प्रेसीडेंट (कमोडिटी रिसर्च) नवनीत दमानी का कहना है कि विदेशी बाजारों में सोने की कीमतें लगातार गिर रही है. इनका 1800 डॉलर प्रति औंस के नीचे रहना सेंटीमेंट को कमजोर करता है. उनका कहना है कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से आए बयानों का असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ रहा है. इसी का असर सोने और चांदी पर है.

ऐसे करें खरीदारी नहीं रहेगा चोरी होने का डर!

एक्सपर्ट्स बताते हैं सोने में निवेश का एक विकल्प गोल्ड म्यूचुअल फंड भी है. ये ऐसी योजनाएं हैं जो मुख्य रूप से गोल्ड ETF में निवेश करती हैं.

गोल्ड म्यूचुअल फंड सीधे भौतिक सोने में निवेश नहीं करते हैं, लेकिन उसी स्थिति को अप्रत्यक्ष रूप से लेते हैं. गोल्ड म्यूचुअल फंड ओपन-एंडेड निवेश प्रोडक्ट है जो गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) में निवेश करते हैं और उनका नेट एसेट वैल्यू (NAV) ETFs के प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है.

आप मासिक SIP के माध्यम से 1,000 रुपए से कम के साथ गोल्ड म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकते हैं. इसके निवेश करने के लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती है.आप किसी भी म्यूचुअल फंड हाउस के माध्यम से इसमें निवेश की शुरुआत कर सकते हैं.

गोल्ड म्युचुअल फंड में 3 साल से अधिक के निवेश को लॉन्ग-टर्म माना जाता है और इसके लाभ को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) कहा जाता है.

सोने पर LTCG पर इंडेक्सेशन बेनिफिट (प्लस सरचार्ज, अगर कोई हो और सेस) के साथ 20% की दर से कर लगाया जाता है, जबकि शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) पर निवेशक को लागू स्लैब दर के अनुसार टैक्स देना होता है.

गोल्ड म्यूचुअल फंड में एग्जिट लोड हो सकता है जो आम तौर पर 1 साल तक होता है. म्यूचुअल फंड हाउस एग्जिट लोड तब लगाते हैं जब आप एक निश्चित अवधि से पहले ही अपने निवेश का मुनाफा वसूलना चाहते हैं.

एग्जिट लोड निवेशकों को बाहर जाने से रोकने के लिए लगाया जाता है. अलग-अलग म्यूचुअल फंड का एग्जिट लोड लगाने का समय भिन्न होता है. एग्जिट लोड आपकी NAV का छोटा सा हिस्सा होता है, तो आपके बाहर जाने पर काटा जाता है.

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